प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे जोधपुर, एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन का लोकार्पण किया; अब पचपदरा जाएंगे

जोधपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी जोधपुर पहुंचे और नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने उड़ान योजना की भी शुरुआत की। वहीं, पीएम मोदी को टर्मिनल का प्रजेंटेशन भी दिखाया गया। इस दौरान सीएम भजनलाल शर्मा, गजेंद्र सिंह शेखावत, सिविल एविएशन मंत्री राममोहन नायडू समेत कई अन्य मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत बोले- राजस्थान के लिए ऐतिहासिक दिन

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि आज राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि प्रदेश की पहली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी का उद्घाटन आज होने जा रहा है।मुझे संतोष है कि हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई परियोजना आज क्रियाशील होने जा रही है। 2008 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद ही राज्य में रिफाइनरी लगाने के गंभीर प्रयास शुरू किए गए। यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के विशेष सहयोग के कारण राजस्थान को रिफाइनरी मिल सकी। इस दौरान पेट्रोलियम मंत्री रहे श्री मुरली देवड़ा और श्री वीरप्पा मोइली के साथ लगातार संपर्क रखकर एचपीएसीएल को रिफाइनरी के लिए सहमत किया गया।

सोनिया गांधी और वीरप्पा मोइली ने रिफाइनरी का शिलान्यास किया ने किया था शिलान्यास

वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के दौरान यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं पेट्रोलियम मंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने रिफाइनरी का शिलान्यास किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि राजनीतिक कारणों से पांच साल तक रिफाइनरी का काम बन्द रहा जिससे इसकी लागत बढ़ती गई। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद रिफाइनरी के काम को प्राथमिकता पर शुरू किया गया एवं कोविड जैसी विपरीत परिस्थिति के बावजूद लगभग 85 प्रतिशत काम कांग्रेस सरकार में पूरा किया गया।

कांग्रेस सरकार का विजन रिफाइनरी के साथ पेट्रो केमिकल जोन बनाने का था जिसमें रिफाइनरी से निकलने वाले बाई प्रोडक्ट्स के प्लास्टिक आधारित उद्योग लगें जिससे लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। कांग्रेस सरकार के दौरान इसके लिए जमीन आवंटन भी किया गया परन्तु अभी यह ठंडे बस्ते में है। आज रिफाइनरी के उद्घाटन के साथ इस पेट्रो केमिकल जोन का काम तेजी से शुरू किया जाए और इसे राजस्थानी लोगों के लिए आरक्षित किया जाए जिससे बाहर के व्यवसायियों की बजाय स्थानीय लोगों को प्लास्टिक आधारित उद्योग लगाने एवं रोजगार में प्राथमिकता मिल सके।

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