भारत की चुनाव प्रणाली दुनिया में सर्वश्रेष्ठ, सुधार की कोई गुंजाइश नहीं: राजीव रंजन सिंह

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख सहयोगी दलों तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) ने मंगलवार को कांग्रेस पर निर्वाचन आयोग की उपलब्धियों को स्वीकारने और उसमें सुधार के लिए सुझाव देने के बजाय आयोग और उसकी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद पर निशाना साधने का आरोप लगाया.

केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में जद(यू) के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने चुनाव सुधारों पर सदन में विशेष चर्चा में भाग लेते हुए भारत की चुनाव प्रणाली को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ चुनाव प्रणाली बताया और कहा कि इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘इस चर्चा में हम उम्मीद कर रहे थे कि विपक्ष की तरफ से वर्तमान चुनाव प्रणाली में सुधार के कुछ सुझाव आएंगे, लेकिन कांग्रेस के सांसद (मनीष तिवारी) ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता होते हुए भी जो सवाल यहां उठाए, उनका इस सदन से कोई लेना-देना नहीं. निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के कार्यकलाप पर यहां चर्चा नहीं हो सकती.’’ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती और विपक्ष में बैठे लोग सरकार में रहते हुए ऐसा करते थे.

चुनाव सुधारों पर चर्चा में अधिकतर विपक्षी सदस्यों द्वारा एसआईआर पर निशाना साधे जाने का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘‘हमें इस पर यहां चर्चा करने का कोई हक नहीं है. यह मोदी सरकार का नहीं, निर्वाचन आयोग का फैसला है.’’ उन्होंने कहा कि इस देश के नागरिकों को मताधिकार होना चाहिए और यदि आयोग लोगों की नागरिकता सत्यापित कर रहा है जो उसका दायित्व है तो कांग्रेस और विपक्षी दलों को इसमें क्या आपत्ति है.

इलेक्ट्रॉनिक वोंिटग मशीन (ईवीएम) की जगह मतपत्रों से चुनाव कराने के विपक्षी सांसदों के तर्क पर जदयू सांसद ने कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस नीत संप्रग की सरकार दस साल रही और वे इसी ईवीएम प्रणाली से जीतकर आए थे. उन्होंने कहा, ‘‘दस साल तक सरकार में रहे तो ईवीएम ठीक थी और अब लगातार प्रयास के बाद भी जनता स्वीकार नहीं कर रही तो ईवीएम गलत है. आप बूथ कैप्चंिरग चाहते हैं और मतपत्र बूथ लूटने का ही हथकंडा था, जबकि उसे हटाना निष्पक्ष चुनाव की दिशा में उचित निर्णय था.’’ सिंह ने तेलंगाना, कर्नाटक समेत विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी दल चुनाव जीत जाता है तो ईवीएम सही है और जैसे ही महाराष्ट्र, हरियाणा तथा बिहार में वे चुनाव हारते हैं तो ईवीएम खराब हो जाती है.

उन्होंने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘इनका यह दोहरा चरित्र देश के लोग जानते हैं. उस पर देश के लोग कभी भरोसा नहीं करते. विपक्ष के सभी नेताओं का विचार चुनाव सुधार के बजाय वर्तमान चुनाव प्रणाली को तहस-नहस करने पर जोर देने का है.’’ सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ दिन पहले तक वह संविधान की प्रति साथ लेकर चलते थे, लेकिन आजकल संविधान उनके हाथ में नहीं है क्योंकि संविधान के खिलाफ विरुद्ध बोल रहे हैं.

तेदेपा सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने भी विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि देश ने 75 साल में चुनाव प्रणाली को लेकर अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन विपक्ष के सदस्य उस पर बिल्कुल बात नहीं कर रहे. उन्होंने कहा कि पिछले 75 साल में देश में मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है और महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है. उन्होंने कहा कि इस पहलू की भी सराहना होनी चाहिए. देवरायलु ने ‘वोट चोरी’ और ईवीएम हैंिकग के विपक्ष के आरोपों पर कहा कि जब तेलंगाना में कांग्रेस जीत गई तो किसी ने ‘वोट चोरी’ की बात नहीं की, कर्नाटक में विपक्षी पार्टी जीत गई तो किसी ने ईवीएम और मतपत्रों की बात नहीं की.

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हरियाणा में करीबी अंतर से हार होते ही ईवीएम पर सवाल उठा दिए.’’ तेदेपा सदस्य ने बिहार विधानसभा चुनाव के बाद तमिलनाडु से प्रकाशित एक अंग्रेजी दैनिक के आलेख का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया तथा इस बात का अध्ययन किया गया कि जिन क्षेत्रों में एसआईआर के बाद अधिक मतदाताओं के नाम कटे और जहां कम नाम कटे, वहां मतदान पर क्या असर हुआ.

उन्होंने कहा, ‘‘रिपोर्ट कहती है कि जहां मतदाता सूचियों से अधिक नाम कटे वहां राजग या उनके किसी दल को फायदा नहीं मिला. इसमें एसआईआर से किसी एक दल को फायदे या किसी दूसरे को नुकसान का पैटर्न सामने नहीं आया.’’ तेदेपा सांसद ने द्रमुक जैसे विपक्षी दलों से कहा कि ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि वह कांग्रेस के जाल में नहीं फंसेंगे.’’ उन्होंने अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश में भी एसआईआर लागू करने की मांग की.

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