छात्र को सहपाठियों से थप्पड़ लगवाने का मामला, बदल सकता है पीड़ित स्कूल

वीडियो छात्र के चाचा ने शूट किया था.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के एक निजी स्कूल में शिक्षिका द्वारा सहपाठियों से थप्पड़ लगवाए जाने की घटना के पीड़ित कक्षा दो के छात्र का गांव के ही सरकारी प्राथमिक स्कूल में सोमवार को दाखिला कराए जाने की संभावना है. बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शुभम शुक्ला ने रविवार को पीटीआई-भाषा को बताया, “पीड़ित छात्र के पिता नहीं चाहते कि उनका बेटा नेहा पब्लिक स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखे. खंड शिक्षा अधिकारी ने छात्र से बात की थी जिसमें उसने गांव के ही सरकारी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने की इच्छा जाहिर की थी लिहाजा सोमवार को प्राइमरी स्कूल में उसका दाखिला कराया जाएगा, बशर्ते उसका परिवार ऐसा करने को तैयार हो.”

शुक्ला ने यह भी कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी सोमवार को खब्बूपुर गांव के नेहा पब्लिक स्कूल जाएंगे और जो बच्चे नेहा पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के लिए आना चाहते हैं उनके लिए व्यवस्था की जाएगी क्योंकि वे पहले से ही शुल्क का भुगतान कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि स्कूल प्रशासन को घटना के सिलसिले में कारण बताओ नोटिस जारी कर सोमवार तक के लिए मोहलत दी गई है. उत्तर नहीं देने पर स्कूल की मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी गई है.

गौरतलब है कि गत शुक्रवार को मुजफ्फरनगर के खब्बूपुर गांव में स्थित नेहा पब्लिक स्कूल का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कथित रूप से होमवर्क नहीं करने पर शिक्षिका तृप्ता त्यागी को दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र को उसके सहपाठियों से बुला-बुलाकर थप्पड़ लगवाते देखा गया था. वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों समेत तमाम वर्गों ने इसकी कड़ी निंदा की थी.

मामला तूल पकड़ने के बाद शनिवार को पीड़ित छात्र के परिवार की शिकायत के आधार पर शिक्षिका तृप्ता त्यागी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के लिए सजा) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

त्यागी ने अपने बचाव में कहा कि इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने के लिए वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है. उसने दावा किया कि वीडियो छात्र के चाचा ने शूट किया था. हालांकि शिक्षिका ने माना कि छात्र को उसके सहपाठियों से थप्पड़ लगवाना गलत था, लेकिन उसे ऐसा करने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वह दिव्यांग हैं और खड़े होकर उस छात्र तक पहुंचने में सक्षम नहीं थीं.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button