ज्ञानवापी मस्जिद में ‘शिवलिंग’ के वैज्ञानिक सर्वे के आदेश के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई करेगा न्यायालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 18 May 2023 06:53 PM
ज्ञानवापी मस्जिद में ‘शिवलिंग’ के वैज्ञानिक सर्वे के आदेश के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई करेगा न्यायालय
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देनी वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कथित तौर पर मिले ‘शिवलिंग’ का ‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’ कराने का आदेश दिया गया है. इस सर्वेक्षण में ‘शिवंिलग’ की उम्र निर्धारित करने वाली ‘कार्बन डेंिटग’ तकनीक भी शामिल है.

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की पीठ ने ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी की दलीलों का संज्ञान लिया और याचिका को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई.

अहमदी ने कहा, ह्लइलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील लंबित है.ह्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 12 मई को, अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर, ज्ञानवापी मस्जिद में मिली उस संरचना की उम्र निर्धारित करने का आदेश दिया था, जिसके ‘शिवलिंग’ होने का दावा किया जा रहा है.

उच्च न्यायालय ने वाराणसी जिला अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत मई 2022 में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में किए गए सर्वे के दौरान मिली संरचना की ‘कार्बन डेंिटग’ सहित अन्य वैज्ञानिक परीक्षण कराने की अपील वाली याचिका खारिज कर दी गई थी.

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वाराणसी की एक स्थानीय अदालत 16 मई को, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा पूरे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का सर्वे कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई को राजी हो गई थी. ंिहदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन की याचिका को स्वीकार करते हुए जिला अदालत के न्यायाधीश ए के विश्वेष ने ज्ञानवापी मस्जिद समिति से 19 मई तक इस पर जवाब दाखिल करने को कहा था. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 मई की तारीख तय की थी.

इससे पहले, उच्च न्यायालय ने 12 मई को वाराणसी के जिला जज को ‘शिवलिंग’ का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने के ंिहदू पक्ष के अनुरोध पर कानून के अनुसार आगे बढ़ने का निर्देश दिया था. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि वैज्ञानिक सर्वे की प्रक्रिया में उस संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, जिसके बारे में ंिहदुओं का दावा है कि वह एक ‘शिवलिंग’ है.

हालांकि, मस्जिद समिति का कहना है कि यह ‘वजू खाना’ के फव्वारे का हिस्सा है, जहां नमाज अदा करने से पहले लोग हाथ, पैर और मुंह धोते हैं. उच्च न्यायालय ने वाराणसी की अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली लक्ष्मी देवी सहित तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया था.

संरचना की आयु निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक जांच का आदेश देने से पहले उच्च न्यायालय ने कानपुर और रुड़की स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और लखनऊ के बीरबल साहनी संस्थान सहित विभिन्न संस्थानों से रिपोर्ट मांगी थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि उक्त संरचना की प्रत्यक्ष ‘कार्बन डेंिटग’ संभव नहीं है और इसकी उम्र निर्धारित करने के लिए तत्वों की ‘प्रॉक्सी कार्बन डेंिटग’ की जा सकती है, जिसके लिए ‘शिवलिंग’ के आसपास मौजूद सामग्री का विस्तृत अध्ययन किए जाने की जरूरत है.
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि सतह के नीचे मौजूद कुछ जैविक तत्वों की ‘कार्बन डेंिटग’ से भी संरचना की उम्र का पता लगाया जा सकता है, लेकिन इस बाबत यह स्थापित करने की जरूरत है कि ये तत्व उक्त संरचना से जुड़े हुए हैं.

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