
बेंगलुरु/नयी दिल्ली/वाशिंगटन. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने बुधवार को कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता इसरो नेतृत्व और वैज्ञानिकों की पीढि.यों की मेहनत का नतीजा है. उन्होंने कहा कि यह सफलता ‘बहुत बड़ी’ और ‘प्रोत्साहित करने वाली’ है.
प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी भी दक्षिण अफ्रीका से ऑनलाइन माध्यम से इस जटिल मिशन के मुकाम तक पहुंचने के गवाह बनने के लिए जुड़े थे और उन्होंने भी वैज्ञानिकों की कोशिश की प्रशंसा की.
मिशन परिचालन परिसर में इसरो टीम को संबोधित करते हुए सोमनाथ ने कहा, ” माननीय प्रधानमंत्री ने मुझे फोन कॉल किया और अपनी शुभकामनाएं आप सभी को और आपके परिवारों को इसरो में किए गए आपके शानदार कार्य के लिए दी हैं. चंद्रयान-3 और ऐसे अन्य मिशन में सहयोग देने के लिए मैं उनको धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. राष्ट्र के लिए हम जो प्रेरणादायक कार्य कर रहे हैं, उसे आगे बढ़ाने के लिए हमें प्रशंसा मिल रही है. ” सोमनाथ ने मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करने वाले सभी लोगों का और इसरो के पूर्व प्रमुख ए एस किरन कुमार समेत अन्य वैज्ञानिकों का भी आभार जताया.
उन्होंने कहा, ” वे बहुत मददगार रहे, वे उस टीम का हिस्सा थे जो वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास बढ़ाते थे. इससे वैज्ञानिक अपने काम की समीक्षा करते थे और सुनिश्चित करते थे कि कोई गलती न हो.” इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और 26 किलोग्राम वजनी रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस लैंडर मॉड्यूल की ‘सॉफ्ट लैंडिग’ कराने में सफलता हासिल की. भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ.
सोमनाथ ने रेखांकित किया कि यह इसरो नेतृत्व और वैज्ञानिकों की पीढि.यों की मेहनत का नतीजा है. उन्होंने कहा, ”यह वह यात्रा है जो चंद्रयान-1 से शुरू हुई थी, जो चंद्रयान-2 में भी जारी रही और चंद्रयान-2 अब भी काम कर रहा है और बहुत से संदेश भेज रहा है.” सोमनाथ ने कहा, ” चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न बनाने के साथ चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 बनाने वाली पूरी टीम के योगदान को याद किया जाना चाहिए और धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए.” उन्होंने कहा, ”यह प्रोत्साहित करने वाली प्रगति है और निश्चित तौर पर बहुत बड़ी है.”
प्रधानमंत्री ने इसरो प्रमुख सोमनाथ को फोन कर चंद्रयान-3 अभियान की सफलता पर बधाई दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता पर बुधवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख एस. सोमनाथ को बधाई दी और कहा कि वह जल्द ही बेंगलुरु का दौरा कर पूरी टीम को व्यक्तिगत रूप से शुभकामनाएं देंगे.
जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रधानमंत्री ने फोन पर कहा, ”सोमनाथ जी… आपका नाम सोमनाथ भी चंद्रमा से जुड़ा हुआ है. आपके परिवार के सदस्य भी खुश होंगे. आपको और आपकी टीम को हार्दिक बधाई.” चंद्रयान की सफल लैंडिंग के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने इसरो प्रमुख को फोन किया. उन्होंने कहा, ”कृपया मेरी शुभकामनाएं सभी तक पहुंचाएं. अगर संभव हुआ तो मैं व्यक्तिगत रूप से बहुत जल्द आपका अभिवादन करूंगा.”
चंद्रयान-3 की सफलता पर नासा प्रमुख ने भारत और इसरो को बधाई दी
नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने बुधवार को चांद पर ‘चंद्रयान-3’ की सफल ‘सॉफ्ट-लैंडिंग’ पर भारत को बधाई दी और कहा कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की “साझेदार” बनकर खुश है. नेल्सन ने एक्स पर पोस्ट किया, “चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग पर इसरो को बधाई! और चंद्रमा पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनने पर #भारत को बधाई. हम इस मिशन में आपका भागीदार बनकर खुश हैं!”
वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग की सराहना की, कहा- इतिहास रचा गया
भारत के महत्वाकांक्षी चंद्रयान-3 मिशन की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की वैज्ञानिक समुदाय ने सराहना की है.
प्रमुख वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने कहा कि यह शानदार उपलब्धि न केवल चंद्र अन्वेषण पर भारत की विशिष्ट छाप को दर्शाती है, बल्कि मानव सहयोग, दृढ़ संकल्प और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी की शक्ति को भी प्रर्दिशत करती है.
भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु के वैज्ञानिक डॉ. क्रिसफिन कार्तिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग अंतरिक्ष यात्रा की दिशा में हमारी सामूहिक प्रगति का प्रमाण है. यह विविधता में एकता की सुंदरता को दर्शाता है क्योंकि हम एक साथ ब्रह्मांड में यात्रा करते हैं.”
कार्तिक ने कहा, ”धीमे ही सही, लक्ष्य तक पहुंचना यह कहने से बेहतर है कि हमने दौड़ जीत ली. मैं इस पर जोर देता हूं क्योंकि कई लोग इसकी तुलना हमारे मित्र राष्ट्र के कार्यक्रमों से कर रहे हैं. यह कहना अच्छा है कि हम पृथ्वीवासियों ने कई मायनों में ब्रह्मांड में जाने की दौड़ जीती है.” गत 14 जुलाई को प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान-3 से पहले चंद्रयान-2 सात सितंबर 2019 को चंद्र सतह पर पहुंचने से कुछ देर पहले ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ में विफल हो गया था. भारत ने पहला चंद्र मिशन 2008 में भेजा था.
शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस, दिल्ली-एनसीआर में प्रोफेसर और ओम्निप्रेजेंट रोबोट टेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आकाश सिन्हा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कामयाबी को ”ऐतिहासिक उपलब्धि” के रूप में सराहा, जो नयी पीढ़ी के भावी वैज्ञानिकों को प्रेरित करेगी.
चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने में शामिल रहे सिन्हा ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”इस शानदार उपलब्धि के साथ, भारत ने चांद के दक्षिणी घ्रुव पर उतरने वाला पहला देश बनकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है.” लैंडर (विक्रम) और 26 किलोग्राम के रोवर (प्रज्ञान) वाले लैंडर मॉड्यूल ने इसी तरह के रूसी लैंडर के दुर्घटनाग्रस्त होने के एक हफ्ते से भी कम समय बाद शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की.
सिन्हा ने कहा, ”इसरो का चंद्रयान मिशन, जो चंद्रमा पर पानी की खोज में अग्रणी था, नए मानक स्थापित करता रहा है. अपने तत्काल वैज्ञानिक प्रभाव से परे, यह मिशन नयी पीढ़ी की युवा प्रतिभाओं को अंतरिक्ष अन्वेषण और विज्ञान के क्षेत्र में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगा.” सिन्हा ने इस बात को रेखांकित किया कि मिशन की उपलब्धियां ”बाधाओं को खत्म करेंगी और नए मानक स्थापित करेंगी”, जिससे भारत चंद्र अनुसंधान में अग्रणी बन जाएगा. उन्होंने कहा, ”हमारी टीम ने प्रज्ञान रोवर के दिशासूचक का सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए इसरो के साथ लगातार काम किया. हम अपने काम और शोध को चंद्रमा तक पहुंचते हुए देखकर खुश हैं.”
खगोलभौतिकीविद् संदीप चक्रवर्ती ने कहा कि चंद्रयान-3 की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता. भारतीय अंतरिक्ष भौतिक विज्ञान केंद्र, कोलकाता के निदेशक ने कहा, ”सॉफ्ट लैंडिंग चंद्रमा से भविष्य की गतिविधियों के लिए एक शुरुआत है. यह बाहरी दुनिया का प्रवेश द्वार है.” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह उपलब्धि भारत को अंतरिक्ष यात्रा करने वाले देशों के एक विशिष्ट समूह में ले जाती है, जहां वह चंद्रमा की वैज्ञानिक और खोजपूर्ण क्षमता पर अपना दावा कर सकता है.
चक्रवर्ती ने कहा, ”सफल लैंडिंग हर नागरिक में आत्मविश्वास जगाती है. छात्रों की महत्वाकांक्षा बढ़ाती है. भारत की सहमति के बिना चंद्रमा पर कोई भी भविष्य का विनियमन नहीं किया जा सकता है. इसलिए, यह भारतीय संदर्भ में एक आदर्श बदलाव की घटना होगी.” इस सफलता ने इसरो और भारतीय शिक्षा जगत द्वारा विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संचालित प्रणालियों के उल्लेखनीय योगदान को भी रेखांकित किया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्रणालियों ने यान को चंद्रमा की सतह पर सटीकता के साथ पहुंचाने, खतरों का पता लगाने और अंतत? सुरक्षित लैंडिंग करने में सक्षम बनाया.
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत स्वायत्त संगठन, विज्ञान प्रसार के वैज्ञानिक और एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की पब्लिक आउटरीच कमेटी के सदस्य डॉ. टी वी वेंकटेश्वरन ने प्रौद्योगिकी के इस एकीकरण की सराहना करते हुए कहा कि यह युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करेगा और वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देगा.
वेंकटेश्वरन ने कहा, ”सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग से पता चलता है कि एआई-संचालित एल्गोरिद्म ने अच्छा काम किया है. उसी एल्गोरिद्म को संशोधित किया जा सकता है और अन्य स्वायत्त यानों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.” उन्होंने कहा, ”इस सफलता से इसरो के साथ-साथ देशभर के वैज्ञानिकों का भी मनोबल बढ़ेगा. इसके अलावा, यह चंद्रमा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लगातार अध्ययन का मार्ग प्रशस्त करेगा. यही तकनीक इसरो को भविष्य के मिशन में मंगल ग्रह पर उतरने में भी मदद करेगी.” विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि यह सफलता कोई समापन बिंदु नहीं है बल्कि आगे की खोज की दिशा में एक कदम है. चक्रवर्ती ने कहा कि चंद्र अन्वेषण नीतियों को आकार देने में देश का प्रभाव बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग महत्वाकांक्षी वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष के प्रति उत्साही खोजकर्ताओं और बड़े पैमाने पर वैश्विक समुदाय के लिए एक स्पष्ट आह्वान के रूप में गूंजती है.
वेंकटेश्वरन ने कहा कि आम जनता विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लाभों का आनंद ले सकती है या उन्हें स्कूल में सामान्य विज्ञान पाठ्यक्रम का थोड़ा सा अनुभव हो सकता है. हालांकि, उन्हें इसके निर्माण के पीछे के विज्ञान का अनुभव करने का अवसर शायद ही मिलता है. उन्होंने कहा, ”मीडिया के जरिये व्यापक कवरेज और उत्साह के साथ आम जनता की विज्ञान के प्रति दिलचस्पी बढ़ती है. इस तरह का उत्साह स्वाभाविक रूप से युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की ओर आर्किषत करता है.”



