मुख्यमंत्री शर्मा छह समुदायों और मौजूदा अनुसूचित जनजातियों के बीच ‘संघर्ष भड़का रहे’ : गौरव गोगोई

गुवाहाटी. कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रविवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांग रहे छह समुदायों और राज्य के मौजूदा एसटी समूहों के बीच संघर्ष भड़का रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) की मांग पर शनिवार को राज्य विधानसभा में सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट यह विश्वास दिलाने में असमर्थ है कि मौजूदा अनुसूचित जनजाति समुदायों के अधिकार बरकरार रहेंगे.

राज्य के एक मंत्रिसमूह (जीओएम) ने छह समुदायों – ताई अहोम, चुटिया, मोरन, मटक, कोच-राजबोंगशी और चाय जनजाति (आदिवासी) को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर शनिवार को राज्य विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की. अगर इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी)का दर्जा दिया जाता है, तो वे शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण के दायरे में आ जाएंगे.
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गोगोई ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’पर एक पोस्ट में कहा, ”कांग्रेस ने इस दावे का समर्थन किया है कि राज्य के छह मूल समुदायों को मौजूदा एसटी समूहों के अधिकारों और विशेषाधिकारों को प्रभावित किए बिना एसटी घोषित किया जाना चाहिए”.

गोगोई ने कहा कि इस संबंध में विधानसभा में एक प्रस्ताव पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान पारित किया गया था. उन्होंने अपने पिता और असम के तीन बार मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई के प्रशासन के दौरान पारित प्रस्ताव का जिक्र किया. कांग्रेस नेता ने विधानसभा में रखी गई मंत्री समूह की रिपोर्ट पर कहा, ”मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा श्रेणीवार एसटी का दर्जा देने के लिए रिपोर्ट पेश करते समय यह विश्वास दिलाने में असमर्थ रहे हैं कि मौजूदा एसटी समुदायों के अधिकार बरकरार हैं.”

उन्होंने दावा किया, ”एक मूल निवासी समुदाय के रूप में, हम अपने आदिवासी भाइयों और बहनों के लिए सर्वश्रेष्ठ चाहते हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा असम के छह मूल निवासी समुदायों और अनुसूचित जनजातियों के बीच एक और संघर्ष को ब­ढ़ावा दे रहे हैं.” गोगोई ने आरोप लगाया कि यह औपनिवेशिक काल के दौरान अंग्रेजों द्वारा अपनाई गई ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति है. उन्होंने कहा, ” असम के लोग इस राजनीति से तंग आ चुके हैं और ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं करेंगे. हम एक मजबूत और एकजुट ‘ बॉड़ अहोम’ (वृहत्तर असम) के रूप में सद्भाव से रहना चाहते हैं.”

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