शौचालय में साथी छात्रा का वीडियो बनाने के मामले में तीन लड़कियों पर मुकदमा

बेंगलुरु/उडुपी. कर्नाटक के उडुपी शहर में कॉलेज के शौचालय में कथित तौर पर साथी छात्रा का वीडियो बनाने की घटना के कई दिन बाद तीन छात्राओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. राज्य में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोपी छात्राओं को गिरफ्तार करने की मांग की है जबकि राज्य के गृहमंत्री जी.परमेश्वर ने आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी ‘छोटी सी घटना’ पर ह्लओछी राजनीतिह्व कर रही है.

पैरामेडिकल कॉलेज की तीन छात्राओं के खिलाफ उडुपी के मालपे पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई. राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की सदस्य खुशबू सुंदर ने वीडियो बनाए जाने की घटना को ‘बेहद चिंताजनक’ करार देते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को देखने के लिए उडुपी जा रही हैं. कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने वीडियो बनाने के मामले में एक छोटी सी घटना बताया. उनके मुताबिक इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया.

सूत्रों ने बताया कि प्राथमिकी में कॉलेज प्रशासन को भी नामजद किया गया है और भारतीय दंड संहिता की धारा 509 (किसी महिला की गरिमा का अपमान करने के इरादे से शब्द, इशारा या कृत्य), 204 (किसी दस्तावेज. या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करना), 175 (दस्तावेज प्रस्तुत करने से बचना), धारा-34 (समान मंशा से कई व्यक्तियों द्वारा आपराधिक कृत्य करना) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 (ई) (जानबूझकर सहमति के बिना किसी की निजी तस्वीर खींचना, प्रकाशित या प्रसारित करना) सहित सुसंगत धाराए लगाई हैं.

पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि उसने कॉलेज के शौचालय में वीडियो बनाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है. उसने बताया कि छात्रा का निजी वीडियो बनाने और बाद में उसे डिलीट करने के मामले में तीन छात्राओं तथा कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.

पुलिस ने उनपर घटना से जुड़ी जानकारी और सबूत मुहैया कराने में असफल रहने का मामला दर्ज किया है जिसकी वजह से पीड़िता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है. बयान के मुताबिक घटना के वीडियो में छेड़छाड़ कर कथित तौर पर इसे ‘वन इंडिया कन्नड’ यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया. एक व्यक्ति ने भी उक्त वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया. इस मामले में सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया गया है.

पिछले दिनों कॉलेज के शौचालय में वीडियो रिकॉर्ड करने के आरोप में तीनों छात्राओं को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया था. वहीं, इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वीडियो बनाने की आरोपी तीन मुस्लिम छात्राओं की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की है. उसने रेखांकित किया है कि आरोपी और पीड़ित दो अलग-अलग धार्मिक समुदायों की हैं.

एक दिन पहले, पुलिस ने लोगों से उन अफवाहों पर विश्वास नहीं करने का आग्रह किया था कि एक विशेष समुदाय की लड़कियों ने दूसरे समुदाय की लड़की को निशाना बनाया था और उसका एक वीडियो ऑनलाइन साझा किया था जिसे उन्होंने कथित तौर पर शौचालय में रिकॉर्ड किया था.

एनसीडब्ल्यू की पूर्व सदस्य श्यामला सुंदर ने बुधवार को उडुपी में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि शौचालय में एक छात्रा का तीन अन्य लड़कियों द्वारा वीडियो बनाना एक गंभीर मुद्दा है. उन्होंने कहा कि वीडियो कथित तौर पर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के मोबाइल फोन जब्त कर लिए.

