नयी दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ द्वारा उनकी ओर से उठाए गए व्यवस्था के प्रश्न को खारिज किए जाने के बाद बुधवार को कहा कि पीठासीन अधिकारियों को निष्पक्ष और दलगत भावना से मुक्त होना चाहिए तथा वे सत्तापक्ष के साथ अपनी वफादारी नहीं दिखा सकते. उन्होंने धनखड़ को पत्र लिखकर अपनी ओर से विरोध दर्ज कराया है.
उल्लेखनीय है कि सभापति धनखड़ ने राज्यसभा में खरगे द्वारा उठाए गए व्यवस्था के प्रश्न को खारिज कर दिया. व्यवस्था के प्रश्न के तहत खरगे ने आसन से राज्यसभा की कार्यवाही से सदन के नेता पीयूष गोयल के वक्तव्य के उन अंशों को हटाने की मांग की थी जिसमें राहुल गांधी का नाम लिए बिना उनसे माफी मांगने को कहा गया था. खरगे ने कहा था कि गांधी चूंकि दूसरे सदन के सदस्य हैं, इसलिए उनका परोक्ष रूप से भी उल्लेख नहीं हो सकता है.
धनखड़ ने अपनी व्यवस्था में कहा कि सदन के नेता पीयूष गोयल ने अपने वक्तव्य में किसी का भी नाम नहीं लिया था, अत: खरगे की आपत्ति निराधार है. सभापति को लिखे पत्र में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने उच्च सदन में उनकी ओर से उठाए गए व्यवस्था के प्रश्न से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया और कहा कि उनका इरादा इस बात को सामने रखने का था कि इस सदन में दूसरे सदन के सदस्य का हवाला नहीं दिया जा सकता.
उनका कहना है कि सदन के नेता गोयल ने 13 मार्च को राज्ययभा में राहुल गांधी का हवाला देकर जो टिप्पणियां की थीं वो पूरी तरह निराधार और अपमानजनक थीं. खरगे ने कहा, ‘‘हम पहले भी कई मौकों पर कह चुके हैं, उसे फिर से दोहराना चाहता हूं. विधायिका में सभी पीठासीन अधिकारियों से निष्पक्ष और दलगत भावना से मुक्त होने की अपेक्षा की जाती है. वे अपने पूर्वाग्रह या अपनी वफादारी प्रर्दिशत नहीं कर सकते.’’ इससे पहले, पार्टी महासचिव और राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘विधायिका के पीठासीन अधिकारियों से निष्पक्ष और तटस्थ होने की अपेक्षा की जाती है. वे सत्ताधारी दल के प्रति अपने पूर्वाग्रह या अपनी वफादारी प्रर्दिशत नहीं कर सकते. उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सम्मान प्राप्त करना चाहिए, कभी न ख़त्म होने वाले उपदेश देकर नहीं.’’
सभापति ने राज्यसभा में राहुल गांधी का जिक्र होने से संबंधित खरगे की आपत्ति को किया खारिज
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उस आपत्ति को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी उच्च सदन के सदस्य नहीं हैं और इसलिए उनका इस सदन में परोक्ष रूप से भी उल्लेख नहीं हो सकता है.
खरगे ने व्यवस्था के प्रश्न के तहत 13 मार्च को यह आपत्ति जताई थी. सदन के नेता पीयूष गोयल ने राहुल गांधी का नाम लिये बिना उनसे माफी मांगने को कहा था. इस पर खरगे का कहना था कि गांधी अन्य सदन के सदस्य हैं, इसलिए उनका परोक्ष रूप से भी उल्लेख नहीं हो सकता है. धनखड़ ने अपनी व्यवस्था में कहा कि सदन के नेता गोयल ने अपने वक्तव्य में किसी का भी नाम नहीं लिया था अत: खरगे की आपत्ति निराधार है.
सभापति ने कहा कि 13 मार्च, 2023 को विपक्ष के नेता खरगे ने सदन के नेता पीयूष गोयल के बयान पर औचित्य का प्रश्न उठाया था कि राज्य सभा में किसी लोक सभा सदस्य या ऐसे किसी व्यक्ति जो राज्य सभा का सदस्य नहीं हो, के संबंध में कोई चर्चा नहीं हो सकती.
सभापति ने कहा कि सदन के नेता गोयल ने यथानिर्देशित, 13 मार्च, 2023 को राज्य सभा के अपने बयान को प्रमाणित किया है.
उन्होंने संविधान सभा में बी. आर. आंबेडकर के अंतिम भाषण को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘… विभिन्न पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद मेरा दृढ़ मत है कि कोई मुद्दा या व्यक्ति राज्य सभा में चर्चा के दायरे से बाहर नहीं हो सकता है और यह अनन्य रूप से इस सभा और सभापति द्वारा विनियमन के अधीन है.’’ उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता ने अतीत के जिन दो उदाहरणों का जिक्र किया था, उनका यहां विचार किए जा रहे मुद्दे से कोई संबंध नहीं है.
उन्होंने कहा कि गोयल द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रमाणित दस्तावेज से यह पता चलता है कि विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता द्वारा विदेश में दिए गए वक्तव्य पर मांफी मांगने की उनकी मांग तथ्यों पर आधारित है और इसका मतलब ‘मानहानिकारक या अपराध में फंसाने वाले स्वरूप के आरोप’ लगाना नहीं होता.
सभापति ने कहा, ‘‘स्पष्ट और दृढ़ संवैधानिक उपबंधों के मद्देनज़र, मैं स्वयं को विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा उठाए गए औचित्य के प्रश्न को बरकरार रखने हेतु बाध्य नहीं कर सकता और अत: उक्त को अस्वीकृत किया जाता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र के मंदिर की पवित्रता को भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह विशेषाधिकार संसद का अपमान करने, संवैधानिक संस्थानों की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली अपमानजनक टिप्पणियां करने या अपुष्ट तथ्यों के आधार पर लापरवाहीपूर्वक लगाए गए आरोपों के आधार पर कहानी गढ़ने के लिए नहीं है.’’
धनखड़ ने कहा कि राज्य सभा में संसद सदस्य की वाक् स्वतंत्रता के संवैधानिक विशेषाधिकार को कम करने या परिर्वितत करने के किसी भी प्रयास से लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रस्फुटन गंभीर रुप से प्रभावित और बाधित होगा. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक लोकाचार तथा भलीभांति संजोए और पोषित किए गए लोकतांत्रिक मूल्य उन्हें किसी संसद सदस्य की ‘‘वाक् स्वतंत्रता’’ के संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखने का पक्ष लेने को बाध्य करते हैं और इसे किसी भी तरह बाधित नहीं किया जा सकता तथा यह केवल सभा तथा सभापति के विवेक के अधीन है.
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भारत के लोकतंत्र के बारे में लंदन में दिए गए एक बयान को लेकर पीयूष गोयल ने उनसे माफी मांगने की मांग की थी. राहुल ने ब्रिटेन के मशहूर शिक्षण संस्थान कैंब्रिज विश्वविद्यालय में दिए व्याख्यान में आरोप लगाया था कि भारत में लोकतंत्र पर हमला हो रहा है.