चंद्रमा की सतह पर चिह्नित क्षेत्र के अंदर उतरा ‘विक्रम’ : सोमनाथ

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 24 Aug 2023 07:49 PM
चंद्रमा की सतह पर चिह्नित क्षेत्र के अंदर उतरा ‘विक्रम’ : सोमनाथ
ऑडियो सुनें

बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान का लैंडर ‘विक्रम’ चंद्रमा की सतह पर चिह्नित क्षेत्र के अंदर उतरा. सोमनाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”लैंडर चिह्नित स्थान पर सही से उतरा. लैंडिंग स्थल को 4.5 किमी गुणा 2.5 किमी के रूप में चिह्नित किया गया था. मुझे लगता है कि उस स्थान पर, और उसके सटीक केंद्र की पहचान उतरने के स्थल के रूप में की गई थी. यह उस बिंदु से 300 मीटर के दायरे में उतरा. इसका मतलब है कि यह लैंडिंग के लिए चिह्नित क्षेत्र के अंदर है.”

इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस ‘एलएम’ की सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिग कराई. भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ. इसरो ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि लैंडर से रोवर बाहर निकल गया है. इसरो प्रमुख ने एक सवाल के जवाब में कहा कि रोवर अब अच्छी तरह काम कर रहा है.

इसरो को उम्मीद कि लैंडर और रोवर केवल एक चंद्र दिवस तक ही काम नहीं करेंगे

चंद्रमा पर चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर के सफलतापूर्वक उतरने के बाद इसरो को उम्मीद है कि इस मिशन की अवधि एक चंद्र दिवस या पृथ्वी के 14 दिन तक सीमित नहीं रहेगी और चांद पर फिर से सूर्य निकलने पर यह पुन: सक्रिय हो सकता है. लैंडर और रोवर के उतरने के बाद, उन पर मौजूद प्रणालियां अब एक के बाद एक प्रयोग करने के लिए तैयार हैं, ताकि उन्हें 14 पृथ्वी दिनों के भीतर पूरा किया जा सके, इससे पहले कि चंद्रमा पर गहरा अंधेरा और अत्यधिक ठंडा मौसम हो जाए.

चंद्रयान का लैंडर विक्रम बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा और इसने इस मिशन की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के साथ एक उद्देश्य पूरा किया. इसरो ने आज घोषणा की कि रोवर प्रज्ञान लैंडर से बाहर निकल गया है. इसने कहा, ”भारत ने चांद पर चहलकदमी की.” कुल 1752 किलोग्राम वजनी लैंडर और रोवर चंद्रमा के वातावरण का अध्ययन करने के वास्ते एक चंद्र दिन के प्रकाश में परिचालन करने के लिए डिजाइन किए गए हैं.

हालांकि, इसरो के अधिकारी इनके एक और चंद्र दिवस के लिए सक्रिय होने की संभावना को खारिज नहीं कर रहे. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सॉफ्ट लैंडिंग के बाद की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा था, ”इसके बाद एक के बाद एक सारे प्रयोग चलेंगे. ये सभी चंद्रमा के एक दिन में जो पृथ्वी के 14 दिन के बराबर है, में पूरे करने होंगे.” उन्होंने कहा था कि जब तक सूरज की रोशनी रहेगी, सारी प्रणालियों को ऊर्जा मिलती रहेगी.

सोमनाथ ने कहा, ”जैसे ही सूर्य अस्त होगा, हर तरफ गहरा अंधेरा होगा. तापमान शून्य से 180 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाएगा. तब प्रणालियों का काम कर पाना संभव नहीं होगा और यदि यह आगे चालू रहता है तो हमें खुश होना चाहिए कि यह फिर से सक्रिय हो गया है और हम एक बार फिर से प्रणाली पर काम कर पाएंगे.” उन्होंने कहा, ”हमें उम्मीद है कि ऐसा ही कुछ हो.”

Breaking news. hindi news. Navabharat News. Latest news, in-depth analysis and opinion.
नवभारत न्यूज : छत्तीसगढ़, असम, ओडिशा, देश, दुनिया और राज्यों की खबरों का विश्वसनीय मंच.

लेखक के बारे में
By Yogesh Kumar Sahu