कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए बलात्कार के आरोपी को नहीं दी जमानत

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 29 Sep 2025 10:00 PM
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए बलात्कार के आरोपी को नहीं दी जमानत
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बेंगलुरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने महिलाओं के प्रति सम्मान से संबंधित मनुस्मृति के एक श्लोक और महात्मा गांधी के एक कथन का हवाला देते हुए बलात्कार के मामले में आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया. यह मामला बिहार के बांका की एक लड़की (19) से संबंधित है, जो अनुसूचित जनजाति से आती है. उसके माता-पिता केरल के एक इलायची बागान में कार्यरत हैं. यह महिला एक अप्रैल को देर रात लगभग डे­ढ़ बजे केरल से बेंगलुरु के केआर पुरम रेलवे स्टेशन पहुंची थी.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वह अपने भाई के साथ महादेवनगर की ओर भोजन के लिए जा रही थी तभी स्टेशन के पास कथित तौर पर दो लोगों ने उन्हें घेर लिया. अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने लड़की के भाई को वहीं रोके रखा जबकि उसका साथी लड़की को घसीटकर पास ही एक जगह पर ले गया और उसके साथ बलात्कार किया. महिला के चीखने पर स्थानीय लोगों ने हस्तक्षेप किया और कथित बलात्कारी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया.

न्यायमूर्ति एस रचैया ने चार सितंबर को जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए घटना की गंभीरता और पीड़िता द्वारा झेले गए सदमे को रेखांकित करते हुए कहा, “आरोपी द्वारा दूसरे व्यक्ति के साथ मिलकर किया गया यह कृत्य पीड़िता के जीवन में एक कलंक बनकर रहेगा. उसके लिए इस पीड़ा से उबरना बहुत मुश्किल होगा.” सुनवाई के दौरान पीठ ने मनुस्मृति के एक श्लोक का हवाला दिया, “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता, यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्रफला: क्रिया:” जिसका अर्थ है कि जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है लेकिन जहां उनका अनादर होता है, वहां सभी कार्य निष्फल हो जाते हैं. न्यायमूर्ति रचैया ने गांधी के शब्दों को भी याद किया, “जिस दिन कोई महिला रात में सड़क पर स्वतंत्र रूप से चल सकेगी, उस दिन हम कह सकते हैं कि भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली है.”

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