पहलगाम हमला : मारे गये आतंकवादियों की संलिप्तता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित की गयी – शाह

नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की जान लेने वाले तीन आतंकवादी ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं और इस हमले में उनकी संलिप्तता वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कर ली गयी है.

शाह ने राज्यसभा में ”पहलगाम में आतंकवादी हमले के जवाब में भारत के मजबूत, सफल एवं निर्णायक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष चर्चा” में हस्तक्षेप करते हुए यह बात कही. इसी के साथ शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपने वोट बैंक और तुष्टीकरण की नीति के कारण पाकिस्तान एवं आतंकवादियों को बचाने का प्रयास कर रही है.

शाह ने कहा, ”मैं सदन के माध्यम से, कल हुए ‘ऑपेरशन महादेव’ की जानकारी पूरे देश को देना चाहता हूं. कल ‘ऑपेरशन महादेव’ में सुलेमान, अफगान और जिब्रान नाम के तीन आतंकवादी – सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त अभियान में मारे गए.” उन्होंने बताया, ”सुलेमान, लश्कर-ए-तैयबा का ए श्रेणी का कमांडर था. पहलगाम और गगनगीर आतंकी हमले में वह लिप्त था, इसके बहुत सारे सबूत हमारी एजेंसियों के पास हैं. अफगान और जिब्रान भी ए श्रेणी के आतंकवादी थे.” गृह मंत्री ने कहा, ”जिन्होंने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमारे निर्दोष नागरिकों को मारा था, उनमें ये तीनों आतंकवादी शामिल थे और कल तीनों मारे गए. मैं सेना के पैरा 4, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के सभी जवानों को सदन और पूरे देश की ओर से बहुत-बहुत साधुवाद देता हूं.” गृह मंत्री के अनुसार, बीते 22 अप्रैल को दिन में एक बजे पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला हुआ था और वह शाम 5.30 बजे श्रीनगर पहुंच गए थे तथा 23 अप्रैल को एक सुरक्षा बैठक की गई और इसकी पुख्ता व्यवस्था की गई कि नृशंस हत्या करने वाले हत्यारे देश छोड़कर भागने न पाएं.

उन्होंने बताया कि पूरी छानबीन एवं वैज्ञानिक तरीकों से यह पुष्टि की गई कि इन तीनों आतंकवादियों ने ही 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में 26 निर्दोष लोगों की जान ली थी. उन्होंने कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम के दो दिन पहले के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने उनके इस्तीफे की मांग की और प्रश्न किया कि सरकार के पास क्या सबूत हैं कि पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी थे.

गृह मंत्री ने कहा कि वह इस सदन के माध्यम से चिदंबरम से पूछना चाहते हैं कि वह किसे बचाना चाहते थे, पाकिस्तान को, लश्कर-ए-तैयबा को या आतंकवादियों को. उन्होंने कहा, ”देखिए महादेव क्या करता है? जिस दिन यह प्रश्न पूछा, उसी दिन तीनों आतंकवादी ढेर हो गये.” उन्होंने कहा कि चिदंबरम ने कांग्रेस की मानसिकता को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने वोट बैंक को बचाने के लिए पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा का बचाव करने से भी नहीं डरती है.

शाह ने कांग्रेस के एक अन्य नेता पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान का उल्लेख किया कि नरेन्द्र मोदी सरकार को ऑपरेशन का धार्मिक नाम रखने के अलावा कुछ नहीं आता. गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को यह नहीं मालूम है कि शिवाजी महाराज ने मुगलों के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी थी, उनकी सेना का युद्धघोष ”हर हर महादेव” ही था. उन्होंने कहा कि हमारी सेनाओं की विभिन्न डिवीजनों के युद्ध घोष देवी देवताओं के नाम पर हैं, जिसे भाजपा ने नहीं रखा.

उन्होंने कहा कि विपक्ष पूछ रहा है कि आतंकवादी आज ही क्यों मारे गये? शाह ने प्रति प्रश्न किया ‘आप आतंकवादियों को कितना जिंदा रखना चाहते हैं?’ शाह जब अपना जवाब शुरू करने जा रहे थे, तभी कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने यह कहते हुए सदन से वाक आउट किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चर्चा का जवाब नहीं देना सदन का अपमान है. इस पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सदन की कार्य मंत्रणा समिति में पहले ही सूचित कर दिया गया था कि चर्चा का जवाब प्रधानमंत्री नहीं गृह मंत्री देंगे.

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