श्रीरामचरित मानस की आपत्तिजनक टिप्पणी संशोधित या प्रतिबंधित नहीं होने तक चलता रहेगा अभियान : मौर्य

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 02 Feb 2023 06:48 PM
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लखनऊ. श्रीरामचरित मानस पर टिप्पणी को लेकर विवादों से घिरे समाजवादी पार्टी (सपा) के विधान परिषद सदस्य स्वामी प्रसाद मौर्य ने बृहस्पतिवार को कहा कि जब तक इस महाकाव्य की ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणी संशोधित या प्रतिबंधित नहीं होती है तब तक इसके खिलाफ उनकी मुहिम जारी रहेगी.

मौर्य ने यहां संवाददाता सम्मेलन में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर वोट लेने के लिए दलितों और पिछड़ों को हिंदू होने का एहसास कराने और सम्मान देने की बारी आने पर उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिलसिला बंद होना चाहिये.
उन्होंने कहा, ‘‘सिर काट देने, जीभ काट देने और नाक काट देने की चाहे कितनी भी घुड़कियां मिलें, स्वामी प्रसाद मौर्य इससे डरने वाले नहीं हैं. हमने पिछड़ों और वंचितों के सम्मान की बात उठायी है. जब तक (श्री रामचरितमानस) की आपत्तिजनक टिप्पणी संशोधित या प्रतिबंधित नहीं होती तब तक यह अभियान चलता रहेगा.”

पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा, ”हम तो दलितों और पिछड़ों को गाली खाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं तो गाली देने वालों के पेट में दर्द हो रहा है. हम अपमानित किए जाने की व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं तो जो लोग अपमानित करने को अपना धर्म समझते हैं, उनके पेट में दर्द हो रहा है.’’

कानून और संविधान में मेरा विश्वास है. मैं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहता चला आ रहा हूं और आगे भी कहता रहूंगा.” मौर्य ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, ”दलित और पिछड़े लोग जब उसी धर्म के हैं तो स्वाभाविक रूप से भाजपा की नजर में वे लोग वोट लेने के लिए तो हिंदू हैं, मगर सम्मान देने की बात आने पर वे बेगाने हो जाते हैं. इसका मतलब आप केवल वोट लेने के लिए ही इनको हिंदू मानते हैं. जब सम्मान और स्वाभिमान की बात आती है, अधिकार की बात आती है तो आप उन्हें दुश्मन मान लेते हो. धर्म की आड़ में उन्हें अपमानित करते हो, यह बंद होना चाहिए.”

उन्होंने कहा, ”बड़े नेता हों, छोटे नेता हों, किसी पार्टी या संगठन से जुड़े हुए हों, मेरा अनुरोध तो सबसे है कि इस देश के 97 फीसद आबादी वाले समस्त शूद्र समाज और महिलाओं को सम्मान देने के लिए आगे आएं. अभी तक धर्म के नाम पर जो अपमानित किए जाने की परंपरा चली आ रही है, इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए.’’

गौरतलब है कि मौर्य ने पिछले महीने 22 जनवरी को एक बयान में महाकाव्य श्रीरामचरित मानस की आलोचना करते हुए कहा था कि उसके कुछ अंशों से दलितों, पिछड़ों और महिलाओं की भावनाएं आहत होती हैं, लिहाजा इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिये. उनके इस बयान पर खासा विवाद हुआ था. उनके खिलाफ लखनऊ में दो मामले भी दर्ज हुए हैं. संत समाज और भाजपा के नेता श्रीरामचरित मानस पर टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं.

अपमानजनक टिप्पणियों का दर्द केवल महिलाएं और शूद्र ही समझ सकते हैं : मौर्य

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने बृहस्पतिवार को कहा कि धर्म की आड़ में उनके लिए की गई अपमानजनक टिप्पणियों का दर्द केवल महिलाएं और शूद्र ही समझ सकते हैं. श्रीरामचरितमानस पर टिप्पणी कर चर्चा में आये मौर्य ने महात्मा गांधी के साथ महिलाओं और ‘शूद्र’ के दर्द की तुलना की, जिन्होंने ट्रेन में अंग्रेजों द्वारा ‘‘भारतीय कुत्ते हैं’’ जैसी टिप्पणी का सामना किया था.

मौर्य ने ट्वीट किया कि ‘‘इंडियंस आर डाग’’ कहकर अंग्रेजों ने जो अपमान व बदसलूकी ट्रेन में (महात्मा) गांधी जी के साथ किया था, वह दर्द उन्होंने ही समझा था. उसी प्रकार धर्म की आड़ में जो अपमानजनक टिप्पणियां महिलाओं व शुद्र समाज के लिये की जाती हैं उसका दर्द भी वहीं समझते हैं .’’

मौर्य ने कहा था, ‘‘श्रीरामचरित मानस की कुछ पंक्तियों में तेली और ‘कुम्हार’ जैसी जातियों के नामों का उल्लेख है, जो इन जातियों के लाखों लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं.’’ मौर्य ने मांग की थी कि पुस्तक के ऐसे हिस्से पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए जो किसी की जाति या ऐसे किसी चिह्न के आधार पर किसी का अपमान करते हैं .

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