सोनम वांगचुक हिरासत से रिहा होंगे, गृह मंत्रालय ने लिया फैसला; जानिए मामला

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Sat, 14 Mar 2026 01:03 PM
सोनम वांगचुक हिरासत से रिहा होंगे, गृह मंत्रालय ने लिया फैसला; जानिए मामला
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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है। यह जानकारी गृह मंत्रालय ने शनिवार को दी। मंत्रालय ने बताया कि यह फैसला National राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए लिया गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से वांगचुक की हिरासत खत्म करने का फैसला किया गया, ताकि सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक बातचीत आगे बढ़ सके।

मंत्रालय के अनुसार, सरकार लद्दाख के अलग-अलग समुदायों, नेताओं और हितधारकों से लगातार बातचीत कर रही है, ताकि क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और मांगों का समाधान निकाला जा सके। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में बंद और विरोध प्रदर्शनों के कारण समाज के शांतिपूर्ण माहौल पर असर पड़ा है। इसका असर छात्रों, नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं, व्यापारियों, टूर ऑपरेटरों, पर्यटकों और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।

लद्दाख में सुरक्षा उपायों पर सरकार का जोर

जारी बयान में सरकार ने दोहराया कि लद्दाख के लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान रचनात्मक बातचीत और संवाद के जरिए निकाला जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से बनाई गई उच्च स्तरीय समिति और अन्य उचित मंचों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

कब और क्यों हुई थी वांगचुक की गिरफ्तारी?

दरअसल, लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति बनने के बाद 26 सितंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। तब यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था। वांगचुक इस कानून के तहत तय हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके थे।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था दखल

इस मामले में इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल दिया था। 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख तय की थी। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या उनके भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट को वास्तव में भड़काऊ माना जा सकता है और क्या उनका 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा से कोई सीधा संबंध है। सरकार का कहना है कि अब आगे का रास्ता संवाद और आपसी समझ से ही निकलेगा, ताकि लद्दाख में शांति और विकास दोनों बनाए रखे जा सकें।

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