भाग्यशाली हूं कि मेरा शौक मेरा पेशा बन गया: पवन मल्होत्रा

मुंबई. अभिनेता पवन मल्होत्रा का कहना है कि उन्होंने कड़ी मेहनत और सिनेमा के प्रति जुनून के दम पर फिल्म उद्योग में सफलता हासिल की. अभिनेता को “ब्लैक फ्राइडे”, “जब वी मेट” और “भाग मिल्खा भाग” जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के लिए जाना जाता है.
मल्होत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मैं भाग्यशाली हूं कि जो शौक था वही पेशा बन गया. वर्ष 1982 में मैं मुंबई आया और 40 से अधिक वर्षों से यहां हूं. थिएटर शुरू किया तो अंदाजा नहीं था कि फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाऊंगा.” मल्होत्रा ने करियर की शुरुआत रिचर्ड एटनबरो की ”गांधी” में कॉस्ट्यूम विभाग में सहायक के रूप में की और बाद में ”जाने भी दो यारो” तथा ”खामोश” जैसी फिल्मों में प्रोडक्शन सहायक रहे.

अभिनय की शुरुआत 1984 की ”अब आएगा मजा” से हुई, जबकि सईद अख्तर मिर्जा की ”सलीम लंगड़े पे मत रो” ने उन्हें पहचान दिलाई. उन्होंने ”फकीर” (1998) और ”फौजा” (2023) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया. उन्होंने कहा, “मैंने तय कर लिया था कि चाहे हालात अच्छे हों, बुरे हों, मैं यहीं रहूंगा. अगर मुझे बतौर अभिनेता काम नहीं मिलता, तो मैं प्रोडक्शन में लग जाऊंगा, असिस्टेंट बन जाऊंगा या कोई छोटा-मोटा काम कर लूंगा. जब आप शहर आते हैं, तो कभी-कभी आपके पास खाने के लिए पैसे नहीं होते लेकिन आप ये सब भूल जाते हैं, क्योंकि ये सब जिंदगी का एक हिस्सा है.”

उन्होंने कहा, “मैं ईश्वर का शुक्रगुज.ार हूं, लेकिन साथ ही हैरान भी हूं कि ‘ये मेरे साथ हुआ’. जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेंगे और मैं ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनूंगा जिनमें मैं मुख्य भूमिका में हूं, या कोई अंग्रेज.ी फ.ल्मि करूंगा. भाग्य बहुत बड़ी भूमिका निभाता है, लेकिन आपको मेहनत तो करनी ही होगी ताकि आपको परिणाम मिल सकें.” मल्होत्रा की हालिया परियोजना सोनी लिव की वेब सीरीज ”कोर्ट कचहरी” है. उन्होंने बताया कि ‘कोर्ट कचहरी’ में काम करने का एक कारण प्रोडक्शन हाउस टीवीएफ के साथ काम करना था, जो ‘पंचायत’ और ‘गुल्लक’ जैसी उल्लेखनीय सीरीज बनाने के लिए जाना जाता है.

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