‘सुधार’ के नाम पर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को खत्म किया गया: सांसद रंजीत रंजन

मनरेगा समेत अल्पसंख्यकों और गरीबों की योजनाएं बंद करना चाहती है मोदी सरकार: कांग्रेस

जयपुर/पटना/भोपाल. कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने “सुधार” के नाम पर लोकसभा में एक और विधेयक पारित कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ को खत्म कर दिया. उन्होंने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर ग्रामीण गरीबों से काम का अधिकार छीनने का आरोप लगाया. रंजन ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ये बदलाव ‘मनरेगा की हत्या’ के बराबर हैं और यह दुनिया के सबसे बड़े रोजगार गारंटी कार्यक्रम को कमजोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश है.

उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नाम व व्यवस्था में अन्य बदलावों की ओर इशारा करते हुए कहा, “यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जानबूझकर की गई कोशिश है.” रंजन ने कहा, “मनरेगा’ गांधीजी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विके्द्रिरत विकास के सपने का जीता-जागता उदाहरण है, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है.” उन्होंने कहा, “अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी. नया ढांचा इसे सशर्त, केंद्र द्वारा नियंत्रित की जाने वाली योजना से बदल देता है, जो मजदूरों के लिए सिर्फ एक भरोसा है जिसे राज्य लागू करेंगे.”

सांसद ने कहा, “जो कभी काम करने का सही अधिकार था, उसे अब एक प्रशासनिक मदद में बदला जा रहा है और जो पूरी तरह से केंद्र की मर्जी पर निर्भर है.” उन्होंने कहा, “यह कोई सुधार नहीं बल्कि गांव के गरीबों के लिए एक संवैधानिक वादे को वापस लेना है.” रंजन ने दावा किया कि मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा इस योजना के खिलाफ उठाए गए अनेक कदमों की वजह से गत पांच साल में योजना के तहत हर साल मुश्किल से 50-55 दिन काम मिल पा रहा है जबकि योजना 100 दिन के काम की गारंटी देती है. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का भी आरोप लगाया.

सांसद ने कहा, “राज्य सरकारों को 40 फीसदी खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जाएगा. नियमों, ब्रांडिंग और क्रेडिट पर पूरा नियंत्रण केंद्र के पास रहेगा. यह वित्तीय धोखा है. केंद्र द्वारा संघवाद को कमजोर करने का एक अनूठा उदाहरण है.” कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के आदर्शों का सीधा अपमान है और ग्रामीण रोजगार पर खुली जंग का ऐलान है. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड बेरोजगारी से भारत के युवाओं को तबाह करने के बाद मोदी सरकार अब गरीब ग्रामीण परिवारों की बची हुई आखिरी आर्थिक सुरक्षा को निशाना बना रही है. रंजन ने कहा, “हम सड़क से लेकर संसद तक, हर मंच पर इस जन-विरोधी, मजदूर-विरोधी और संघ-विरोधी हमले का विरोध करेंगे.”

मनरेगा समेत अल्पसंख्यकों और गरीबों की योजनाएं बंद करना चाहती है मोदी सरकार: कांग्रेस

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन राजेंद्र पाल गौतम ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बंद करने की साजिश के तहत राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को समाप्त करना चाहती है. गौतम, यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि जब संविधान का निर्माण हो रहा था, तब प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में बाबा साहब भीमराव आंबेडकर काम के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाना चाहते थे लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों के कारण यह संभव नहीं हो सका. कांग्रेस नेता ने कहा कि वर्ष 2005 में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सप्रंग) सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौ दिन के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मनरेगा को लागू किया ताकि गांवों में ही लोगों को काम मिले और कोई भूखा न रहे. उन्होंने कहा कि योजना के तहत बजट का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी और ग्राम सभाओं को गांवों की जरूरत के अनुसार कार्य तय करने का पूर्ण अधिकार दिया गया था. गौतम ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मनरेगा को पूरी तरह खत्म करने पर आमादा है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं, मजदूरों और युवाओं के साथ इस सरकार ने हर स्तर पर छल किया है.

कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘विकसित भारत’ का दिखावा करते हुए सरकार ने सौ दिन के बजाय 125 दिन के रोजगार का प्रावधान तो दिखाया लेकिन पंचायती राज संस्थाओं से अधिकार छीन लिए और रोजगार की गारंटी को कमजोर कर दिया. उन्होंने कहा कि साथ ही, कार्य निर्धारण का अधिकार केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है.

गौतम ने कहा कि पहले से आर्थिक दबाव झेल रही राज्य सरकारों पर 40 प्रतिशत तक का अतिरिक्त बोझ डालकर केंद्र सरकार मनरेगा को बंद करने की योजना बना रही है, क्योंकि इतनी बड़ी हिस्सेदारी वहन करना किसी भी राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के सार्वजनिक उपक्रमों को या तो बेच रही है या पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रख रही है.
कांग्रेस नेता ने योजनाओं के नाम बदलने के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार नई योजनाएं लाने के बजाय केवल पुरानी योजनाओं के नाम बदलने का काम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य लगातार गिर रहा है लेकिन केंद्र सरकार इस पर मौन है. गौतम ने कहा कि मौजूदा सरकार ने महिलाओं, विद्यार्थियों, अल्पसंख्यकों और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं बंद कर दी हैं.

गांधी के विचारों, गरीबों को खत्म करने की ‘सोची-समझी साज़िश’ है ‘वीबी-जी राम जी’ कानून: कांग्रेस

कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर मनरेगा के स्थान पर लाए गए ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी विधेयक, 2025’ को महात्मा गांधी के विचारों पर सीधा हमला करार दिया और कहा कि यह गरीबों से काम का संवैधानिक अधिकार छीनने की ‘सोची-समझी साजिश’ है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व प्रभारी बी के हरिप्रसाद ने यहां प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर यह गंभीर आरोप लगाए.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘सुधार’ के नाम पर दुनिया की सबसे बड़ी रोजग़ार गारंटी योजना मनरेगा को खत्म करने का काम किया है. उन्होंने कहा, “यह महात्मा गांधी के विचारों पर सीधा हमला है और देश के सबसे गरीब नागरिकों से काम का संवैधानिक अधिकार छीनने की सोची-समझी साजिश है.” कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हरिप्रसाद ने कहा कि दशक पुराना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) गांधी जी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और विकेन्द्रीकृत विकास की अवधारणा का जीवंत उदाहरण रहा है.

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