अंतरिक्ष खनन को लेकर उत्साह, लेकिन नहीं हो रही इसमें आने वाली समस्याओं पर बात

लॉरेल: अंतरिक्ष खनन को लेकर एक ओर जहां विज्ञान जगत में उत्साह दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर इसमें आने वाली समस्याओं पर बात नहीं की जा रही है। अंतरिक्ष खनन वैसे तो अनदेखे खजाने तक पहुंच बनाने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ नैतिक समस्याएं भी हैं। ऐसें में सवाल उठता है कि क्या हम इन समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार हैं ? जितना सोचा गया था, उससे काफी पहले ही अंतरिक्ष खनन पर काम शुरू हो चुका है। विभिन्न अंतरिक्ष खनन कंपनियों ने इसपर बढ़-चढ़कर काम शुरू कर दिया है। अंतरिक्ष खनन के इच्छुक, धैर्यवान और अच्छी तरह से वित्त पोषित निवेशक कुछ वर्षों के अंदर मिशन मोड पर इसपर काम कर सकते हैं।

अंतरिक्ष खनन की वकालत करने वालों का कहना है कि इससे खरबों डॉलर की संपत्ति तक पहुंच बनाई जा सकती है। कई विश्लेषकों का अनुमान है कि यह संपत्ति दसियों अरब डॉलर की भी हो सकती है। अंतरिक्ष संसाधनों की तुलना कभी-कभी समुद्री संसाधनों से की जाती है। लेकिन समुद्री खोजबीन के विपरीत अंतरिक्ष खनन के लिए उन्नत तकनीक और बड़ी मात्रा में प्रारंभिक पूंजी की आवश्यकता होती है।

अंतरिक्ष खनन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक धन बहुत कम लोगों के हाथों में केंद्रित है। संसाधनों का लाभ उठाने में सक्षम लोगों और इसके दोहन से होने वाला नुकसान झेलने वालों के बीच बड़ी असमानताएं मौजूद हैं। इस बात की भी आशंका है कि अंतरिक्ष खनन में शुरुआती सफलता ही एकमात्र सफलता होगी। अंतरिक्ष खनन के लिए स्थापित कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा एक अतिरिक्त बाधा होगी, और इसको लेकर एकाधिकार कायम हो सकता है।

कानूनी दार्शनिक डेनियल पिल्चमैन का कहना है कि अंतरिक्ष खनन से पृथ्वी पर असमानता बढ़ने की संभावना है। उनका तर्क है कि प्रथा तब तक अनैतिक रहेगी, जब तक कि इससे मिलने वाले लाभ को सभी के लिए विनियमित नहीं किया जाता।
जेम्स श्वार्ट्ज भी एक दार्शनिक हैं। वह कहते हैं कि अंतरिक्ष संसाधनों के खनन से ‘‘आम लोगों की बेहतरी में उल्लेखनीय सुधार’’ होने की संभावना नहीं है और यह अनैतिक है। श्वार्ट्ज का कहना है कि उन संसाधनों का उपयोग पृथ्वी-आधारित जरूरतों के बजाय अंतरिक्ष-आधारित अनुसंधान के लिए किया जाए। यह एक ऐसा निष्कर्ष है, जिससे हर कोई सहमत नहीं है।

ब्रह्मांड विज्ञानी अपर्णा वेंकटेशन का कहना है कि ‘‘ब्रह्मांड के मामले में उपनिवेशवाद की मानसिकता को वास्तव में’’ आगे बढ़ने से रोकने के लिए स्वदेशी ज्ञान और मुख्यधारा के खगोल विज्ञान को एकीकृत करने की आवश्यकता है। उपनिवेशवाद की यही मानसिकता अंतरिक्ष में संसाधनों के दोहन से जुड़ी हुई है।

कई अन्य अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का तर्क है कि यह ‘‘महत्वपूर्ण है कि नैतिकता और उपनिवेश विरोधी प्रथाएं ग्रह सुरक्षा के केंद्रीय विचार हैं।’’ वे अंतरिक्ष विज्ञान समुदाय को ‘‘ग्रहों के ंिपडों पर पर्यावरण के संरक्षण’’, ‘‘वहां पर संसाधन निष्कर्षण के दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभाव’’ और ‘‘अनियंत्रित संसाधन निष्कर्षण के, आर्थिक असमानता पर बड़े पैमाने पर पड़ने वाले अल्पकालिक प्रभाव’’ जैसे सवालों का जवाब तलाशने के लिए ग्रहों के मिशन की नैतिकता पर विचार करने की सलाह देते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button