विश्व कप फाइनल: प्रज्ञानानंदा और कार्लसन के बीच दूसरी बाजी भी ड्रॉ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 23 Aug 2023 08:56 PM
विश्व कप फाइनल: प्रज्ञानानंदा और कार्लसन के बीच दूसरी बाजी भी ड्रॉ
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बाकू/चेन्नई. भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन के बीच बुधवार को यहां फिडे विश्व कप शतरंज टूर्नामेंट की दूसरी क्लासिकल बाजी भी ड्रॉ रही. दूसरी बाजी में डेढ. घंटे के खेल और 30 चाल के बाद दोनों खिलाड़ी ड्रॉ पर सहमत हो गए. चैंपियन का फैसला अब गुरुवार को टाईब्रेकर के जरिए होगा.

कार्लसन ने सफेद मोहरों से प्रज्ञानानंदा के खिलाफ ठोस प्रदर्शन किया. भारतीय खिलाड़ी को हालांकि काले मोहरों से खेलते हुए किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और दोनों खिलाड़ी 30 चाल के बाद मुकाबले को ड्रॉ करने पर राजी हो गए. मंगलवार को पहली बाजी भी चार घंटे से अधिक खेल और 70 से अधिक चाल के बाद ड्रॉ रही थी.

भारत के 18 साल के प्रज्ञानानंदा ने सोमवार को सेमीफाइनल में टाईब्रेक के जरिए दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी फाबियानो करूआना को हराया था और फाइनल में जगह बनाई थी. प्रज्ञानानंदा इसके साथ ही महान बॉबी फिशर और कार्लसन के बाद कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने वाले तीसरे सबसे युवा खिलाड़ी बने.

भारतीय शतरंज की यह स्वर्णिम पीढ़ी है : विश्वनाथन आनंद

भारत से इतने सारे शतरंज ग्रैंडमास्टर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना नाम रोशन कर रहे हैं कि महान भारतीय खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद का मानना है कि मौजूदा पीढ़ी भारतीय शतरंज की ्स्विवणम पीढ़ी है. उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब भारतीय खिलाड़ी अजरबेजान के बाकू में चल रहे शतरंज विश्व कप में सुर्खियां बटोर रहे हैं जिसमें युवा ग्रैंडमास्टर रमेशबाबू प्रगानानंद फाइनल में नार्वे के मौजूदा नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन से भिड़ रहे हैं.

आनंद ने एक साप्ताहिक ‘न्यूज मैग्जीन’ से बातचीत कि वह इस बात से ही हैरान थे कि ज्यादातर खिलाड़ियों की ईएलओ रेटिंग 2,700 से ज्यादा की है, विशेषकर 20 साल के कम उम्र के खिलाड़ियों की जिसे उन्होंने ‘विशेष’ करार दिया. आनंद ने कहा कि हो सकता है कि यह जल्दबाजी हो लेकिन ये खिलाड़ी ्स्विवणम पीढ़ी के हैं. उन्होंने कहा, ”ये सभी खिलाड़ी 2,700 से ज्यादा की ईएलओ रेटिंग में शामिल हैं. और ये सभी अंडर-20 हैं. ऐसा आमतौर पर नहीं होता है, इसलिये यह वास्तव में विशेष है. ”

उन्होंने कहा, ”मैं उन्हें इसलिये ्स्विवणम पीढ़ी कह रहा हूं क्योंकि वे अगले 10 साल शीर्ष पर ही खेलते रहेंगे. निश्चित रूप से उनके करियर का चढ़ाव अलग अलग रहेगा लेकिन वे अगले 10 साल इसी तरह से बितायेंगे. ” वह इस बात से भी खुश थे कि इतने सारे भारतीय खिलाड़ी इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं जबकि उनके समय में ऐसा नहीं होता था.

आनंद ने कहा, ”यह बहुत ही अलग तरह का अहसास है क्योंकि काफी लंबे समय तक टूर्नामेंट में एकमात्र मैं भारत की चुनौती पेश करता था . ” हालांकि हाल के समय में शतरंज के खेल में वह बदलाव महसूस करते हैं लेकिन वह अगली पीढ़ी को सलाह देने के इच्छुक हैं.

उन्होंने कहा, ”मैं अपने अनुभव साझा करूंगा, विशेषकर मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक. लेकिन शतरंज में ही इतना बदलाव हो हो चुका है. जब मैं बड़ा हो रहा था तो हम लोगों को यह बताने की कोशिश करते थे कि आप बेहतर चाल कैसे चलोगे? लेकिन अब कम्प्यूटर आपको तुरंत ही सर्वश्रेष्ठ चाल बता देता है और वो भी इतनी जल्दी, इसलिये सोच लगभग समाप्त ही हो गयी है. ”

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