प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर को अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के नए परिसर को अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि सेंट्रल विस्टा पुर्निवकास परियोजना के तहत बन रहे परिसर का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है. इसे पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के रूप में जाना जाता था.

प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा, निर्माणाधीन परिसर में मंत्रिमंडल सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और ‘इंडिया हाउस’ के कार्यालय भी शामिल होंगे, जो आने वाले गणमान्य व्यक्तियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता का स्थल होगा. अधिकारियों ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ एक ऐसा कार्यस्थल होगा, जिसे सेवा की भावना को प्रतिबिंबित करने के लिए डिजाइन किया गया है और जहां राष्ट्रीय प्राथमिकताएं मूर्त रूप लेंगी. उन्होंने कहा कि भारत के सार्वजनिक संस्थान एक शांत लेकिन गहन बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं.

अधिकारियों के मुताबिक शासन का विचार ‘सत्ता’ से ‘सेवा’ और अधिकार से उत्तरदायित्व की ओर ब­ढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक भी है. राज्यों के राज्यपालों के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का भी नाम भी बदलकर ‘लोक भवन’ रखा जा रहा है.

अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शासन के क्षेत्रों को ‘कर्तव्य’ और पारर्दिशता को प्रतिबिंबित करने के लिए नया रूप दिया गया है. उन्होंने कहा, ”हर नाम, हर इमारत और हर प्रतीक अब एक सरल विचार की ओर इशारा करते हैं- सरकार सेवा के लिए है.” सरकार ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक वृक्षों से घिरे मार्ग के पूर्ववर्ती नाम ‘राजपथ’ को बदलकर ‘कर्त्तव्य पथ’ किया था.

प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का नाम 2016 में बदलकर लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था. अधिकारियों के मुताबिक यह नाम कल्याण का बोध कराता है, न कि विशिष्टता का, तथा यह प्रत्येक निर्वाचित सरकार के भविष्य के कार्यों की याद दिलाता है.
केन्द्रीय सचिवालय का नाम कर्तव्य भवन है, जो एक विशाल प्रशासनिक केंद्र है, जिसका निर्माण इस विचार के ईद-गिर्द किया गया है कि सार्वजनिक सेवा एक प्रतिबद्धता है.

अधिकारियों ने कहा, ”ये बदलाव एक गहरे वैचारिक परिवर्तन का प्रतीक हैं. भारतीय लोकतंत्र सत्ता की बजाय जिम्मेदारी और पद की बजाय सेवा को चुन रहा है.” उन्होंने कहा, ”नामों में बदलाव मानसिकता में भी बदलाव है. आज, वे सेवा, कर्तव्य और नागरिक-प्रथम शासन की भाषा बोलते हैं.”

पीएमओ का नाम ‘सेवा तीर्थ’ करना श्रेष्ठ भारत के निर्माण की स्वर्णिम यात्रा में अहम पड़ाव: शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ करने को विकसित तथा हर क्षेत्र में श्रेष्ठ भारत के निर्माण की ्स्विवणम यात्रा में एक अहम पड़ाव बताया. शाह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ”पिछले 11 वर्षों से मोदी सरकार सत्ता नहीं, सेवा की पर्याय रही है, जिसमें सत्ता का सर्वोच्च नेता स्वयं को प्रधानसेवक मानकर जनता के लिए सातों दिन, 24 घंटे कार्य कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा, ”इसी दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सेवा के संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया है. साथ ही, राजभवन और राज निवास का नाम बदलकर लोकभवन और लोक निवास किया जा रहा है.” शाह ने कहा, ” यह, सेवा और सुशासन को सर्वोपरि रखते हुए विकसित तथा हर क्षेत्र में श्रेष्ठ भारत के निर्माण की ्स्विवणम यात्रा में एक अहम पड़ाव है.” अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के नये परिसर को अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा.

अधिकारियों ने बताया कि सेंट्रल विस्टा पुर्निवकास परियोजना के तहत बन रहे परिसर का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है. इसे पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के रूप में जाना जाता था. प्रधानमंत्री कार्यालय के अलावा, निर्माणाधीन परिसर में मंत्रिमंडल सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और ‘इंडिया हाउस’ भी शामिल होंगे.

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