प्रधानमंत्री की डिग्री पर टिप्पणी : न्यायालय ने गुजरात में केजरीवाल के खिलाफ समन बरकरार रखा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 21 Oct 2024 08:18 PM
प्रधानमंत्री की डिग्री पर टिप्पणी : न्यायालय ने गुजरात में केजरीवाल के खिलाफ समन बरकरार रखा
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता के बारे में कथित टिप्पणी को लेकर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संजोयक अरविंद केजरीवाल की वह याचिका सोमवार को खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने मामले में जारी समन को रद्द करने से इनकार करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी. इससे केजरीवाल को मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर कथित टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि मामले में आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा.

गुजरात की एक मेट्रोपॉलिटन अदालत ने मोदी की डिग्री के बारे में केजरीवाल और ‘आप’ सांसद संजय सिंह के कथित ”व्यंग्यात्मक” और ”अपमानजनक” बयानों को लेकर दायर मानहानि मामले में दोनों नेताओं को तलब किया था. गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा, सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी मुहैया कराने के मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) के आदेश को रद्द करने के बाद गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल ने कथित टिप्पणियों को लेकर केजरीवाल और सिंह के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था.

न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की एक अलग पीठ ने इसी मामले में सह-आरोपी संजय सिंह द्वारा दायर याचिका आठ अप्रैल को खारिज कर दी थी. न्यायालय ने कहा, ”हमें समान रुख अपनाना होगा. उस रुख को ध्यान में रखते हुए हम वर्तमान याचिका पर विचार नहीं करना चाहेंगे. इसे खारिज किया जाता है.” हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है और सभी विवादों पर मुकदमे की सुनवाई के दौरान फैसला लिया जा सकता है. केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा कि पटेल इस मामले में पीड़ित पक्ष नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ”अगर बयान किसी भी तरह से मानहानिकारक था, तो भी आपराधिक मानहानि का मामला दायर करना मोदी का काम है, न कि गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का.” विश्वविद्यालय की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत की एक अलग पीठ मामले में सिंह की याचिका आठ अप्रैल को ही खारिज कर चुकी है. मेहता ने कहा कि डिग्री विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है. उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा सीआईसी के आदेश को खारिज किए जाने का हवाला भी दिया.

सिंघवी ने दलील दी कि मानहानि का कोई मामला नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने केवल यह पूछा था कि विश्वविद्यालय मोदी की डिग्री प्रकाशित क्यों नहीं कर रहा है. हालांकि, पीठ ने केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी. उच्च न्यायालय ने 16 फरवरी को सिंह और केजरीवाल की ओर से दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें मानहानि मामले में उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने का अनुरोध किया गया था.

दोनों नेताओं ने गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से दायर मामले में निचली अदालत द्वारा जारी समन और समन के खिलाफ उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज करने के सत्र अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी. शिकायतकर्ता के मुताबिक, केजरीवाल और सिंह ने संवाददाता सम्मेलन और सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर मोदी की डिग्री को लेकर विश्वविद्यालय को निशाना बनाते हुए ”अपमानजनक” बयान दिए थे. उसने आरोप लगाया कि गुजरात विश्वविद्यालय के खिलाफ दोनों नेताओं की टिप्पणियां अपमानजनक थीं और इनसे संस्थान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची.

शिकायतकर्ता ने कहा, ”उनके बयान व्यंग्यात्मक थे और जानबूझकर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए दिए गए थे.” उच्च न्यायालय ने 31 मार्च, 2023 को सीआईसी के साल 2016 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को केजरीवाल को मोदी की डिग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने कहा था कि केजरीवाल की आरटीआई याचिका ”सार्वजनिक हित से जुड़े ठोस मुद्दों” पर आधारित होने के बजाय ”राजनीतिक रूप से परेशान करने वाली और राजनीति से प्रेरित थी.”

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