इस मुद्दे को ट्विटर के जरिये उठाने वाली दक्षिणपंथी कार्यकर्ता रश्मि सामंत से पुलिस ने कथित तौर पर ट्वीट की प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए पूछताछ की थी. इसका जिक्र करते हुए खुशबू सुंदर ने कहा कि अगर उनके अकाउंट से कोई फर्जी ट्वीट किया गया होता तो वह खुद इसकी शिकायत दर्ज करातीं. उन्होंने कहा कि पुलिस को इसमें शामिल लड़कियों के व्यवहार की उचित जांच करनी चाहिए.

एनसीडब्ल्यू की मौजूदा सदस्य और भाजपा नेता खुशबू सुंदर ने कहा, ” इस मुद्दे को देखने के लिए उडुपी जा रही हूं, जहां कॉलेज के शौचालय में एक छात्रा का उसकी सहपाठी छात्राओं ने वीडियो बनाया था. ऐसी गतिविधियों में बच्चों को शामिल होते देखना बेहद दुखद है. एक महिला आयोग के सदस्य के रूप में मैं मामले को देखूंगी, छात्राओं से बात करूंगी, पुलिस से मिलकर कॉलेज का भी दौरा करूंगी. महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है.” राज्य के गृहमंत्री परमेश्वर ने आरोप लगाया कि भाजपा ‘ओछी राजनीति’ में संलिप्त है. उन्होंने रेखांकित किया कि भगवा पार्टी इस मुद्दों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है.

परमेश्वर ने संवाददाताओं से कहा, ”वह एक छोटी सी घटना है. खबरों में कहा गया है कि यह दोस्तों के बीच का मामला है. क्या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए और राजनीतिक रंग दिया जाना चाहिए.” भाजपा पर निशाना साधते हुए परमेश्वर ने कहा कि भाजपा को केवल राजनीतिक कारण के लिए ‘छोटे मुद्दे’ को तूल देना बंद करना चाहिए. उन्हें समाज में शांति के बारे में भी सोचना चाहिए.

परमेश्वर ने सवाल किया, ”क्या ऐसी चीजें पहले नहीं होती थीं? क्या ऐसी घटनाएं पहले कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नहीं होती थीं? तब किसी ने राजनीति नहीं की, अब क्यों कर रहे हैं? और भी कई काम हैं लेकिन वे (भाजपा) उन पर कभी नहीं बोलते. उन्होंने सूखे, बाढ़ के बारे में कुछ नहीं कहा, भाजपा ओछी राजनीति कर रही है; उनके पास अन्य काम होने चाहिए, अब ऐसा लगता है कि उनके पास कोई अन्य काम नहीं है.”

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बसवराज बोम्मई ने गृह मंत्री को ‘इस मामले को हल्के में लेने’ पर आड़े हाथ लिया.
बोम्मई ने संवाददाताओं से कहा, ”अगर वह छोटा मामला था तो प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई और आरोपी लड़कियों के ‘इकबालिया पत्र’ का क्या हुआ? उन लड़कियों को क्यों निलंबित किया गया? उन्हें (परमेश्वर को) इन सवालों का जवाब देना चाहिए.” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की, अगर छात्रा ने ट्वीट कर नहीं बताया होता तो किसी को इसकी जानकारी नहीं होती.

बोम्मई ने कहा, ”आप (सरकार) कितने मामलों पर पर्दा डालेंगे? इन वीडियो से कितनी लड़कियों की इज्जत दांव पर लगी होगी? ऐसी ताकतों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. पुलिस को किसी भी दबाव में आए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहिए. इस मामले में जो भी अधिकारी दोषी हैं उन्हें सजा मिलनी चाहिए.” उन्होंने कहा कि शौचालय में लड़कियों का वीडियो बनाना ‘जघन्य और निंदनीय कृत्य’है.

परमेश्वर ने कहा- ‘छोटी घटना को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा’

कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने उडुपी के एक कॉलेज के शौचालय में एक छात्रा का वीडियो साथी छात्राओं द्वारा बनाए जाने को ”एक छोटी घटना करार दिया, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.” परमेश्वर के अनुसार, ऐसा पहले भी हुआ है लेकिन ”तब किसी ने राजनीति नहीं की” लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ”ओछी राजनीति” में लिप्त हो रही है. मंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में सवाल किया, ”यह एक छोटी सी घटना है. खबरों के अनुसार यह दोस्तों के बीच हुआ. क्या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए और राजनीतिक रंग दिया जाना चाहिए.”

