न्यायालय ने बलात्कार पीड़िताओं से संबंधित ‘टू फिंगर’ परीक्षण को महिलाओं की गरिमा पर कुठाराघात बताया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 31 Oct 2022 09:06 PM
न्यायालय ने बलात्कार पीड़िताओं से संबंधित ‘टू फिंगर’ परीक्षण को महिलाओं की गरिमा पर कुठाराघात बताया
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नयी दिल्ली.  उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को बलात्कार पीड़िताओं से संबंधित ‘टू-फिंगर’ परीक्षण की “अनुचित” प्रथा की ंिनदा की और कहा कि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है तथा इससे यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाएं फिर से पीड़ित होती हैं, और यह उनकी गरिमा पर एक कुठाराघात है. ‘टू-फिंगर’ परीक्षण यौन उत्पीड़न और बलात्कार की शिकार महिलाओं के बारे में यह जानने के लिए किया जाता है कि वे सेक्स की अभ्यस्त हैं या नहीं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कहना “पितृसत्तात्मक” और “लैंगिकतावादी” है कि किसी महिला के अपने साथ बलात्कार होने की बात पर सिर्फ इसलिए विश्वास नहीं किया जा सकता कि वह यौन रूप से सक्रिय है. इसने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि दुष्कर्म पीड़िताओं के परीक्षण की ‘टू-फिंगर’ प्रणाली समाज में आज भी व्याप्त है.

न्यायालय ने कहा कि ‘टू-फिंगर’ परीक्षण करने वाले किसी भी व्यक्ति को कदाचार का दोषी ठहराया जाएगा. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने झारखंड सरकार की याचिका पर बलात्कार और हत्या की घटना के दोषी शैलेंद्र कुमार राय उर्फ पांडव राय नामक व्यक्ति को बरी करने के झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले को पलट दिया और उसे गुनहगार करार देने के एक निचली अदालत के फैसले को कायम रखा.

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के एक दशक पुराने एक फैसले में ‘टू-फिंगर’ परीक्षण को महिलाओं की गरिमा और निजता का उल्लंघन बताया गया था. इसने कहा, ‘‘दुर्भाग्य की बात है कि यह प्रणाली अब भी व्याप्त है. महिलाओं का गुप्तांग संबंधी परीक्षण उनकी गरिमा पर कुठाराघात है. यह नहीं कहा जा सकता कि यौन संबंधों के लिहाज से सक्रिय महिला के साथ दुष्कर्म नहीं किया जा सकता.’’ शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों को कुछ निर्देश जारी किए और राज्यों के पुलिस महानिदेशकों तथा स्वास्थ्य सचिवों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि ‘टू-फिंगर’ परीक्षण नहीं हो.

इसने कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने यौन ंिहसा के मामलों में स्वास्थ्य प्रदाताओं के लिए 19 मार्च 2014 को दिशा-निर्देश जारी किए थे जिसमें ‘टू फिंगर’ परीक्षण को प्रतिबंधित किया गया था. पीठ ने केंद्र और राज्य के स्वास्थ्य सचिवों को निर्देश दिया कि सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के पाठ्यक्रम से ‘टू-फिंगर’ परीक्षण से संबंधित अध्ययन सामग्री को हटाया जाए.

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