
नई दिल्ली: रिचा टूर्स नामक कंपनी के माध्यम से कैलाश मानसरोवर गए तीर्थयात्रियों का अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। जिससे लापता तीर्थयात्रियों के परिजन बेहद दुखी और निराश हैं। अब इन परिजनों ने सरकार से भावुक अपील करते हुए एक याचिका जारी की है। इस याचिका में नेपाल में भारत के राजदूत और भारतीय विदेश सचिव से लापता लोगों की खोज के लिए तुरंत तलाशी अभियान चलाने और फोरेंसिक पहचान के लिए भारत से टीम भेजने, परिवारों के साथ स्पष्ट बातचीत करने और सम्मानजनक दस्तावेजी प्रक्रिया करने की अपील की गई है।
याचिका में कहा गया है कि भारत सरकार को नेपाल के लिए विशेष खोज, रिकवरी, मलबा हटाने, तकनीकी खोज और फोरेंसिक क्षमताओं की तुरंत पेशकश करनी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां जरूरत हो, वहां भारत को चीनी अधिकारियों से भी मदद लेनी चाहिए। सबसे बुरी तरह प्रभावित जगहों का लगातार आकलन किया जाना चाहिए, जिसमें बेहतरीन विशेषज्ञता और उपकरणों का इस्तेमाल हो।
डीएनए और फोरेंसिक-पहचान प्रक्रिया
याचिका में कहा गया है कि नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU), या कोई अन्य सक्षम भारतीय फोरेंसिक संस्था, नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर डीएनए आधारित पहचान में सहायता और समन्वय करे। काठमांडू में परिवारों को डीएनए सैंपल देने की सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। भारत में भी परिवारों को तय सरकारी प्रयोगशालाओं तक तुरंत पहुंच, कस्टडी की स्पष्ट प्रक्रिया, सैंपल का सुरक्षित ट्रांसफर और पहचान प्रक्रिया के बारे में नियमित अपडेट करने की जरूरत है।
याचिका में कहा गया है कि दूतावास और भारत सरकार प्रभावित परिवारों के लिए एक वरिष्ठ नोडल अधिकारी नियुक्त करें। परिवारों को खोज, रिकवरी, पहचान और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट, भरोसेमंद और नियमित अपडेट की दिए जाएं।
मदद के लिए समय-सीमा वाला ढांचा
परिवारों को लापता व्यक्ति और मृतकों से जुड़े दस्तावेजीकरण की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही परिजनों ने अनुमानित समय-सीमा, अंतिम संस्कार, स्वदेश वापसी और अन्य संबंधित मामलों के बारे में भी जानकारी देने की मांग की है। याचिका में ये भी कहा गया है कि अगर पूरी कोशिश के बाद भी पहचान या शव बरामद नहीं हो पाता है, तो एक ऐसा कानूनी और संवेदनशील तरीका होना चाहिए जिससे परिवारों को अनिश्चितता में न रहना पड़े।
पहचान के लिए साफ तस्वीरें उपलब्ध कराएं
परिजनों ने अपनी याचिका में विदेश मंत्रालय से अपील की है कि वे नेपाल पुलिस से कहें कि वह पहचान न हो पाने वाले मृतकों की बेहतर रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें उपलब्ध कराए, जिसमें प्राइवेसी का भी पूरा ध्यान रखा जाए। बेहतर क्वालिटी की तस्वीरों से परिवारों को पहचानने और अधिकारियों को जरूरी जानकारी देने में मदद मिल सकती है।
नेपाल में प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद होने के साथ ही बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है। वहीं, हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल पुलिस की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 355 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 218 और नवलपरासी वेस्ट से 208 शव मिले हैं। नवलपरासी वेस्ट के आंकड़े में भारत से बरामद कर सौंपे गए 18 शव भी शामिल हैं। इसके अलावा नुवाकोट से 177, रासुवा से 127, गोरखा से 69, धादिंग से 60 और तनाहुन से 38 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल सेना के नेतृत्व में संयुक्त बचाव दल गुरुवार को हादसे के नौवें दिन भी प्रभावित इलाकों में तलाशी और राहत अभियान चला रहे हैं। पुलिस के अनुसार, अभी 4,875 लोगों के लापता होने का अनुमान है।



