केंद्र फिल्म ‘सतलुज’ को आईटी नियमों के तहत अंतर-विभागीय समिति के पास भेजेगा

नयी दिल्ली: केंद्र सरकार अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ”सतलुज” को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति के पास विस्तृत जांच और आगे की कार्रवाई के लिए भेजने की तैयारी कर रही है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह कदम स्ट्रींिमग प्लेटफॉर्म जी5 को ”सुरक्षा संबंधी ंिचताओं” के चलते फिल्म हटाने का निर्देश दिए जाने के दो दिन बाद उठाया जा रहा है।

यह फिल्म पंजाब में 1990 के दशक के अशांत दौर में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत ंिसह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। फिल्म सेंसर संबंधी प्रक्रियाओं में तीन वर्ष से अधिक समय तक अटकी रही। ‘सतलुज’ बिना किसी ‘कट’ के जी5 पर तीन जुलाई को रिलीज की गई, लेकिन पांच जुलाई को यह फिल्म प्लेटफॉर्म से हटा दी गई।

सूत्रों के अनुसार, अब इस मामले की जांच सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत गठित अंतर-विभागीय समिति करेगी। यह समिति ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल समाचार प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित सामग्री से संबंधित शिकायतों पर विचार करती है और अपनी सिफारिशें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को भेजती है।

इस समिति में सूचना एवं प्रसारण, गृह, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, महिला एवं बाल विकास, विदेश, रक्षा तथा विधि एवं न्याय मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार आवश्यकता के अनुसार अन्य मंत्रालयों के प्रतिनिधियों और विषय विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल कर सकती है।

समिति अपनी जांच के बाद कई तरह के कदमों की सिफारिश कर सकती है। इनमें चेतावनी जारी करना, माफी या स्पष्टीकरण देने का निर्देश, सामग्री का पुनर्वर्गीकरण या उसमें संशोधन कराना शामिल है। आवश्यकता पड़ने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सामग्री को हटाने या उस तक पहुंच अवरुद्ध करने की सिफारिश भी की जा सकती है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रर्दिशत सामग्री केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की प्रमाणन व्यवस्था के दायरे में नहीं आती और इसका नियमन आईटी नियम, 2021 के भाग-तीन के तहत किया जाता है। इन नियमों में एक आचार संहिता निर्धारित की गई है, जिसके तहत प्रकाशकों/प्रसारकों को ऐसी सामग्री प्रकाशित/प्रसारित करते समय विशेष सावधानी बरतनी होती है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या लोक व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हो।

हालांकि, वर्ष 2021 में बंबई उच्च न्यायालय ने आईटी नियमों के तहत लागू आचार संहिता के संचालन पर रोक लगा दी थी। बाद में मद्रास उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह रोक पूरे देश में प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि, आईटी नियमों में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए भी एक विशेष प्रावधान मौजूद है। नियम 16 के तहत, ऐसे मामलों में जहां किसी प्रकार की देरी स्वीकार्य न हो, अधिकृत अधिकारी संबंधित सामग्री की जांच कर यह निर्धारित कर सकता है कि वह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए(1) में उल्लिखित आधारों के दायरे में आती है या नहीं।
आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को कहा था कि केंद्र सरकार ने ”सुरक्षा संबंधी ंिचताओं” और सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत दायित्वों का हवाला देते हुए जी5 को ‘सतलुज’ को हटाने का निर्देश दिया था।

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