ईडी की जांच में बड़ा खुलासा, विदेशी फंडिंग के सहारे चलता रहा ‘घुसपैठ सिंडिकेट’, बिना केवाईसी खोले गए खाते

Author: Nandkishoryadav
UPDATED: Sat, 18 Jul 2026 03:46 PM
ईडी की जांच में बड़ा खुलासा, विदेशी फंडिंग के सहारे चलता रहा ‘घुसपैठ सिंडिकेट’, बिना केवाईसी खोले गए खाते
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लखनऊ: बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को भारत में घुसपैठ कराने, नागरिकता के फर्जी दस्तावेज बनवाने वाले सिंडिकेट के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मारे गए छापों में बड़ा खुलासा हुआ है। ईडी की जांच में सामने आया है कि एटीएस द्वारा इस सिंडिकेट के खिलाफ की गई कार्रवाई के बावजूद पश्चिम बंगाल में यह अवैध कारोबार लगातार फल-फूल रहा था। जिन एनजीओ को विदेश से फंडिंग हो रही थी, उन्होंने करोड़ों रुपये की रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया था ताकि जांच एजेंसियों से उसे बचाया जा सके।

एनजीओ विदेश से अभी तक फंडिंग हासिल कर रहे

ईडी ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल, यूपी, दिल्ली और हरियाणा में 17 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे थे, जिनमें कई एनजीओ भी शामिल थे। इनकी जांच में तमाम आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी पड़ताल में सामने आया है कि तमाम सतर्कता के बावजूद ये एनजीओ विदेश से अभी तक फंडिंग हासिल कर रहे हैं।

इसी वजह से अब ईडी इस मामले में बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है ताकि घुसपैठियों को बसाने, मदरसों और मस्जिदों के निर्माण के लिए हो रही विदेशी फंडिंग को पूरी तरह से रोका जा सके। ईडी जल्द उन बैंकों से भी जवाब-तलब करेगी, जिनके यहां एनजीओ के एफसीआरए खाते खोलकर विदेश से रकम मंगाई जाती थी। साथ ही उन छोटे बैंकों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा, जो बिना केवाईसी घुसपैठियों के खाते खोल रहे थे।

यूपी में गहरी हैं जड़ें

बता दें कि यूपी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की गहरी जड़ें हैं। खासकर सहारनपुर का देवबंद उनकी पनाहगाह बना है। बीते पांच वर्षों के दौरान एटीएस ने घुसपैठियों के तीन माड्यूल पर कानूनी कार्रवाई की है। इसमें से एक माड्यूल के 15 सदस्यों को बीते दिनों राजधानी की अदालत सजा भी सुना चुकी है। वहीं राज्य सरकार ने भी घुसपैठियों को चिन्हित कर उनको वापस भेजने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की योजना बनाई थी।

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