
नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि बैंकों के बही साक्ष्य संबंधी प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद बैंकों के लेनदेन संबंधी डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की प्रमाणित प्रति अदालत में मान्य हो सकेगी। उच्च सदन में ‘बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026’ पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में कारोबार की सुविधा के लिए कई औपनिवेशिक कानूनों को हटाया गया और कई में बदलाव किया गया है।
उन्होंने कहा कि आज बैंंिकग सेवाओं का बड़े स्तर पर डिजिटीलकरण हो गया है और बैंंिकग क्षेत्र की इस जरूरत को देखते हुए मूल कानून में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि मूल कानून में कागज आधारित प्रति पर बहुत जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि पहले बैंकों को उनके लेनदेन को लेकर कागजी रिकार्ड लेकर अदालत में बुलाया जाता था और मूल कानून में डिजिटल रिकार्ड का उल्लेख नहीं था।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से बैंक डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक रिकार्ड की प्रमाणिक प्रति को अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकेगा और उसे मान्यता मिलेगी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि अदालत में बैंक लेनदेन से संबंधित रिकार्ड पेश करते समय गोपनीयता को पूरी तरह से बरकरार रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक-डिजिटल स्वरूप या भौतिक स्वरूप, किसी भी तरह से रिकार्ड को पेश किए जाने का प्रावधान किया गया है।
प्रस्तावित कानून में ‘बैंककार बही’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाकर डिजिटल, क्लाउड-आधारित और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी शामिल किया गया है। विधेयक में अदालतों के समक्ष डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक बैंंिकग रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में पेश करने तथा उनके प्रमाणन के लिए स्पष्ट और एकसमान नियम निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, बैंक अधिकारियों को बिना ठोस आधार के बार-बार अदालतों में तलब किए जाने से बचाने के लिए ‘विशेष कारण’ (स्पेशल कॉज) परीक्षण का प्रावधान भी किया गया है। वित्त मंत्री के जवाब के बाद उच्च सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।



