पटना में पेपर लीक के विरोध में उग्र प्रदर्शन, छात्रों ने किया पथराव; पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

पटना में पेपर लीक, शिक्षा में भ्रष्टाचार और निजीकरण के विरोध में बुधवार को वाम दल के छात्र संगठन आइसा के बैनर तले हजारों छात्र-युवा और कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान गेट नंबर-10 से राजभवन मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की मांग की। साथ ही पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई, शिक्षा में भ्रष्टाचार और निजीकरण पर रोक, जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के समर्थन, 7.5 CGPA की अनिवार्यता समाप्त करने, फीस वृद्धि वापस लेने, नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने तथा पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बरकरार रखने की मांग उठाई।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन से पानी की बौछार कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कोशिश की। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई जारी है।

आइसा की ओर से बताया गया कि हमलोग आज इन मुद्दों पर मार्च कर रहे हैं। हमलोगों की मांगे है कि
धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफ़ा दो! सभी पेपर लीक की फास्ट ट्रैक जांच सुनिश्चित करो
मिथलेश तिवारी इस्तीफा दो! बिहार के छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज बंद करो
7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त करो, सबको एक समान डिग्री दो
यूजी, पीजी और पीएचडी तक फीस वृद्धि वापस लो
बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी शोधार्थियों को नॉन-नेट फेलोशिप सुनिश्चित करो
शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाओ
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ
सरकार द्वारा बिहार की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त किए जाने के खिलाफ
महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त कर उन्हें सरकार के अधीनस्थ बनाने की कोशिशों का विरोध
पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1974 को समाप्त कर विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक स्वायत्तता खत्म करने की साज़िश का विरोध

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