अदालत ने इमरान को मिले तोहफों का ब्योरा सार्वजनिक करने को कहा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 20 Apr 2022 06:19 PM
अदालत ने इमरान को मिले तोहफों का ब्योरा सार्वजनिक करने को कहा
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान की एक अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को झटका देते हुए सरकार को आदेश दिया कि अगस्त 2018 में पद संभालने के बाद विदेशी हस्तियों से उन्हें मिले उपहारों का ब्योरा सार्वजनिक करे. इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मियां गुल हसन औरंगजेब ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शहबाज शरीफ नीत सरकार को यह निर्देश जारी किया. एक याचिका में एक नागरिक ने पाकिस्तान सूचना आयोग (पीआईसी) के आदेश को लागू करने का अनुरोध किया है वहीं, दूसरी याचिका में कैबिनेट डिवीजन ने उस आदेश को चुनौती दी है.

एक नागरिक ने उपहारों का विवरण प्राप्त करने के लिए पीआईसी से संपर्क किया था और आयोग ने कैबिनेट डिवीजन को निर्देश दिया था कि वह विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और अन्य विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा इमरान खान को दिए गए उपहारों के बारे में जानकारी प्रदान करे. कैबिनेट डिवीजन को 10 कार्य दिवसों के भीतर जानकारी साझा करने और उसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए भी कहा गया था.

लेकिन तत्कालीन पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार ने कहा था कि किसी भी जानकारी के खुलासे से कुछ देशों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं. इसके बाद कैबिनेट डिवीजन ने आयोग के आदेश को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने पीआईसी के आदेश को कायम रखा और कहा कि उपहार प्रधानमंत्री कार्यालय के थे और वे घर ले जाने के लिए नहीं थे.

न्यायमूर्ति औरंगजेब ने बुधवार को कहा कि विदेशी सरकारों द्वारा सरकारी अधिकारियों को दिए गए उपहार पाकिस्तान राज्य के हैं न कि कुछ लोगों के. उन्होंने कहा कि ये उपहार घर ले जाने के लिए नहीं हैं और अगर कोई उन्हें घर ले गया था तो उन उपहारों को वापस लिया जाना चाहिए.

एक्सप्रेस ट्रिब्यून समाचार पत्र की एक रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा, “लोग आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का कार्यालय स्थायी है.” उच्च न्यायालय ने कहा कि उपहारों के संबंध में जानकारी याचिकाकर्ता के साथ साझा की जानी चाहिए क्योंकि जानकारी सार्वजनिक करने के संबंध में कोई स्थगन आदेश नहीं है. अदालत ने कहा कि मामूली राशि देकर इन राजकीय उपहारों को खरीदने की नीति नहीं होनी चाहिए और “इस तरह की नीति का मतलब है कि ये उपहार बिक्री के लिए हैं.”

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