बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन तैनात करने और संसद में केंद्र के बयान की मांग की ममता ने

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 02 Dec 2024 08:17 PM
बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन तैनात करने और संसद में केंद्र के बयान की मांग की ममता ने

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कोलकाता. बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को केंद्र से इस पड़ोसी देश में शांति मिशन तैनात करने के लिए संयुक्त राष्ट्र से संपर्क करने का अनुरोध किया. साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वहां से सताए गए भारतीयों को वापस लाने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की. बनर्जी ने यह भी मांग की कि विदेश मंत्री को बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति पर भारत के रुख से संसद को अवगत कराना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”अगर प्रधानमंत्री मोदी खुद यह काम करने के लिए उपलब्ध नहीं होते हैं, तो विदेश मंत्री का बयान वर्तमान शीतकालीन सत्र के दौरान आना चाहिए.” विधानसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय मुद्दों पर टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि बंगाल देश की संघीय व्यवस्था में केवल एक राज्य है.

उन्होंने कहा, ”हालांकि, हाल के घटनाक्रमों और जिन लोगों के बांग्लादेश में रिश्तेदार और ठिकाने हैं, उनके द्वारा बताए गए अनुभव, हमारी तरफ से आने वाले लोगों की गिरफ्तारी और यहां इस्कॉन के प्रतिनिधियों के साथ मेरी बातचीत के मद्देनजर मुझे इस सदन में यह बयान देने के लिए मजबूर होना पड़ा है.” मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, ऐसे में विदेश मंत्रालय से उनकी अपील है कि वह बांग्लादेश प्रशासन के साथ यह मुद्दा उठाये तथा यदि जरूरी हो तो संयुक्त राष्ट्र के सामने भी यह विषय रखे.

उन्होंने कहा, ”यदि जरूरी हो तो, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ बातचीत कर सामान्य स्थिति की बहाली में मदद के लिए वहां अंतरराष्ट्रीय शांति बल भी भेजा जाए.” उन्होंने कहा कि सताए गए भारतीयों को बचाकर सीमा के इस तरफ लाने एवं उनका पुनर्वास करने की तत्काल जरूरत है. उन्होंने कहा, ”यदि जरूरत पड़ी तो हम उन भारतीयों का पुनर्वास भी कर सकते हैं जिनपर बांग्लादेश में हमला हुआ है. यदि जरूरत पड़ी तो हमें उनके साथ एक रोटी साझा करने में कोई दिक्कत नहीं है. उनके लिए अनाज की कोई कमी नहीं होगी.” बनर्जी ने कहा कि वह चाहती हैं कि बांग्लादेश और अन्य देशों के सभी समुदायों के बीच सद्भाव, भाईचारा और सौहार्दपूर्ण संबंध बना रहे.

बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सीमा के दूसरी ओर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के बावजूद ‘पिछले 10 दिन से चुप रहने’ का आरोप लगाया . उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, ”वे (स्थानीय भाजपा नेता) अपने केंद्रीय नेतृत्व से बांग्लादेश की स्थिति में केंद्र से सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने के लिए क्यों नहीं कहते? इसके बजाय, उनके नेता हमारी सीमाओं पर माल की आवाजाही बंद करने की मांग कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा, ” उन्हें पता होना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय सीमा समझौतों के मुताबिक माल की आवाजाही पर रोक लगाना हमारे हाथों में नहीं है . हम बस केंद्र द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार ही कदम उठा सकते हैं.” इस बीच भाजपा ने सीमा पार सताये जा रहे हिंदुओं की जिंदगी एवं आजीविका को बचाने की मुख्यमंत्री की इच्छा पर सवाल उठाया.

विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने हिंदू संतों के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए पेट्रापोल सीमा की ओर जाते समय कहा, ”उनके पास अपने सांसद हैं जिन्हें संसद में इस मामले को उठाना चाहिए, जो उनकी सही राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतिबिंब होगा. यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि बांग्ला भाषी हिंदुओं के अस्तित्व का संकट है, और मुख्यमंत्री को राजनीति से ऊपर उठकर उनके साथ खड़ा होना चाहिए.” उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सप्ताह जब वह और अन्य प्रदर्शनकारी बांग्लादेश उच्चायोग की ओर कूच कर रहे थे तब बनर्जी ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए अपनी पुलिस से बैरीकेड लगवा दिया.

