मानहानि मामला : उच्च न्यायालय की न्यायाधीश ने राहुल की अपील पर सुनवाई से खुद को किया अलग

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय की एक न्यायाधीश ने ‘मोदी उपनाम’ को लेकर आपराधिक मानहानि के एक मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अपील पर सुनवाई से बुधवार को खुद को अलग कर लिया. गांधी ने दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाने के सत्र अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है.

गांधी की ओर से पेश वकील पी. एस. चम्पानेरी ने न्यायमूर्ति गीता गोपी के समक्ष मामले में विशेष उल्लेख किया और इसकी त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया. अदालत ने, हालांकि संक्षिप्त सुनवाई के बाद कहा, ‘‘मेरे समक्ष (उल्लेख) न करें.’’ चम्पानेरी ने कहा कि अदालत ने बुधवार को इस मामले के उल्लेख की अनुमति उन्हें दी थी, लेकिन जब इसकी सुनवाई शुरू हुई तो न्यायमूर्ति गोपी ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया.

उन्होंने बताया कि अब इस संबंध में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष एक अनुरोध रखा जाएगा ताकि मामले की सुनवाई के लिए कोई अन्य पीठ का गठन किया जाए. चम्पानेरी ने कहा कि इस मामले का उल्लेख न्यायमूर्ति गोपी की अदालत के समक्ष इसलिए किया गया था क्योंकि उनकी अदालत आपराधिक पुनरीक्षण मामले की सुनवाई करती है.

सूरत की एक निचली अदालत ने 23 मार्च को गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया. दोषसिद्धि के खिलाफ गांधी की याचिका सूरत के सत्र न्यायाधीश ने 20 अप्रैल को खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने अब उच्च न्यायालय का रुख किया है.

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