
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मुकदमों के तय समयसीमा में निपटारे के लिए दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एक अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में देशभर की सभी अदालतों में सुनवाई टालने (स्थगन) की प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए एक समान, सुव्यवस्थित और प्रभावी दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध किया गया था।
याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि उसकी याचिका का उद्देश्य अदालतों में मामलों की सुनवाई बार-बार और अनियंत्रित रूप से स्थगित किए जाने के संबंध में दिशानिर्देश तय कराना है। इस पर पीठ ने स्वयं अपनी पैरवी कर रहे याचिकाकर्ता से कहा, ”आप बार काउंसिल आॅफ इंडिया, राज्य बार काउंसिल, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशंस और जिला न्यायालय बार एसोसिएशंस के पास जाइए।” पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, ”हम वकीलों से दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते। हम वकीलों के मित्र हैं।”’
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि देश की सभी अदालतों पर लागू होने वाली एक समान राष्ट्रीय मामला प्रबंधन नीति तैयार कर उसे लागू किया जाए, यानी सभी अदालतों में मामलों के निपटारे की एक जैसी प्रणाली हो। इस नीति में विभिन्न चरणों की कार्यवाही के लिए निर्धारित समय-सीमा, स्थगन को विनियमित करने के प्रावधान, उपयुक्त मामलों में लगातार और दिन-प्रतिदिन सुनवाई तथा काफी समय से लंबित और पुराने मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण जैसी व्यवस्थाएं शामिल करने की अपील की गई थी।



