
नयी दिल्ली. संसद के मानसून सत्र से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा संबंधी संसदीय परामर्श समिति के सदस्यों को सैन्य भर्ती के लिए लायी गयी ‘अग्निपथ योजना’ के बारे में प्रस्तुति दी . हालांकि, छह विपक्षी सांसदों ने इस योजना को तत्काल वापस लेने की मांग की. सूत्रों ने यह जानकारी दी .
करीब दो घंटे तक चली बैठक में राजनाथ सिंह ने सैन्य बलों की परिचालन संबंधी तैयारी पर संभावित प्रभाव सहित विपक्षी दलों की ंिचताओं को दूर करने का प्रयास किया. तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने भी सांसदों को योजना के बारे में बताया जिसको लेकर देश में हिंसक प्रदर्शन हुआ था और विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था. कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), राजद तृणमूल कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने नयी भर्ती योजना पर आपत्ति व्यक्त की और कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए .
उन्होंने एक लिखित ज्ञापन भी रक्षा मंत्री को सौंपा जिसमें इस योजना पर पुर्निवचार करने की मांग की गई है. जिन सांसदों ने इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये, उनमें शक्ति सिह गोहिल, रजनी पाटिल (कांग्रेस), सुप्रिया सुले (राकांपा), सौगत राय एवं सुदीप बंदोपाध्याय (तृणमूल कांग्रेस) और राजद के ए डी सिंह शामिल हैं . लेकिन कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इस पर हस्ताक्षर नहीं किया.
ज्ञात हो कि मनीष तिवारी सार्वजनिक तौर पर अगनिपथ योजना की सराहना कर चुके हैं . उन्होंने कहा था कि यह जरूरी सुधार है क्योंकि दुनिया के अन्य देशों के सशस्त्र बलों ने ऐसी योजना पेश की है. कांग्रेस ने हालांकि, तिवारी की बयान को उनका निजी विचार बताया था . सूत्रों ने बताया कि तिवारी ने बैठक में पूछा कि क्या योजना से किसी तरह से पेंशन पर प्रभाव पड़ता है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह परिचालनात्मक तैयारी को कम करेगा . इस पर सेना प्रमुख ने कहा कि किसी भी स्तर पर इस पर समझौता नहीं होगा .
समिति में 20 सदस्य हैं जिसमें 13 लोकसभा और सात राज्य सभा से हैं . सोमवार की बैठक में कम से कम 12 सांसद मौजूद थे . इसमें मौजूद नहीं रहने वालों में राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे और लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल हैं .
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहित ने विशेषज्ञों एवं उत्कृष्ट सैनिकों द्वारा इसकी आलोचना किये जाने का हवाला दिया और कहा कि इसे वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि इससे बलों का मनोबल प्रभावित होता है और भ्रम की स्थिति पैदा होती है.
उन्होंने कहा कि योजना को पहले पायलट परियोजना के तौर पर शुरू किया जाए और जो लोग प्रशिक्षित हों..उन्हें सैन्य बलों में भर्ती किया जाए.
गोहिल ने कहा, ‘‘ विभिन्न रूपरेखाओं पर काम करने के बाद ही इसे पेश किया जाना चाहिए . ’’ समझा जाता है कि इस प्रस्तुति का मकसद 18 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्षी नेताओं की ंिचताओं को दूर करना है. समिति के सांसदों को प्रस्तुति देने के बाद रक्षा मंत्री एवं तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने कई सवालों के जवाब भी दिये.
गौरतलब है कि 14 जून को योजना की घोषणा किये जाने के बाद कई राज्यों में हिंसक विरोध प्रदर्शन की खबरें आई थी . कई विपक्षी दलों ने योजना के वापस लेने की मांग की. भारतीय वायु सेना ने हाल में कहा कि उसे इस योजना के तहत 7.5 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं . पंजीकरण की प्रक्रिया 24 जून को शुरू हुई.
भारत को एआई से होने वाली उथल-पुथल का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए : राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत को कृत्रिम मेधा (एआई) प्रणाली पर ‘बेहद सावधानी’ के साथ काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि देश को इस तकनीक से होने वाली कानूनी, नीतिसंबंधी, राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.
राजनाथ ने कहा, ‘‘हमें मानवता की तरक्की और शांति के लिए एआई का इस्तेमाल करना होगा. ऐसा नहीं होना चाहिए कि कोई देश या देशों का समूह परमाणु ऊर्जा की तरह ही इस तकनीक पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित कर ले और बाकी मुल्क एआई का लाभ नहीं उठा पाएं.’’ रक्षा मंत्री ने नयी दिल्ली में ‘आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस इन डिफेंस’ (रक्षा क्षेत्र में कृत्रिम मेधा) सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद यह टिप्पणी की. उन्होंने एआई की नीतियों और खतरों पर गंभीरता से विचार करने की सलाह दी.
