श्रीनगर. कश्मीर घाटी में सेना के शीर्ष अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बृहस्पतिवार को कहा कि सेना जल्द ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ‘इंक्रिप्टेड हैंडसेट’ का तोड़ निकालने में सक्षम होगी. लेफ्टिनेंट जनरल घई ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए माना कि आंतकवादियों के बीच संचार आतंकवादी समूहों को गोपनीयता प्रदान कर रहा है लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि इसका तोड़ निकालने का काम प्रगति पर है.
उन्होंने कहा, ह्लआंतकवादियों के बीच संचार में इंक्रिप्शन की विभिन्न परतें हैं और वर्तमान में यह उन्हें वह गोपनीयता प्रदान कर रहा है जो वे चाहते हैं.” लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कोर के कमांडर के रूप में अंतिम बार संवाददाताओं को संबोधित करते कहा, ह्ललेकिन मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि इस संबंध में काम जारी है और जल्द ही हम उस ‘इंक्रिप्शन’ का तोड़ निकालने में सक्षम होंगे. ” उन्होंने कहा, ह्लमुझे उम्मीद है कि इससे आतंकवादी नेटवर्क पर और भी अधिक असर पड़ेगा.” घई जल्द ही सैन्य संचालन के महानिदेशक का पदभार संभालेंगे.
इजराइल-लेबनान संघर्ष में मोबाइल फोन को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, ह्लजब भी दुनिया भर में किसी भी सैन्य बल द्वारा कोई नया तरीका अपनाया जाता है तो हम हमेशा सबक सीखने के लिए उस पर ध्यान देते हैं ताकि हम अपने लिए प्रासंगिक चीजों को शामिल कर सकें और अपनी सेना व सशस्त्र बलों को उसी के अनुसार तैयार कर सकें.” उन्होंने कहा, ह्लपश्चिम एशिया में जो कुछ हम देख रहे हैं वह स्पष्ट रूप से एक नया चलन है और जिस तरह से यह सामने आ रहा है, वह काफी अनोखा है. इसलिए हम निश्चित रूप से इसका विश्लेषण करेंगे और इस बारे में निष्कर्ष निकालेंगे कि क्या प्रासंगिक है तथा यह हमें कैसे प्रभावित कर सकता है.” ये अल्ट्रा हेंडसेट कश्मीर घाटी में कुछ मुठभेड़ों से बरामद किए गए थे.
पाकिस्तानी सेना के लिए विशेष रूप से चीनी कंपनियों द्वारा निर्मित इन विशेष हैंडसेट को पिछले साल 17-18 जुलाई की मध्यरात्रि में जम्मू क्षेत्र के पुंछ जिले के सुरनकोट के सिंदाराह शीर्ष क्षेत्र में और इस साल 26 अप्रैल को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर के चेक मोहल्ला नौपोरा इलाके में मुठभेड़ के बाद जब्त किया गया था. अधिकारियों ने कहा कि डिवाइस संदेश प्रसारण और रिसेप्शन के लिए रेडियो तरंगों पर काम करता है. प्रत्येक ‘अल्ट्रा’ सेट सीमा पार स्थित एक नियंत्रण स्टेशन से जुड़ा होता है और दो ‘अल्ट्रा’ सेट एक दूसरे तक नहीं पहुंच सकते हैं.