हालांकि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति सैन्य मिशन की तैनाती की बनर्जी की मांग का समर्थन किया एवं दावा किया कि दो-तीन दिन पहले उन्होंने भी यह मांग की थी. इस बीच भाजपा के बंगाल मामलों के सह प्रभारी अमित मालवीय ने कहा, ” ममता बनर्जी को बांग्लादेश में हिंदुओं की खातिर घड़ियाली आंसू बहाना बंद कर देना चाहिए…..”

वक्फ विधेयक के बहाने केंद्र मुसलमानों को निशाना बना रहा: ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर सोमवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया और संसद में इसके पारित होने पर संदेह जताया. विधेयक के विरोध में एक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधानसभा में ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र ने इस विषय पर राज्य सरकारों की अनदेखी की है. उन्होंने कहा, ”केंद्र ने वक्फ विधेयक पर हमसे परामर्श नहीं किया.” तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में विपक्षी सदस्यों को बोलने नहीं देने को लेकर भी भाजपा की आलोचना की.

मुख्यमंत्री ने दावा किया, ”जेपीसी में, विपक्षी सदस्यों को बोलने नहीं दिया गया. यही कारण है कि उन्होंने इसका बहिष्कार किया.” उन्होंने केंद्र पर मुसलमानों को निशाना बनाते हुए ”विभाजनकारी एजेंडा” को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. ममता ने कहा, ”इस वक्फ (संशोधन) विधेयक के नाम पर एक ही धर्म को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? मुसलमानों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या आप विभिन्न हिंदू मंदिर न्यासों या चर्च की संपत्तियों के साथ भी ऐसा करने का साहस करेंगे? इसका जवाब है नहीं. लेकिन, एक खास समुदाय को निशाना बनाना आपके विभाजनकारी एजेंडे के अनुकूल है.” उन्होंने कहा, ”क्या भाजपा संसद में इस विधेयक को पारित कर पाएगी, जबकि उसके पास दो तिहाई बहुमत नहीं है? बांग्लादेश में हालात पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को पड़ोसी देश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए.

पीडीएस के तहत चावल की आपूर्ति के लिए केंद्र से अब तक नहीं मिला है 14 हजार करोड़ रुपये

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि राज्य को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से चावल की आपूर्ति के लिए केंद्र से अब तक 14,000 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं. मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, ”पीडीएस के माध्यम से चावल देने के लिए हमें केंद्र से सब्सिडी के रूप में 60 प्रतिशत राशि मिलती है, जो अब तक हमारे पास नहीं पहुंची है.” उन्होंने दावा किया, ”फिर भी राज्य अपने खजाने से खर्च वहन कर रहा है, ताकि गरीब वंचित न रहें.” ममता ने कहा कि राज्य की खाद्य साथी योजना में ऐसे लोग भी शामिल हैं जो पात्र हैं लेकिन केंद्र द्वारा निर्धारित मानदंडों पर खरे नहीं उतरते.

खाद्य साथी योजना पश्चिम बंगाल में खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य राज्य की आबादी को रियायती दर पर चावल और गेहूं उपलब्ध कराना है. आलू की कीमत के बारे में उन्होंने कहा, ”हम आलू उत्पादन में दूसरे नंबर पर हैं, लेकिन कुछ लोग यहां उगाये गए आलू को बाहर निर्यात कर रहे हैं, जिससे बाजार में इसकी कमी हो रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.” उन्होंने कहा, ”पहले ज्यादातर आलू निर्यात किया जाता था, लेकिन हमारे कार्यकाल में हमने इस पर रोक लगा दी है. इसी तरह, हमने यह सुनिश्चित किया है कि यहां उगाये जाने वाले प्याज का 75 प्रतिशत हिस्सा राज्य में ही खपत हो.”

By Yogesh Kumar Sahu