चुनावों को ध्यान में रखकर हो रही हैं मुठभेड़ : अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 14 Apr 2023 07:38 PM
चुनावों को ध्यान में रखकर हो रही हैं मुठभेड़ : अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा
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महू/लखनऊ. गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद के बेटे असद और उसके सहयोगी गुलाम की झांसी में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में हुई मौत के अगले दिन शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार चुनावों को देखते हुए मुठभेड़ों को अंजाम दे रही है.

यादव ने कहा, ‘‘(लोकतांत्रिक) संस्थाएं एक के बाद एक समाप्त हो रही हैं और (भारतीय जनता पार्टी) नीत सरकारें (केंद्र और उत्तर प्रदेश की) बाबा साहेब द्वारा हमें दिए गए संविधान को नष्ट करने का काम कर रही हैं.’’ बृहस्पतिवार को झांसी में हुई मुठभेड़ के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा, ‘‘पहले दिन से (उत्तर प्रदेश) भाजपा चुनाव को देखते हुए मुठभेड़ कर रही है.’’ हालांकि इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर कि अतीक अहमद के पाकिस्तान से संबंध थे, पर यादव ने कहा, ‘‘मैं उनके और किसके साथ संबंध के बारे में क्या कह सकता हूं.’’

सपा ने अपराधियों की सूची जारी कर सरकार पर छोड़े सवालों के तीर

समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को ट्विटर पर अपराधियों की एक सूची जारी की और जानना चाहा कि क्या वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ”खासमखास” हैं और इसलिए वे जीवित हैं और अपने गिरोह चला रहे हैं. समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने गैंगस्टर-नेता अतीक अहमद के बेटे और उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद और उसके साथी गुलाम की झांसी में पुलिस मुठभेड़ में मौत के एक दिन बाद यह सूची जारी की है.

सपा के मीडिया प्रकोष्ठ (हैंडल) ने शुक्रवार को एक ट्वीट में अपराधियों की सूची का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘ये सब क्या योगी जी के खासमखास हैं? दरअसल ये सब योगी जी के स्वजातीय हैं. इसीलिए अभी तक बचे भी हुए हैं. अपराध भी कर रहे हैं और गिरोह भी चला रहें. हत्या, बलात्कार, लूट, डकैती, वसूली, रंगदारी सब कर रहे हैं.’’ ट्वीट में एक ‘नोट’ जोड़ते हुए समाजवादी पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ ने कहा है, ‘‘नोट- लिस्ट पुरानी है, लेकिन इसमें ज्यादातर अपराधी भाजपा सर्मिथत हैं और सक्रिय हैं.’’ सूची में विभिन्न नेताओं के नाम और उनके खिलाफ कथित रूप से दर्ज मामलों की संख्या भी दी गई है.

सूची में कुलदीप सिंह सेंगर (उन्नाव, 28 मामले), बृजेश सिंह (वाराणसी, 106 मामले), धनंजय सिंह (जौनपुर, 46 मामले), राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह) (प्रतापगढ़, 31 मामले), उदयभान सिंह (भदोही, 83 मामले), अशोक चंदेल (हमीरपुर, 37 मामले), विनीत सिंह (चंदौसी, 34 मामले), बृजभूषण सिंह (गोंडा, 84 मामले), चुलबुल सिंह (वाराणसी, 53 मामले), सोनू सिंह (सुल्तानपुर, 57 मामले), मोनू सिंह (सुल्तानपुर, 48 मामले), अजय सिंह सिपाही (मिर्जापुर, 81 मामले), ंिपटू सिंह (बस्ती, 23 मामले), सन्नी सिंह (देवरिया, 48 मामले), संग्राम सिंह (बिजनौर, 58 मामले), चुन्नू सिंह (महोबा, 42 मामले) और बादशाह सिंह (महोबा, 88 मामले) शामिल हैं.

कुछ नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी राज्य में पुलिस मुठभेड़ों की बड़ी संख्या पर सवाल उठाए हैं. पीवीसीएचआर (पीपुल्स विजिलेंस कमेटी आॅन ह्यूमन राइट्स) के संस्थापक संयोजक लेनिन रघुवंशी शुक्रवार को पीटीआई-भाषा से कहा, ”हमारा विचार है कि पुलिस मुठभेड़ों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कुछ दिशानिर्देश हैं. और एनएचआरसी के दिशानिर्देशों के अनुसार एक मजिस्ट्रियल जांच होनी चाहिए जिससे ऐसे मामलों में तस्­वीर साफ हो जाएगी.”

सपा को भाजपा के मुकाबले सक्षम गठबंधन बनने की उम्मीद, क्षेत्रीय दलों के साथ खड़ी रहे कांग्रेस

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि उनके दल को विपक्षी पार्टियों का एक ऐसा गठबंधन बनने की उम्मीद है जो सत्तारूढ़ भाजपा को अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में टक्कर दे सकता है. यादव ने यह भी कहा कि कांग्रेस को भाजपा से मुकाबले का अवसर भुनाने के लिए क्षेत्रीय दलों का उनके मजबूत गढ़ों में साथ देना चाहिए.

सपा प्रमुख ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की 132वीं जयंती पर उनकी जन्मस्थली महू में उनके स्मारक पहुंचकर संविधान निर्माता को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए. यादव ने इसके बाद इंदौर प्रेस क्लब में संवाददाताओं से कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि के. चंद्रशेखर राव, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार सरीखे मुख्यमंत्री और हम लोग जिस तरह प्रयास कर रहे हैं, तो कोई न कोई ऐसा गठबंधन या मोर्चा बनेगा जो (आगामी लोकसभा चुनावों में) भाजपा से मुकाबला करेगा.’’ उन्होंने भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता को लेकर पूछे गए एक सवाल पर कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उसे इस सिलसिले में अपनी भूमिका खुद तय करनी है.

सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘कांग्रेस को अवसर मिला है कि भाजपा से मुकाबले के लिए उसे क्षेत्रीय दलों के साथ उन स्थानों पर खड़ा होना चाहिए जहां ये दल मजबूत हैं.’’ उन्होंने लगे हाथ अपनी बात में जोड़ा कि चूंकि कांग्रेस एक बड़ी पार्टी है, इसलिए सपा उसे कोई सुझाव नहीं दे रही है, लेकिन अपना पक्ष जरूर रख रही है.

 

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