विद्रोह के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए रूसी रक्षा मंत्री

वैगनर समूह के विद्रोह से पुतिन गंभीर रूप से कमजोर हो गए - यह यूक्रेन के लिए भी एक अवसर था

मॉस्को/लंदन. रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु निजी सैन्य समूह ‘वैग्नर’ द्वारा विद्रोह करने और उन्हें हटाने की मांग किये जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आये . सोमवार को जारी एक वीडियो में वह यूक्रेन में सैनिकों का निरीक्षण करते हुए नजर आये. इस वीडियो का मकसद देश में कई दशकों के इस सबसे गंभीर राजनीतिक संकट के बाद व्यवस्था बने रहने का संकेत देना है.

लेकिन अब भी उनकी, बागी नेता येवगेनी प्रीगोझिन एवं निजी सेना की तकदीर के साथ ही यूक्रेन में युद्ध पर प्रभाव और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राजनीतिक भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है. इस लड़ाई के दौरान प्रीगोझिन और रूस के सैन्य नेतृत्व के बीच उत्पन्न कटुता ने विद्रोह का रूप ले लिया और वैग्नर समूह दक्षिणी रूस के एक सैन्य मुख्यालय पर कब्जा करने पहुंच गया. ऐसा जान पड़ता है कि बिना किसी रोक-टोक के वह मॉस्को से महज कुछ सौ मील दूर तक पहुंच गया. लेकिन शनिवार को 24 घंटे के अंदर ही वह वापस लौट गया.

क्रेमलिन ने कहा कि उसने समझौता किया है जिसके तहत प्रीगोझिन बेलारूस जाएंगे तथा उन्हें एवं उनके सैनिकों को क्षमादान मिलेगा. वैसे तो प्रीगोझिन के ठिकाने के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन एक लोकप्रिय समाचार चैनल ने टेलीग्राम पर खबर दी कि उन्हें बेलारूस की राजधानी मिंस्क में एक होटल में देखा गया. रक्षा मंत्रालय ने शोइगु का वीडियो ऐसे समय जारी किया है जब रूसी मीडिया अटकलें लगा रहा था कि वह और अन्य सैन्य नेता पुतिन का विश्वास खो चुके हैं और उन्हें उनके पद से हटाया जा सकता है.

वीडियो में शोइगु को एक हेलीकॉप्टर में उड़ान भरते और फिर यूक्रेन में सेना के एक मुख्यालय में सैन्य अधिकारियों से मुलाकात करते देखा गया. सरकारी टेलीविजन समेत रूसी मीडिया ने यह वीडियो दिखाया. वैसे यह स्पष्ट नहीं है कि यह वीडियो कब बनाया गया.
प्रीगोझिन के निशाने पर रहे स्टाफ प्रमुख जनरल वी गेरासिमोव भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आये हैं.

वैगनर समूह के विद्रोह से पुतिन गंभीर रूप से कमजोर हो गए – यह यूक्रेन के लिए भी एक अवसर था

पलक झपकते ही आप चूक सकते थे. 36 घंटों के भीतर, निजी सैन्य कंपनी वैगनर ग्रुप के नेता येवगेनी प्रिगोझिन द्वारा क्रेमलिन के खिलाफ दी गई चुनौती खत्म हो गई. शुक्रवार 23 जून 2023 को, प्रिगोझिन ने अपने 25,000 सैनिकों को ”न्याय के लिए मार्च” पर निकलने का आदेश दिया, जो विधिवत रूप से मास्को में रूसी राष्ट्रपति का सामना करने के लिए निकले. अगली दोपहर उन्होंने इसे बंद कर दिया.

उस समय उनके सैनिक मॉस्को और रोस्तोव-ऑन-डॉन में रूसी सेना के दक्षिणी मुख्यालय के बीच एम4 मोटरवे के आधे से अधिक रास्ते पर आगे बढ. चुके थे. उनकी निजी सेना रूसी राजधानी के 200 किमी (125 मील) के भीतर थी. संकट स्पष्ट रूप से बेलारूसी राष्ट्रपति, अलेक्जेंडर लुकाशेंको की मध्यस्थता में किए गए सौदे और क्रेमलिन द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के कारण टल गया था. लेकिन उथल-पुथल की इस संक्षिप्त घटना का रूस और यूक्रेन में युद्ध पर स्थायी प्रभाव पड़ेगा.