मंत्री ने कहा कि यदि इससे आगे कोई आपराधिक गतिविधि हुई है और शिकायत दी गई है तो यह पुलिस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आएगा. उन्होंने कहा, ”हालांकि, ”न तो कोई शिकायत दी गई है और न ही कुछ और है.” परमेश्वर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इन “छोटे मुद्दों” को केवल राजनीतिक कारणों से तूल देना बंद करना चाहिए. परमेश्वर ने कहा कि उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि समाज में शांति बनी रहे.

परमेश्वर ने कहा, ”क्या ये चीज.ें अतीत में नहीं होती थीं? क्या ये चीजें अतीत में कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नहीं होती थीं? तब किसी ने राजनीति नहीं की, अब क्यों कर रहे हैं? और भी कई काम हैं लेकिन वे (भाजपा) उन पर कभी नहीं बोलते. उन्होंने सूखे, बाढ़ के बारे में कुछ नहीं कहा. भाजपा ओछी राजनीति कर रही है. उनके पास दूसरे काम होने चाहिए. अब ऐसा लगता है कि उनके पास कोई और काम नहीं है.” पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने “इसे हल्के में लेने” के लिए राज्य के गृहमंत्री की आलोचना की. बोम्मई ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”अगर वह छोटा मामला था, तो प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई और आरोपी लड़कियों के स्वीकारोक्ति पत्र का क्या हुआ? उन लड़कियों को क्यों निलंबित किया गया? उन्हें (परमेश्वर को) इन सवालों का जवाब देना चाहिए.” भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि यदि छात्रा ने ट्वीट नहीं किया होता तो किसी को इसकी जानकारी नहीं होती.

उन्होंने कहा, ”आप (सरकार) कितने मामलों पर पर्दा डालेंगे? इन वीडियो से कितनी लड़कियों की इज्जत दांव पर लगी होगी? ऐसी ताकतों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए. पुलिस को बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए.” बोम्मई ने मांग की, ”मामले में दोषी अधिकारियों को दंडित किया जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि शौचालय में लड़कियों का वीडियो बनाना एक ”जघन्य और निंदनीय कृत्य” है. बोम्मई ने दावा किया कि हालांकि, जो लड़की इस घटना को सामने लायी, पुलिस उसके अतीत की जांच करने के लिए उसके घर जा रही है, इससे पता चलता है कि वे किस मजबूरी के तहत काम कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस कानून के मुताबिक काम नहीं कर रही है और यह स्पष्ट हो रहा है कि वे सत्ता में मौजूद लोगों के दबाव के आगे झुक रहे हैं.

बोम्मई ने कहा, ”पुलिस को फोन जब्त करना चाहिए और वीडियो बरामद करना चाहिए. क्या कॉलेज प्रशासन बिना वजह लड़कियों को निलंबित करेगा? लड़कियों ने कबूलनामा क्यों दिया? पुलिस ऐसे बयान देती है जैसे कॉलेज में कुछ हुआ ही नहीं. स्वीकार करने वाला पत्र ही उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए पर्याप्त है.” बोम्मई ने आरोप लगाया, ”पुलिस लड़की के घर गई और उसने बयान दिया कि उसने कोई शिकायत नहीं दी है. यदि यह एक पैमाना बन जाता है, तो ‘कुछ ताकतों’ को यह विश्वास हो जाएगा कि यहां कुछ भी किया जा सकता है तथा वे सभी प्रकार की अवैधता और हिंसा का सहारा लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे. पुलिस लोगों के बीच अपना विश्वास खो देगी.”

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