चंडीगढ़. पंजाब पुलिस ने बृहस्पतिवार को कहा कि कट्टरपंथी अलगाववादी अमृतपाल सिंह के एक सहयोगी के पास से बरामद की गयी संवेदनशील सामग्री से संकेत मिलता है कि वे ‘‘देश विरोधी’’ गतिविधियों में शामिल थे. इससे पहले, लुधियाना जिले में खन्ना क्षेत्र की पुलिस ने कहा कि उन्होंने तेजिंदर सिंह गिल नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर अमृतपाल सिंह के निजी सुरक्षा घेरे का हिस्सा था.
पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक (मुख्यालय) सुखचैन सिंह गिल ने यहां संवाददाताओं को बताया कि तेजिंदर सिंह गिल से पूछताछ में पुलिस को कुछ संवेदनशील सामग्री मिली है जो इस बात की ओर इंगित करती है कि अमृतपाल की अगुवाई वाला संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल था.
आईजीपी सुखचैन सिंह गिल ने कहा, ‘‘ तेजिंदर से पूछताछ के दौरान और उसके मोबाइल विश्लेषण से कई तथ्य सामने आए हैं जो बताते हैं कि वे लोग देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुछ ऐसे वीडियो थे जिनसे पता चलता है कि वे जल्लूपुर खेड़ा के पास गोलियां चलाने का अभ्यास कर रहे थे. कुछ वीडियो फुटेज और तस्वीरों से पता चलता है कि उन्होंने आनंदपुर खालसा फौज (एकेएफ) का होलोग्राम बनाया है. हथियारों के इस्तेमाल और रख-रखाव से संबंधित कुछ वीडियो भी मिले हैं.’’
आईजीपी गिल ने कहा कि अब तक प्राप्त सबूत इस बात का पुख्ता संकेत देते हैं कि अमृतपाल सिंह का सीमा पार से संबंध था. आईजीपी ने कहा कि इस मामले में अब तक 207 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से 30 आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं.
पुलिस अधिकारी ने कहा कि कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के शाहबाद से गिरफ्तार बलजीत कौर ने 19 मार्च को कथित तौर पर अमृतपाल और उसके करीबी पपलप्रीत सिंह को शरण दी थी. उन्होंने कहा कि कौर, पपलप्रीत को दो साल से अधिक समय से जानती थी.
हरियाणा में अमृतपाल, उसके सहयोगी को शरण देने के आरोप में महिला गिरफ्तार
हरियाणा पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर कट्टर अलगाववादी अमृतपाल सिंह और उसके सहयोगी पपलप्रीत सिंह को कुरुक्षेत्र जिले में अपने घर में शरण दी थी. पुलिस ने बताया कि महिला को शाहबाद इलाके से गिरफ्तार किया गया.
कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक सुरिंदर सिंह भोरिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने रविवार को शाहबाद में अपने घर पर अमृतपाल और उसके सहयोगी पपलप्रीत सिंह को शरण देने वाली महिला बलजीत कौर को गिरफ्तार कर लिया है. महिला को पंजाब पुलिस को सौंप दिया गया है.’’ पंजाब पुलिस ने पिछले शनिवार को अमृतपाल की अगुवाई वाले संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था.
आतंकी संगठन खड़ा करने के लिए अमृतपाल सिंह पूर्व सैनिकों, युवाओं को लुभा रहा था
खालिस्तान समर्थक कट्टर अलगाववादी अमृतपाल सिंह अपना आतंकी संगठन खड़ा करने के लिए पूर्व सैनिकों और नशे की लत वाले युवाओं को लुभाने का प्रयास कर रहा था. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यहां यह जानकारी दी. पाकिस्तान की ‘इंटर-र्सिवसेज इंटेलिजेंस’ (आईएसआई) के इशारे पर अमृतपाल की यात्रा और योजनाओं के बारे में विवरण देते हुए अधिकारियों ने कहा कि अमृतपाल ने दुबई से लौटने पर अमृतसर जिले के अपने गांव जल्लूपुर खेड़ा में एक नशा मुक्ति केंद्र शुरू किया.
अधिकारियों ने बताया कि अमृतपाल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसे पूर्व सैनिकों की तलाश शुरू कर दी, जो खराब व्यवहार के लिए सेना से सेवानिवृत्त किए गए थे, ताकि उन्हें हथियार प्रशिक्षण देने के लिए इस्तेमाल किया जा सके. उन्होंने बताया कि पिछले साल भारत लौटने और अभिनेता दीपसिद्धू की मौत के बाद अमृतपाल ने संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ की कमान संभाली. अधिकारियों ने बताया कि तब उसके पास दो निजी सुरक्षाकर्मी थे, जबकि इस साल की शुरुआत में निजी सुरक्षार्किमयों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गई.
उन्होंने बताया कि आश्चर्य की बात यह थी कि अमृतपाल के सात निजी सुरक्षाकर्मी युवा थे, जो उसके नशामुक्ति केंद्र पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि नशामुक्ति केंद्र में रहने के दौरान इन युवाओं को प्रशिक्षित किया गया था. अधिकारियों ने कहा कि नशामुक्ति केंद्र में पहुंचे युवकों को बरगलाया गया और उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया गया. साथ ही ऐसे युवकों को मारे गए आतंकी दिलावर सिंह का रास्ता चुनने के लिए भी उकसाया गया, जिसने आत्मघाती हमले में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी.
उन्होंने कहा कि खराब व्यवहार के चलते सेवानिवृत्त किए गए पूर्व सैनिकों को निशाना बनाना अलगाववादी अमृतपाल सिंह के लिए काफी फायदेमंद था, क्योंकि इनके पास पहले से ही शस्त्र लाइसेंस था, जिससे उसका संगठन कानून के शिकंजे से बच सकता था.
अधिकारियों ने बताया कि ऐसे दो पूर्व सैनिकों – वंिरदर सिंह और तलंिवदर सिंह – ने उन युवाओं को हथियार प्रशिक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी, जो नशामुक्ति केंद्र पहुंचे थे.