प्रिगोझिन और रूसी सेना के शीर्ष अधिकारियों के बीच पिछले कुछ समय से टकराव चल रहा है. लेकिन जैसे-जैसे बखमुत पर लड़ाई तेज होती गई, यह बढ.ता गया, जिसके दौरान प्रिगोझिन ने शिकायत की कि उसके 20,000 से अधिक लोग मारे गए. मई में, प्रिगोझिन ने एक और रूसी क्रांति की चेतावनी दी थी. उन्होंने चार सप्ताह बाद इस वादे को पूरा करने का प्रयास किया. लेकिन यह 1917 की अक्टूबर क्रांति के जन विद्रोह से बहुत अलग था. इसके बजाय, यह अंतत? रूसी सैन्य-औद्योगिक परिसर के प्रतिस्पर्धी गुटों के बीच एक टकराव था.

हालाँकि, अगर कोई समानता है, तो वह यह है कि विदेशी युद्ध उस पृष्ठभूमि का हिस्सा थे जिसके खिलाफ बोल्शेविक क्रांति और प्रिगोझिन के सत्ता के प्रयास दोनों हुए. और फिर, चुनौती देने वाले को एक नाजुक शासन का सामना करना पड़ा जो गहरी संरचनात्मक समस्याओं और किसी भी युद्ध द्वारा लाई जाने वाली अनिश्चितता से ग्रस्त था.

प्रिगोझिन के विद्रोह का कथित कारण रूसी सेना द्वारा यूक्रेन में अग्रिम मोर्चे पर उसके शिविर पर किया गया स्पष्ट हवाई हमला था. हवाई हमला स्वयं – यदि वास्तव में ऐसा हुआ – एक संकेत है कि क्रेमलिन को पता था कि कुछ घटित हो रहा है. लेकिन जिस गति और सटीकता के साथ प्रिगोझिन ने अपने सैनिकों को बड़ी दूरी पर और रोस्तोव-ऑन-डॉन सहित रणनीतिक स्थानों पर पहुंचाया – यह दर्शाता है कि यह एक अच्छी तरह से तैयार ऑपरेशन था.

हो सकता है कि यह विफल हो गया हो, लेकिन क्रेमलिन के किसी भी भावी चुनौती देने वाले के लिए इसमें भी सबक होंगे. जैसा कि लेनिन ने अपनी 1920 की पुस्तक लेफ्ट विंग कम्युनिज्म : एन इनफैंटाइल डिसआर्डर में जिक्र किया है, 1905 की ”ड्रेस रिहर्सल” के बिना, 1917 में अक्टूबर क्रांति की जीत ”असंभव” होती. इससे पुतिन और उनके अंदरूनी लोगों को गहरी चिंता होनी चाहिए.

रूस – एक नाजुक शासन का पर्दाफाश फिलहाल पुतिन के पास विचार करने और ध्यान देने के लिए अन्य समस्याएं हैं. शनिवार की सुबह रूसी राष्ट्रपति का भाषण बेहद आक्रामक था, जिसमें उन्होंने ”सशस्त्र विद्रोह” को अंजाम देने वाले को कुचलने की कसम खाई थी.
12 घंटों के भीतर, उन्होंने एक समझौता किया जिसके तहत, फिलहाल, प्रिगोझिन या उसके किसी भी भाड़े के सैनिक को दंडित नहीं किया जाएगा. इससे भी अधिक, प्रिगोझिन के साथ प्रतिद्वंद्विता के दौरान पुतिन अपने रक्षा मंत्री, सर्गेई शोइगु और जनरल स्टाफ के प्रमुख वालेरी गेरासिमोव के साथ खड़े रहे.

लेकिन अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इन दोनों को बदला जा सकता है. शोइगु की जगह एलेक्सी ड्युमिन, जिन्होंने उस ऑपरेशन का नेतृत्व किया जिसके परिणामस्वरूप 2014 में क्रीमिया पर रूसी कब्ज.ा हुआ और वर्तमान में वह तुला के क्षेत्रीय गवर्नर के रूप में कार्यरत हैं. और गेरासिमोव की जगह सर्गेई सुरोविकिन, जो वर्तमान में उनके मौजूदा मातहत में से एक हैं, जो 2022-23 की शरद ऋतु और र्सिदयों के दौरान यूक्रेन में युद्ध के प्रभारी थे.

