
मुंबई: भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप ंिसह को बखूबी पता है कि टेस्ट खेलने के सपने को पूरा करने की राह में प्रथम श्रेणी क्रिकेट अधिक नहीं खेलने को आदर्श तैयारी नहीं माना जा सकता लेकिन उनका कहना है कि यह पारंपरिक प्रारूप के लिये उनकी तैयारी में कमी को नहीं दर्शाता है। सीमित ओवरों के प्रारूप में भारत के शीर्ष गेंदबाजों में से एक अर्शदीप ने दिसंबर 2019 में पदार्पण के बाद से सिर्फ 24 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं ।
दलीप ट्रॉफी के दो मैच खेलने से पहले उन्होंने एक साल तक कोई प्रथम श्रेणी मैच नहीं खेला था । अर्शदीप ने पीटीआई को दिये इंटरव्यू में कहा ,” मैं टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिये अपनी ओर से हरसंभव प्रयास कर रहा हूं ।” दलीप ट्रॉफी के बाद शेर ए पंजाब टीम लुधियाना लायंस से जुड़े अर्शदीप ने कहा ,” प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लंबा अंतराल तैयारी के लिये आदर्श नहीं है लेकिन मैं उन्हीं चीजों पर फोकस कर सकता हूं जिससे मौका मिलने पर तैयार रह सकूं ।
टेस्ट क्रिकेट खेलना सम्मान की बात है और मुझे इसका इंतजार है । मुझे अपनी क्षमता पर यकीन है कि मैं भारत के लिये योगदान दे सकता हूं ।” उन्होंने कहा ,”एक तेज़ गेंदबाज के तौर पर प्रथम श्रेणी मैच खेलना शरीर के लिए अक्सर मुश्किल होता है, क्योंकि ये मैच कभी-कभी बहुत ज्यादा मेहनत वाले हो सकते हैं। लेकिन एक तेज़ गेंदबाज होने के नाते मुझे इस कार्यभार को संभालने और हर बार गेंदबाजी करते समय अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर बहुत गर्व होता है।”
बेंगलुरु के उत्कृष्टता केंद्र में स्पिनरों की मददगार पिचों पर खेलना एक और चुनौती थी, लेकिन अर्शदीप का कहना था कि एक तेज गेंदबाज़ के तौर पर इस चुनौती से पार पाना बहुत जरूरी था। उन्होंने कहा ,” स्पिनरों की मददगार पिचों पर खेलने से अपने कौशल को निखारने का मौका मिला ताकि हर तरह के हालात में गेंदबाजी कर सकूं।”



