रूसी नियंत्रण वाले यूक्रेनी इलाकों में मतदान से मास्को और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 27 Sep 2022 07:45 PM
रूसी नियंत्रण वाले यूक्रेनी इलाकों में मतदान से मास्को और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ा
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कीव. रूस के नियंत्रण वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में जारी जनमत संग्रह के लिए मतदान का अंतिम दिन मंगलवार है और आशंका जताई जा रही है कि रूस जल्दी ही इन क्षेत्रों को अपनी सम्प्रभु सीमा घोषित करेगा. रूस के इस कदम से और युद्ध में परमाणु हथियार के उपयोग की धमकी से उसके और पश्चिमी देशों के बीच तनाव भी बढ़ रहा है.

रूस के नियंत्रण वाले पूर्वी यूक्रेन के हिस्सों को संभवत: शुक्रवार को औपचारिक रूप से देश में (रूस में) शामिल किए जाने की घोषणा के बाद क्षेत्र में सात महीने से जारी युद्ध एक नये खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाएगा . रूस ने पश्चिमी देशों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इसके बाद वह अपनी सीमा की रक्षा कर रहा होगा और इसके लिए वह परमाणु हथियारों का उपयोग भी कर सकता है.

यूक्रेन में युद्ध के दौरान (रूसी) सेना को हाल में मिले बड़े झटकों की पृष्ठभूमि में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन यूक्रेन के लोगों को जवाबी हमला करने से रोकने के लिए इस जनमत संग्रह का इस्तेमाल कर रहे हैं. और अगर ऐसा नहीं होता है तो क्रेमलिन ने चेतावनी दी है कि कीव को और भीषण युद्ध का सामना करना पड़ेगा और स्थिति परमाणु हथियारों के उपयोग तक पहुंच सकती है.

राष्ट्रपति पुतिन की अध्यक्षता वाली रूस की सुरक्षा परिषद के उपप्रमुख दमित्रि मेदवेदेव ने बेहद स्पष्ट और कड़े शब्दों में मंगलवार को यह धमकी दी. संदेश भेजने वाले ऐप चैनल पर मेदवेदेव ने लिखा है, ‘‘कल्पना करें कि अगर रूस उस यूक्रेनी शासन के खिलाफ सबसे ताकतवर (विध्वंसकारी) हथियार का उपयोग करने पर बाध्य होता है, जो (यूक्रेन) बड़े पैमाने पर आक्रामक कार्रवाई कर रहा है और हमारे राष्ट्र के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है.’’

उन्होंने लिखा है, ‘‘मुझे विश्वास है कि ऐसी परिस्थिति में नाटो सीधे तौर पर युद्ध में हिस्सा लेने से बचेगा.’’ वहीं, कीव और पश्चिमी देशों ने परमाणु हथियारों के उपयोग संबंधी रूस की चेतावनी को कोरी धमकी बताया है. अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलीवान ने पुतिन द्वारा पिछले सप्ताह दी गई परमाणु हथियार के उपयोग की धमकी पर जवाब दिया. सुलीवान ने रविवार को एनबीसी से कहा कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध में परमाणु हथियार के उपयोग की अपनी धमकी को सच्चाई में बदल दिया तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

यूक्रेन युद्ध पर अभी भी पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है क्योंकि इसके कारण बड़े पैमाने पर खाद्यान्न के अलावा ऊर्जा की कमी भी हो गयी है, हर जगह महंगाई चरम पर है और वैश्विक स्तर पर असमानता बढ़ रही है. परमाणु हथियारों के उपयोग की बात से ंिचता और बढ़ी ही है. युद्ध की शुरूआत में रूस के नियंत्रण में गए और पुन: यूक्रेन के नियंत्रण में आए क्षेत्रों में मुश्किलें और कठिनाइयां आम बात हैं. कुछ लोगों के पास गैस नहीं है, बिजली, पानी नहीं है और मार्च से ही इंटरनेट सेवा भी नहीं है.

युद्ध के कारण पश्चिमी यूरोप में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है और जर्मन अधिकारियों के अनुसार, रूस से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होना, क्रेमलिन द्वारा यूक्रेन का समर्थन कर रहे यूरोप पर दबाव बनाने का तरीका है. रूस के नियंत्रण वाले यूक्रेन में कराए जा रहे इस जनमत संग्रह को यूक्रेन और अन्य कई देशों ने फर्जीवाड़ा बता कर खारिज किया है. वहीं, माना जा रहा है कि जनमत संग्रह के लिए हो रहे इस मतदान का परिणाम पहले से ही रूस के पक्ष में आना तय है.

रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्र में पांच दिन तक चले इस मतदान में लोगों से पूछा जा रहा है कि वे अपने क्षेत्र को रूस में शामिल करना चाहते हैं या नहीं. यह मतदान किसी भी सूरत में निष्पक्ष और स्वतंत्र नहीं माना जा रहा है क्योंकि युद्ध के कारण क्षेत्र के हजारों निवासी पलायन कर गए हैं और फिलहाल वहां रह रहे लोगों पर सशस्त्र रूसी सैनिक घर-घर जाकर मतदान करने का दबाव बना रहे हैं.
क्षेत्रों में मंगलवार को मतदान, मतदान केन्द्रों में हुआ.

वहीं, रूसी मीडिया भी अटकलें लगा रहा है कि युद्ध क्षेत्र में यूक्रेन को हाल में मिल रही बढ़त के कारण मुश्किल में फंसे पुतिन अपने पिछले सप्ताह के आदेश को लागू कर सकते हैं जिसमें उन्होंने मार्शल कानून लागू करके जवानों की आंशिक तैनाती करने और सीमाओं को उन सभी लोगों के लिए बंद करने की बात कही थी जिनकी आयु युद्ध में भाग लेने योग्य है.

हालांकि, पिछले सप्ताह का पुतिन का यह आदेश उनके लिए मुश्किलें खड़ी करने लगा है. इसके कारण बड़ी संख्या में लोग देश से पलायन कर रहे हैं, रूस में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन हो रहे हैं और कहीं-कहीं ंिहसा भी हुई है. सोमवार को साइबेरिया के एक शहर में एक बंदूकधारी ने सेना भर्ती कार्यालय में गोलियां चलायीं जिसमें स्थानीय मुख्य सेना भर्ती अधिकारी घायल हो गए. इससे पहले भर्ती कार्यालयों में कई जगह आगजनी की घटना भी हुई थी.

बड़े पैमाने पर सेना मे भर्ती से बचने के लिए देश छोड़कर जा रहे लोगों को रोकने के ताजा प्रयासों के तहत रूस के अधिकारियों ने जॉर्जिया से सटी सीमा पर सैन्य भर्ती कार्यालय खोलने की योजना बनायी है. देश छोड़ने के मुख्य मार्गों में से जॉर्जिया की सीमा भी एक है.

वहीं, जनता के गुस्से को शांत करने का प्रयास करते हुए रूस के कई अधिकारियों और सांसदों ने यह माना है कि सेना में बड़े पैमाने पर र्भितयों के दौरान गलतियां हुई हैं… जब सैन्य कार्यालयों ने बिना किसी सैन्य अनुभव वाले सामान्य लोगों को भी भर्ती के लिए बुलाया था, जबकि उन्हें नहीं बुलाया जाना चाहिए था. उन्होंने इस गलती को सुधारने का वादा भी किया है.

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