
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान का सम्मान किया है. अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर को राज्य का विशेष दर्जा दिया गया था. हालांकि अब यह निरस्त किया जा चुका है. भाजपा की दिल्ली इकाई ने मुखर्जी की पुण्यतिथि के अवसर पर यहां एस. पी. मुखर्जी पार्क में एक स्मृति सभा का आयोजन किया जिसमें प्रधान और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित पार्टी के कई नेता शामिल हुए और उन्होंने मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की.
प्रधान ने कहा कि भाजपा और जनसंघ कार्यकर्ताओं के लिए मुखर्जी सिर्फ एक नेता और विचारक नहीं थे बल्कि एक विचार थे जो आज भी जीवित है. उन्होंने कहा, ”72 साल पहले उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ”एक देश में दो व्यवस्थाओं” की अवधारणा का विरोध किया था…. जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किया तो यह उनके बलिदान का सम्मान था.” प्रधान ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश में विभिन्न विचारधारा वाले समूह थे जिसमें सांप्रदायिक, कम्युनिस्ट और राष्ट्रवादी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि मुखर्जी अक्सर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों से असहमत होते थे, इसीलिए उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने का विकल्प चुना था.
प्रधान ने कहा, ”इस महत्वपूर्ण क्षण ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से हाथ मिलाने और जनसंघ के रूप में एक वैकल्पिक राजनीतिक विचारधारा स्थापित करने के लिए प्रेरित किया.” उन्होंने याद किया कि एक बार नेहरू ने मुखर्जी से कहा था, ”मैं तुम्हें कुचल दूंगा” जिस पर मुखर्जी ने जवाब दिया था कि ”मैं इस कुचलने वाली मानसिकता को ही कुचल दूंगा.” प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब नक्सलवाद से मुक्त होने के करीब है और अब यह केवल कुछ जिलों तक सीमित है. उन्होंने कहा कि मोदी ने पिछले 10 वर्षों में दृढ़तापूर्वक राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित की है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ”इस शासन की नींव डॉ. मुखर्जी के विचारों पर आधारित है.” प्रधान ने कहा कि मुखर्जी ने शिक्षा, भाषा, लघु उद्योग, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और संविधान पर मौलिक और वैकल्पिक विचार प्रस्तुत किए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने अब भारतीय मूल्यों के आधार पर एक नयी पहचान बनाई है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि शासन अब उपभोग के लिए नहीं है, बल्कि भारतीय मूल्यों पर आधारित है और सेवा का माध्यम है. रेखा गुप्ता ने कहा कि मुखर्जी ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए लड़ाई शुरू की थी.
उन्होंने कहा, ”भारत 1947 में स्वतंत्र हो गया था, लेकिन एकता की लड़ाई जारी रही और डॉ. मुखर्जी ने इसका नेतृत्व किया. उन्होंने घोषणा कर दी थी कि ‘एक देश में दो संविधान’ अस्वीकार्य हैं और उन्होंने जोर देकर कहा था कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का है.” मुख्यमंत्री ने कहा, ”दुर्भाग्यवश, पिछली सरकारों ने देश का केवल विभाजन किया, जिससे पाकिस्तान और बाद में बांग्लादेश का जन्म हुआ.” उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुखर्जी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार परिस्थितियां अभी भी संदिग्ध बनी हुई हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाकर उनके बलिदान का सही मायने में सम्मान किया है.
नड्डा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दी श्रद्धांजलि, अनुच्छेद-370 के खिलाफ उनकी लड़ाई को याद किया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी 72वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि यह देश अब एक संविधान के तहत एकजुट है और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है.
नड्डा ने यहां स्थित भाजपा मुख्यालय में मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ के नेता की 1953 में श्रीनगर की एक जेल में तब ”रहस्यमय परिस्थितियों” में मृत्यु हो गई थी, जब उन्हें विशेष परमिट के बिना जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने का प्रयास करने पर गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने कहा कि उस समय राज्य के विशेष दर्जे के कारण परमिट आवश्यक था जिसका मुखर्जी ने कड़ा विरोध किया था. नड्डा ने कहा कि मुखर्जी ने ‘दो विधान, दो प्रधान, दो निशान’ के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था, जिसका संदर्भ जम्मू-कश्मीर के अलग संविधान, प्रधानमंत्री और झंडे से था.
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मुखर्जी ने भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ‘तुष्टीकरण की नीति’ के कारण उनके पहले मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. मुखर्जी ने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की. जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री (वजीर ए आजम) का पद 1965 में समाप्त किया गया, लेकिन राज्य का अलग संविधान और झंडा जारी रहा, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके समाप्त कर दिया. इसके बाद जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के रूप में पुनर्गठित किया गया.
नड्डा ने कहा कि देशभर में भाजपा के सदस्य मुखर्जी को याद कर रहे हैं जो एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे. उन्होंने कहा कि मुखर्जी अविभाजित बंगाल की विधानसभा के सदस्य निर्वाचित होने से पहले 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति थे. भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल, पंजाब और असम को भारत का हिस्सा बनाने में उनका बड़ा योगदान है.
उन्होंने कहा कि भाजपा का संकल्प है कि रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु जैसी घटना दोबारा न हो और देश में लोकतंत्र मजबूत बना रहे.
नड्डा ने आरोप लगाया कि मुखर्जी की मां ने नेहरू (तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू) को पत्र लिखकर उनकी मौत की जांच कराने की मांग की थी, लेकिन उनकी अर्जी पर गौर नहीं किया गया. तत्कालीन सरकार ने तब कहा था कि 51 वर्षीय मुखर्जी की मौत हृदय संबंधी बीमारी के कारण हुई है.
नड्डा ने कहा,”हम सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं कि मुखर्जी की मृत्यु जैसी दुखद और रहस्यमय घटनाएं फिर कभी न हों. प्रधानमंत्री मोदी के मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व में भाजपा और राष्ट्र दोनों निरंतर मजबूत हों ताकि लोकतंत्र की आवाज जीवंत और अडिग बनी रहे.”


