
केरल: मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सोमवार को आश्वासन दिया है कि मुनंबम भूमि विवाद से प्रभावित निवासियों को उनकी जगहों से बेदखल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भूमि पर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा, “हमने यह फैसला लिया है कि इन पीड़ितों को उनकी जगहों से बेदखल नहीं किया जाएगा। उनकी रक्षा की जाएगी। उन्हें उनकी भूमि मिलेगी। हम अंत तक इसके लिए लड़ेंगे।” उन्होंने कहा कि यह रुख नया नहीं है और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने विपक्ष में रहते हुए भी लगातार इसी रुख को बनाए रखा था।
वक्फ बोर्ड के फैसले पर उठे सवाल
सतीशन ने वक्फ बोर्ड के विवादित भूमि को उम्मीद (UMEED) पोर्टल पर पंजीकृत करने के फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने दावा किया कि बोर्ड की नियुक्तियां पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के कार्यकाल में की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य वर्तमान यूडीएफ सरकार को इस मुद्दे को 10 मिनट के भीतर हल करने से रोकना था, जैसा कि उन्होंने पहले वादा किया था।
वक्फ कर रहा संपत्ति पर अपना दावा
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी केरल राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के. एस. हमजा द्वारा यह दोहराने के एक दिन बाद आई है कि मुनंबम की विवादित भूमि वक्फ संपत्ति है और इसे राज्य की अन्य वक्फ संपत्तियों के साथ उम्मीद पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है।
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मुनंबम भूमि विवाद केरल में एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बनकर उभरा है, जिसमें कई निवासी अपनी भूमि की स्वामित्व स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। भाजपा ने विरोध कर रहे निवासियों को समर्थन दिया है और दावा किया है कि संशोधित वक्फ अधिनियम उनकी चिंताओं को दूर करने में मदद करेगा।



