अगरतला/जयपुर/कोलकाता. त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में ‘सनातनी युवा’ संगठन के नेतृत्व में हजारों लोग मंगलवार को एकत्र हुए और उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को तत्काल रिहा करने की मांग को लेकर रैली निकाली. प्रदर्शनकारियों ने पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ विरोध जताया.
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ‘बांग्लादेश मार्च’ की अनुमति नहीं दी थी, इसलिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अखौरा एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) की ओर जाने नहीं दिया गया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के ”अत्यधिक दमन” पर चिंता जाहिर की.
उन्होंने कहा, ”बांग्लादेश में पूरी तरह अशांति व्याप्त है और अल्पसंख्यकों को अपने ही देश में अत्यधिक दमन का सामना करना पड़ रहा है. नयी सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक कुल 17,000 संपत्तियों पर हमला किया गया है. बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, उससे पूरी दुनिया चिंतित है. हम अल्पसंख्यकों के लिए आवाज उठाने वाले चिन्मय प्रभु की तत्काल रिहाई की मांग करते हैं.”
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में जयपुर में संतों ने किया प्रदर्शन
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में मंगलवार को यहां संत समाज और लोगों ने प्रदर्शन किया. यहां बड़ी चौपड़ पर इस प्रदर्शन में हवामहल से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य, महामंडलेश्वर मनोहर दास महाराज, आचार्य विष्णु नागा, बसंतानंद महाराज, शनि धाम से रंधावा महाराज, सोमेंद्र महाराज, साध्वी शिखा शिखर सहित बड़ी संख्या में साधु संत शामिल हुए.
बालमुकुंद आचार्य ने संवाददाताओं से कहा ”हम बांग्लादेश में रह रहे सनातनियों के साथ खड़े हैं. आगे जरूरत पड़ी तो हम बांग्लादेश की ओर भी बढ़ जाएंगे.”
भाजपा विधायक ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा,” बांग्लादेश में अत्याचार हो रहा है, लेकिन आज तक मैंने कांग्रेस और कांग्रेस के मित्रों और उनके प्रवक्ता के मुंह से यह नहीं सुना कि बांग्लादेश में जो हो रहा है वह गलत है.” प्रदर्शन में उपस्थित संतों को संबोधित करते हुए एक संत ने कहा,”जिस बांग्लादेश को भारत ने मुक्त करवाया था.. आज वहां के लोग ऐसा अत्याचार, अन्याय कर रहे हैं. इसे भारत का नागरिक ही नहीं बल्कि कोई भी सनातनी बर्दाश्त नहीं करेगा.”
चिन्मय दास का पक्ष रखने के इच्छुक वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे बांग्लादेश: इस्कॉन कोलकाता
अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) कोलकाता ने मंगलवार को बांग्लादेश सरकार से अपील की कि वह हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ चल रहे मुकदमे में उनका प्रतिनिधित्व करने के इच्छुक वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे. इस्कॉन कोलकाता ने यह अपील दास के वकील पर हुए क्रूर हमले के बाद की है.
इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने सोमवार को दावा किया कि चिन्मय कृष्ण दास का बचाव कर रहे रमन रॉय पर बांग्लादेश में उनके घर पर इस्लामी कट्टरपंथियों के एक समूह ने हमला किया. बांग्लादेश की एक अदालत ने मंगलवार को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हिंदू संत की जमानत याचिका पर सुनवाई अगले महीने तक के लिए टाल दी, क्योंकि उनकी ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ. राधारमण दास ने हिंदू संत का पक्ष रखने के वास्ते “किसी वकील के उपस्थित न होने” के लिए बांग्लादेश सरकार की आलोचना की और कहा कि यह बुनियादी मानवाधिकारों के खिलाफ है.
राधारमण दास ने कहा, “यह देखना बहुत निराशाजनक है कि बचाव पक्ष का कोई वकील वहां नहीं था. क्या यही न्याय है? क्या इस तरह से आप स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय प्रदान करते हैं? हम बांग्लादेश सरकार से इस मामले पर गौर करने का आग्रह करेंगे.” राधारमण दास के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए रॉय पर हमले के बाद चिन्मय कृष्ण दास का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई नया वकील आगे नहीं आया है.
उन्होंने कहा, “अभी तक उनका केस लड़ने के लिए कोई नया वकील सामने नहीं आया है. जो लोग चाहते हैं, उन्हें डर है कि कहीं उन्हें भी रॉय जैसा ही अंजाम न भुगतना पड़े. हम बांग्लादेश सरकार से अनुरोध करेंगे कि वह इस मामले को लड़ने के लिए इच्छुक वकीलों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराए.” आज शाम एक पोस्ट में राधारमण दास ने दावा किया कि पहले दिन दास का प्रतिनिधित्व करने वाले एक अन्य वकील रेगन आचार्य पर भी हमला किया गया है.
बांग्लादेशी श्रद्धालु धार्मिक प्रतीकों के सार्वजनिक इस्तेमाल से बचें: इस्कॉन कोलकाता प्रवक्ता
इस्कॉन (अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ) कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताओं के मद्देनजर श्रद्धालुओं से सार्वजनिक स्थानों पर भगवा वस्त्र धारण करने और तिलक लगाने से बचने का आग्रह किया है. इस वर्ष की शुरुआत में बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा के मामले बढ. गए हैं.
इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”बांग्लादेश में स्थिति चिंताजनक है. जो साधु और भक्त हमें फोन कर रहे हैं, हमने उनसे कहा है कि वे इस्कॉन अनुयायी या साधु के रूप में अपनी पहचान सार्वजनिक न करें. हमने उनसे घरों या मंदिरों के अंदर ही अपने धर्म का पालन करने को कहा है. हमने उन्हें सलाह दी है कि वे ऐसे कपड़े पहनें जिनसे अन्य लोगों का ध्यान आर्किषत न हो.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह उपाय अस्थायी है और इसका उद्देश्य केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है. दास ने कहा, ”यह कोई सलाह या सामान्य दिशा-निर्देश नहीं है, बल्कि यह उन साधुओं और भक्तों के लिए मेरा निजी सुझाव है जो पिछले कुछ दिनों से हमें लगातार फोन कर रहे हैं.”