राजनाथ ने कहा, ‘‘हम एआई की प्रगति को नहीं रोक सकते और हमें इसकी प्रगति रोकने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए. लेकिन इसे लेकर बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है.’’ उन्होंने कहा कि जब कोई नयी तकनीक व्यापक बदलाव लेकर आती है तो उसका संक्रमण काल भी बेहद लंबा और जटिल होता है. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘चूंकि, एआई एक ऐसी तकनीक है, जो व्यापक बदलाव ला सकती है, लिहाजा हमें इससे होने वाली कानूनी, नीतिसंबंधी, राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.’’
उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले समय में हमें एआई पर बेहद सावधानी से काम करने की जरूरत है, ताकि यह तकनीक नियंत्रण से बाहर न चली जाए.’’ राजनाथ ने कहा कि किसी तकनीक की दस्तक घड़ी की सुइयों की तरह है, जो एक बार आगे बढ़ जाएं तो उन्हें पीछे ले जाना संभव नहीं होता है. उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई नयी तकनीक आती है तो समाज उसके हिसाब से ढलने में अपना समय लेता है.’’ रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि देश को इस तकनीक का लोकतांत्रिक इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘‘एआई के चलते रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं. इस तकनीक की मदद से जवानों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया में सुधार आ रहा है.’’ कार्यक्रम में राजनाथ ने कृत्रिम मेधा से संचालित 75 रक्षा उत्पाद भी पेश किए. इनमें से कुछ उत्पादों का सशस्त्र बलों द्वारा पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि कुछ को उनमें शामिल करने की प्रक्रिया जारी है.
ये 75 उत्पाद रोबोटिक प्रणाली, साइबर सुरक्षा, मानव व्यवहार विश्लेषण, कुशल निगरानी प्रणाली, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, ध्वनि विश्लेषण और सी4आईएसआर (कमान, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर एवं खुफिया निगरानी और टोह) तथा अभियान संबंधी डेटा के विश्लेषण से संबंधित हैं.
कोविड के कारण उत्पन्न साक्षरता संकट से निपटने के लिये सभी पक्षकार साथ आएं : राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न साक्षरता संकट को केवल शिक्षक दूर नहीं कर सकते हैं बल्कि इसका परिवर्तनकारी समाधान तलाशने के लिये सभी पक्षकारों को साथ आना होगा. राजनाथ सिंह ने ‘‘ बुनियादी साक्षरता एवं आंकिकी में आदर्श बदलाव : भारत को वर्षो में नहीं, महीनों में साक्षर बनाना’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय शिक्षा सम्मेलन में यह बात कही .
सिंह ने कहा, ‘‘ समय आ गया है, जब सभी पक्षकार बुनियादी साक्षरता एवं आंकिकी से जुड़ी वृहद समस्या का परिवर्तनकारी समाधान निकालने के लिये साथ आएं . बिना रणनीतिक सोच और बिना किसी तरह के नुकसानदेह समाधान के, साक्षरता से जुड़ा संकट जारी रहेगा .’’ उन्होंने कहा कि कक्षा तीन के बच्चों ने हाल तक स्कूल नहीं देखा था, पांचवीं कक्षा के बच्चे तीसरी कक्षा में सीखी गयी बातों को भूल गए और ऐसे में प्राथमिक कक्षा में अधिकांश बच्चों को त्वरित समर्थन की जरूरत है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस बड़ी समस्या के समाधान के विषय को हम अकेले शिक्षकों पर नहीं छोड़ सकते हैं . पूरे समुदाय को और समाज के हर एक वर्ग को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बुनियादी साक्षरता एवं आंकिकी को आपातकालीन विषय के रूप में मानना होगा और इसे पूरी तत्परता से निपटना होगा .
गौरतलब है कि यूनीसेफ के अनुसार, 10 वर्ष आयु वर्ग के 70 प्रतिशत बच्चों में कोविड के कारण स्कूल बंद होने से बुनियादी साक्षरता एवं आंकिकी कौशल नहीं पाया गया . सिंह ने कहा कि भारत को सीखने के स्तर में अंतर को पाटने के विषय का समाधान निकालने की जरूरत है . पारंपरिक तरीके, पांच साल की स्कूली शिक्षा के बाद बुनियादी कौशल के विकास में विफल रहे हैं . शिखर सम्मेलन के पहले दिन जानी मानी अर्थशास्त्री सुनीता गांधी की पुस्तक ‘डिसरप्टिव लिटरेसी : ए रोडमैप फॉर अर्जेंट ग्लोबल एक्शन’ का विमोचन किया गया .



