रिमोट वोटिंग पर ‘काम जारी है’: मुख्य चुनाव आयुक्त

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 18 Jan 2023 10:29 PM
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नयी दिल्ली. मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने रिमोट वोटिंग पर चुनाव आयोग के प्रस्ताव को ‘काम जारी है’ करार देते हुए बुधवार को कहा कि यह आसान विषय नहीं है और लोकतंत्र में फैसले तक पहुंचने में समय लगता है. रिमोट वोटिंग यानी दूरस्थ मतदान पर हाल ही में हुए सर्वदलीय बैठक के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह बैठक ‘‘सफल’’ रही क्योंकि मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिनिधि पूरे दिन बैठे रहे. उन्होंने कहा कि इस वजह से 30 करोड़ ‘लापता मतदाताओं’ का मुद्दा सुर्खियों में आया.

उन्होंने कहा कि शहरी मतदाता, युवा और घरेलू प्रवासी उन 30 करोड़ मतदाताओं का हिस्सा हैं जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनावों में भाग नहीं लिया था. उन्होंने कहा, ‘‘यह आसान विषय नहीं है. लोकतंत्र में निर्णय लेने में समय लगता है. लेकिन हर कोई इस बात से सहमत था कि यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां हमें अपने सभी मतदाताओं को बूथ (वोट डालने के लिए) तक लाने के लिए काम करने की आवश्यकता है… इस पर काम चल रहा है.’’ सीईसी ने कहा कि राजनीतिक दलों की मांग पर चुनाव आयोग की अवधारणा पर जवाब देने की समय सीमा 31 जनवरी से बढ़ाकर 28 फरवरी कर दी गई है.

गत सोमवार को हुई बैठक में कुछ दलों के प्रतिनिधियों ने प्रोटोटाइप रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (आरवीएम) के प्रदर्शन को देखा जबकि कुछ दल यह कहते हुए इससे दूर रहे कि कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर आम सहमति बनाए जाने तक तकनीकी प्रदर्शन से बचा जा सकता है.

आयोग ने आठ राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त 57 दलों को आमंत्रित किया था. बैठक में 40 राज्यस्तरीय दलों ने हिस्सा लिया. सभी आठ राष्ट्रीय दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए थे. पांच साल के अंतराल के बाद आयोजित चुनावी मुद्दों पर हितधारक परामर्श में चुनाव प्रक्रिया में गैर-मतदान करने वाले मतदाताओं को शामिल करने के हर प्रयास के व्यापक उद्देश्यों पर राजनीतिक दल सहमत हुए. उन्होंने भविष्य में नियमित आधार पर इस तरह की और चर्चाओं का भी सुझाव दिया.

राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने बाद में कहा कि निर्वाचन आयोग ने आश्वासन दिया है कि हितधारकों के बीच आम सहमति बनने के बाद ही वह रिमोट वोटिंग प्रक्रिया पर आगे बढ़ेगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरवीएम की कार्य प्रणाली के प्रदर्शन के लिए आयोग द्वारा आयोजित राजनीतिक दलों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद संवाददाताओं से कहा था, ‘‘कोई भी विपक्षी दल रिमोट वोटिंग मशीन के प्रदर्शन को नहीं देखना चाहता. पहले ऐसी मशीन की आवश्यकता का मुद्दा सुलझाया जाना चाहिए.’’ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि उन्हें लगता है कि जब तक आम सहमति नहीं बन जाती, तब तक आरवीएम का प्रदर्शन न हो. उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल प्रदर्शन देखने को तैयार नहीं है.

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह ने भी आरवीएम की जरूरत पर सवाल उठाया और कहा कि मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी हैं. गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने रिमोट वोटिंग मशीन के प्रदर्शन के लिए आठ राष्ट्रीय दलों और राज्यों के मान्यता प्राप्त 57 दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था. निर्वाचन आयोग ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन आॅफ इंडिया द्वारा विकसित आरवीएम किसी भी तरह से इंटरनेट से नहीं जुड़ी होगी.

पिछले महीने निर्वाचन आयोग ने कहा था कि अगर यह पहल लागू की जाती है, तो प्रवासियों के लिए इससे ‘‘सामाजिक परिवर्तन’’ हो सकता है. प्रत्येक मशीन के जरिये 72 निर्वाचन क्षेत्रों में रह रहे प्रवासी मतदाता दूरस्थ मतदान केंद्र से अपना वोट डाल सकेंगे. हाल में एक बयान में निर्वाचन आयोग ने बताया था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 67.4 प्रतिशत मतदान हुआ था और आयोग विभिन्न राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में 30 करोड़ से अधिक मतदाताओं के अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करने को लेकर ंिचतित है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि मतदान नहीं करने वाले 30 करोड़ मतदाताओं में प्रवासी, युवा और अन्य शामिल हैं.

EVM की शिकायत करने वाले दल भी इससे जीत चुके हैं चुनाव: मुख्य निर्वाचन आयुक्त

मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने बुधवार को कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोंिटग मशीनों (ईवीएम) की विश्वसनीयता को लेकर शिकायत करने वाली पार्टियों ने भी इसी उपकरण का उपयोग करके चुनाव जीते हैं. ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा, ‘‘अगर ईवीएम बोल सकती तो शायद यही कहती कि जिसने तेरे सर पर तोहमत रखी है, मैंने उसके भी घर की लाज रखी है.’’ उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन के बाद ईवीएम का इस्तेमाल शुरु हुआ, लिहाजा कानून को लागू करना निर्वाचन आयोग का कर्तव्य है.

कुमार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय सहित कई न्यायिक फैसलों में ईवीएम की प्रशंसा की गई है. जिन लोगों ने ईवीएम के इस्तेमाल के खिलाफ जनहित याचिकाएं दायर की हैं, उन पर अदालतों ने जुर्माना तक लगाया है. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने भी ईवीएम पर सवाल उठाने वाली पार्टियों की आलोचना करते हुए कहा था कि इसे ‘राजनीतिक फुटबॉल’ के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

कुमार ने याद दिलाया कि आयोग ने अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित किया था जिसमें विभिन्न विपक्षी दलों का विवरण दिया गया था, जिन्होंने ईवीएम के जरिए चुनाव जीते हैं. उन्होंने कहा कि 36,000 पेपरट्रेल मशीन (वीवीपीएटी) की गिनती का ईवीएम की गिनती से मिलान किया गया है और परिणाम 100 प्रतिशत सटीक आया है.

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