
फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में पश्चिम एशिया की सुरक्षा, अमेरिका-ईरान समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक के दौरान ट्रंप ने हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यह समझौता सफल होना चाहिए और इसके अगले चरण की बातचीत पहले से भी आसान हो सकती है। ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान में धन निवेश करेगा। बता दें कि, बीते राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने शांति समझौते पर डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए हैं।
हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं- ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दौरान कहा, ‘हमने ईरान के साथ डील कर ली है और यह सफल होनी चाहिए। अब यह दूसरे चरण में जाएगी, जो मुझे लगता है कि असल में आसान होगा। मैं पिछले हफ्ते उन पर हमला नहीं करना चाहता था, लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं था। और असल में हमने दो बार ऐसा किया। हम तीसरी बार भी ऐसा करने जा रहे थे, लेकिन हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन हमारी डील एक निष्पक्ष डील है। यह एक अच्छी डील है। हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। हमारे पास किसी दिन अंदर जाकर कार्रवाई करने का अधिकार है, अगर मैं कुछ करना चाहूं या कोई और कुछ करना चाहे। लेकिन हम कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। ईरान में पैसा निवेश करने की हमारी कोई बाध्यता नहीं है’।
‘परमाणु हथियार बनाने-हासिल करने पर ईरान भुगतेगा बुरे नतीजे’
ट्रंप ने आगे कहा, ‘मेरे लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों। और यह बात साफ-साफ कही गई है। वे इसे न तो बनाएंगे, न ही खरीदेंगे और न ही इसका इस्तेमाल करेंगे। और अगर वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें बहुत बुरे नतीजे भुगतने होंगे। मैं आपको उन नतीजों के बारे में बताऊंगा भी नहीं, लेकिन वे नतीजे बहुत ही गंभीर होंगे। इसके बावजूद, मुझे उम्मीद है कि हमारे रिश्ते बहुत अच्छे रहेंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। और यही वजह है कि मैं इसमें शामिल हुआ और मैंने समझौते पर दस्तखत करने का फैसला किया’। ट्रंप ने आगे कहा, ‘मैंने कभी सत्ता बदलने की परवाह नहीं की। यह कभी भी इसका हिस्सा नहीं रहा… हम ऐसे लोगों से बात कर रहे हैं जो मुझे बहुत समझदार लगते हैं। और उनके साथ बातचीत करना अच्छा रहा। वे मजबूत और समझदार लोग थे। असल में, मुझे लगता है कि वे पहले और दूसरे ग्रुप के लोगों से ज्यादा समझदार हैं। लेकिन वे कट्टरपंथी नहीं हैं और अपने देश की मदद करना चाहते हैं। मैं सत्ता बदलने में यकीन नहीं रखता’।