इससे पुतिन की देश या विदेश में किसी मजबूत नेता की छवि नहीं बनती. इसके अलावा, तथ्य यह है कि प्रिगोझिन के भाड़े के सैनिक जमीन पर किसी भी प्रतिरोध का सामना किए बिना मास्को के इतने करीब पहुंच गए और पुतिन को उनके साथ समझौता करना पड़ा और यह महत्वपूर्ण है. यह संकट का जवाब देने और यूक्रेन में युद्ध से परे सैन्य और सुरक्षा संसाधनों को तैनात करने की रूस की क्षमता की सीमाओं के बारे में कुछ कहता है.

प्रिगोझिन के प्रति प्रतिरोध की कमी और रोस्तोव-ऑन-डॉन में वैगनर को प्राप्त स्पष्ट लोकप्रिय समर्थन क्षेत्रीय अभिजात वर्ग और क्रेमलिन के बाहर के लोगों के बीच यूक्रेन में युद्ध के प्रति उत्साह की कमी की तरफ भी इशारा करता है. यह इस बात पर भी सवाल उठाता है कि आम लोग शासन में बदलाव के बारे में कैसा महसूस कर सकते हैं जिसमें चुनाव पुतिन और प्रिगोझिन के बीच है.

इन कमजोरियों का उजागर होना रूस के कुछ बचे हुए सहयोगियों के लिए भी चिंताजनक होगा. तुर्की के राष्ट्रपति, रेसेप तैयप एर्दोगन, शनिवार सुबह पुतिन के टेलीविज.न संबोधन के बाद उनसे बात करने वाले पहले विदेशी नेताओं में से एक थे. क्रेमलिन ने रूस के उप विदेश मंत्री, एंड्री रुडेंको को चीन के विदेश मंत्री, किन गैंग के साथ बातचीत के लिए बीजिंग भेजा, ताकि ”चीन-रूस संबंधों और आम चिंता के अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जा सके”.

तुर्की और चीन ने अपने परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी में उथल-पुथल को कुछ चिंता के साथ देखा होगा. और उन दोनों, कजाकिस्तान और मध्य एशिया में अन्य रूसी पड़ोसियों को इस बात पर गहरा संदेह होगा कि पुतिन आगे चलकर कितने विश्वसनीय भागीदार बन सकते हैं.

यूक्रेन एक मौका चूक गया
संभवत? यूक्रेन और उसके पश्चिमी साझेदार इस पर ध्यान देंगे. कीव के अधिकांश सहयोगियों ने आम तौर पर खुद को चिंता के बयानों तक ही सीमित रखा और उल्लेख किया कि वे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे. इस बीच, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज.ेलेंस्की ने रूस में अराजकता और पुतिन के अपमान पर प्रकाश डाला.

ज.ेलेंस्की के वरिष्ठ सलाहकार मायखाइलो पोडोल्याक ने निराशा व्यक्त की कि प्रिगोझिन ने इतनी जल्दी हार मान ली. ओलेक्सी डेनिलोव (यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव) और यूक्रेनी इतिहासकार जॉर्जी कासियानोव दोनों ने प्रिगोझिन के विद्रोह को रूस के आने वाले विखंडन के एक और संकेत के रूप में देखा.

और यह संभवत? कीव के दृष्टिकोण से मुख्य बिंदु है. अगर रूस में अराजकता लंबे समय तक जारी रहती, तो इससे जवाबी कार्रवाई में आगे बढ.ने का एक वास्तविक अवसर पैदा हो सकता था, जिसे ज.ेलेंस्की को खुद पिछले हफ्ते स्वीकार करना पड़ा था कि वह कल्पना की तुलना में कम प्रगति कर रहा है.

इस अर्थ में भी, प्रिगोझिन के असफल विद्रोह को एक महत्वपूर्ण ड्रेस रिहर्सल के रूप में देखा जा सकता है जो विशेष रूप से यूक्रेन के पश्चिमी भागीदारों के लिए मूल्यवान सबक प्रदान करता है.

एक बेहतर सुसज्जित और प्रशिक्षित यूक्रेनी सेना रूस में अव्यवस्था की इस छोटी अवधि का भी काफी फायदा उठा सकती थी. अधिक टैंक और तोपखाने, अधिक और बेहतर वायु रक्षा प्रणालियाँ, और अधिक लड़ाकू विमान रूसी युद्ध अपराधियों – पुतिन और प्रिगोझिन – में से किसी एक को दूसरे को हराने में मदद नहीं करते. लेकिन वे क्रेमलिन को यूक्रेन के खिलाफ अपने युद्ध की विफलता को स्वीकार करने के करीब ला सकते थे.

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