शुभेंदु ने भाजपा की रैली की अगुवाई की, बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने की मांग की

शुभेंदु ने जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए सीईओ से शिकायत दर्ज कराई

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को यहां बाहरी इलाके में भाजपा की एक रैली का नेतृत्व किया और मांग की कि हर बांग्लादेशी घुसपैठिए को देश से बाहर निकाला जाए. उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया भी पूरी तरह संपन्न कराने की मांग की.

‘परिवर्तन यात्रा’ नामक इस रैली ने पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र में सोदपुर ट्रैफिक मोड़ से बीटी रोड के साथ अगरपाड़ा तेंतुलतला मोड़ तक दो किलोमीटर की दूरी तय की. इस दौरान हाथों में तख्तियां लिये हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सत्तारूढ. तृणमूल कांग्रेस की निंदा करते हुए नारे लगाये.

अधिकारी ने कहा कि पिछले सप्ताह अगरपाड़ा के एक व्यक्ति की हुई दुखद मौत का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) या राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) को लेकर डर से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि उसने तो 2002 में मतदान किया था और उसका नाम उस वर्ष की मतदाता सूची में था. विपक्ष के नेता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए उसकी मौत को ‘एसआईआर’ कवायद से गलत तरीके से जोड़ रही है.

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करने की तृणमूल कांग्रेस को चुनौती देते हुए अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, ”जिनके माता-पिता के पास भारत में आवासीय, जन्म प्रमाण पत्र हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. तृणमूल कांग्रेस लोगों को गुमराह कर रही है.” उन्होंने कहा , ” यदि एसआईआर के बारे में गलत तरीके से फैलाई गई दहशत के कारण कोई और मौत होती है, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ऐसी हर मौत के लिए जिम्मेदार होंगी. हम उन पर लोगों को गुमराह करने और उनकी मौत का कारण बनने का आरोप लगाएंगे.”

उन्होंने कहा, ”यदि किसी इलाके में पुनरीक्षण के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) पर हमला किया जाता है, तो हम सरकार और पार्टी को नहीं बख्शेंगे.” पिछले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को पराजित कर निर्वाचित हुए शुभेंदु ने ‘एसआईआर’ के प्रति तृणमूल के विरोध को ‘असंवैधानिक’ करार दिया. उन्होंने कहा कि तृणमूल को डर है कि एसआईआर में अवैध मतदाताओं का पता चलने के बाद मतदाता सूची से उनके नाम हटाये जाने तथा ऐसे अवैध मतदाताओं को हिरासत में लेकर देश से बाहर भेजे जाने के बाद उसका बहुत बड़ा मतदाता वर्ग हाथ से निकल जायेगा.’ उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस निर्वाचन आयोग और उसके अधिकारियों जैसे संवैधानिक निकायों को गालियां दे रही है. उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के प्रति तृणमूल के विरोध को ‘राष्ट्र-विरोध’ करार दिया.

उन्होंने ‘बांग्लादेशी/रोहिंग्या अवैध प्रवासियों’ की तुलना सांपों से करते हुए कहा कि एसआईआर बिलों से ‘सांपों’ को बाहर निकालेगा और अंतत? उन्हें वापस भेजेगा. अधिकारी ने 21 जुलाई को तृणमूल की शहीद दिवस रैली में बनर्जी के इस बयान का मजाक उड़ाया कि वह पश्चिम बंगाल में एसआईआर नहीं होने देंगी.

विपक्ष के नेता ने कहा, ”एसआईआर शुरू हो गया है. आप इसे रोक नहीं पायीं. न ही आप एक भी फर्जी घुसपैठिए मतदाता की पहचान होने और उसे निर्वासित होने से बचा पायेंगी.” उन्होंने बंगाल में ‘परिवर्तन’ का आह्वान करते हुए कहा, ”एसआईआर कम से कम आठ बार किया जा चुका है और यह देश हित एवं इसकी अखंडता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवश्यक था. तृणमूल अचानक इस मुद्दे पर क्यों जाग गई है और इस प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही है? लोगों ने उसके खेल को समझ लिया है.” उन्होंने आरोप लगाया कि पक्षपातपूर्ण पुलिस और प्रशासन ने रैली को रोकने की कोशिश की, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया.

उन्होंने कहा, ”पिछले मौकों की तरह, उन्होंने हमारी आवाज दबाने की कोशिश की, लेकिन न्यायपालिका ने फिर से सुनिश्चित किया कि हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन न हो.” भाजपा नेता अर्जुन सिंह ने कहा कि इस रैली से जनता में ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पद से हटाने का संदेश जायेगा.

शुभेंदु ने जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने में विसंगतियों का आरोप लगाते हुए सीईओ से शिकायत दर्ज कराई

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान जन्म प्रमाण-पत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर विसंगतियों का आरोप लगाया.

अधिकारी ने भारतीय जनता पार्टी के दो अन्य नेताओं के साथ सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल से मुलाकात की और एक लिखित शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने कहा, ”चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने के लिए तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी एजेंसियां ??फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र तैयार कर रही हैं.” उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के उस आदेश के बाद जिलों और नगरपालिका क्षेत्रों में देर से जन्म पंजीकरण कराने की घटना में ब­ढ़ोतरी देखी गयी है, जिसमें जन्म प्रमाण-पत्र को नागरिकता सत्यापन के लिए वैध दस्तावेजों के रूप में सूचीबद्ध किया गया था.

अधिकारी ने आरोप लगाया, ”नागरिकता के संदिग्ध दावों को मान्य करने के गुप्त उद्देश्य से देरी से जन्म पंजीकरण कराने संबंधी आवेदनों में तीव्र वृद्धि हुई है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारू­ढ़ दल के कार्यकर्ता और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं और उसे सुगम बना रहे हैं. भाजपा नेता ने स्थानीय स्वशासी निकायों के एक वर्ग पर ”प्रशासन के इशारे पर” गड़बड़ी करने का आरोप लगाया और आयोग से निष्पक्ष एवं पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की. अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि अक्सर ”खोए हुए दस्तावेजों” की आड़ में, पूर्वव्यापी प्रभाव से फर्जी प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि कई मामलों में, लोगों ने स्थानीय पुलिस थानों में सामान्य डायरी प्रविष्टियां दर्ज कराईं, जिसमें दावा किया गया कि उनके जन्म प्रमाण-पत्र गुम हो गए हैं और बाद में “छेड़छाड़ किए गए रिकॉर्ड” के आधार पर नये प्रमाण-पत्र प्राप्त किए. अधिकारी ने दावा किया कि आधिकारिक रिकॉर्ड में मृत मतदाताओं को जीवित दिखाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सत्यापन के दौरान किसी भी तरह की जालसाजी का पता चला, तो उनकी पार्टी सख्त कार्रवाई की मांग करेगी.

वरिष्ठ भाजपा नेता ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की सूची उनके पदनामों के साथ 24 घंटे के भीतर सीईओ की वेबसाइट पर प्रकाशित करने और आधार से जुड़े दस्तावेज़ों के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करने की भी मांग की. उन्होंने कहा, ”हमने मांग की है कि सीईओ बीएलओ की सूची उनके पदनामों के साथ प्रकाशित करें. ऐसे मामले हैं, जहां एक मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइए को बीएलओ के रूप में नामित किया गया है. ऐसी रिपोर्ट दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और कूच बिहार जिलों से प्राप्त हुई हैं.”

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