न्यायालय का हवाई अड्डों के नजदीक शहरी अवसंरचना को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने देश के हवाई अड्डों के नजदीक शहरी अवसंरचना को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में अदालत से हवाई अड्डों के नजदीक निर्माण को विनियमित करने के लिए नियम बनाने के अनुरोध के साथ पिछले साल 12 जून को अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया के विमान हादसे का जिक्र किया गया था, जिसमें 241 यात्रियों व चालक दल के सदस्यों के साथ जमीन पर चिकित्सा महाविद्यालय के 19 चिकित्सकों और विद्यार्थियों की मौत हो गई थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शकील शेख द्वारा अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मतादान शुक्ला के जरिए दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए टिप्पणी की कि यह मामला नीति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता शुक्ला ने दलील दी कि देश भर में हवाई अड्डों के आस-पास बुनियादी ढांचे से जुड़े खतरे हैं, क्योंकि शहरी बुनियादी ढांचे के विस्तार को नियंत्रित करने के लिए कोई नियम नहीं हैं।

उन्होंने पिछले साल 12 जून को एअर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का जिक्र किया, जिसमें कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि विमान हवाई अड्डा के नजदीक स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के ऊपर गिरा जिससे वहां 19 चिकित्सक और विद्यार्थी मारे गए।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने अधिवक्ता से कहा कि अदालत इस याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह से नीतिगत मामला है। उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वे अपनी याचिका वापस लेना चाहेंगे। शुक्ला ने न्यायालय के रुख को देखते हुए याचिका वापस लेने पर सहमति जताई , जिसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया।

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