‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार भारतीय संघ और इसके सभी राज्यों पर हमला है: राहुल गांधी

'एक राष्ट्र, एक चुनाव' लोकतंत्र और संघवाद के लिए त्रासदी होगा : ओवैसी

नयी दिल्ली/हैदराबाद/इंदौर. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार भारतीय संघ और इसके सभी राज्यों पर हमला है. कांग्रेस नेता ने ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में कहा, ”इंडिया भारत है और यह राज्यों का संघ है.” उन्होंने कहा, ”एक देश, एक चुनाव का विचार भारतीय संघ और इसके सभी राज्यों पर हमला है.” गांधी का यह बयान एक साथ चुनाव कराने की संभावना पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने के बाद आया है.

कांग्रेस ने रविवार को कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ पर उच्चस्तरीय समिति का वक्त अत्यधिक संदिग्ध है और इसकी संदर्भ शर्तों ने पहले ही इसकी सिफारिशें निर्धारित कर दी हैं. वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पोस्ट में कहा, ”एक देश, एक चुनाव पर उच्चस्तरीय समिति एक रस्मी कवायद है, जिसका वक्त अत्यधिक संदिग्ध है. इसकी संदर्भ शर्तों ने पहले ही अपनी सिफारिशें निर्धारित कर दी हैं.” कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को समिति में शामिल नहीं करने को लेकर भी निशाना साधा. सरकार ने खरगे की जगह राज्यसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद को समिति में शामिल किया है.

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ लोकतंत्र और संघवाद के लिए त्रासदी होगा : ओवैसी
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा देश में बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए त्रासदी होगी और ऐसा लगता है कि इस पर विचार करने के लिए समिति का गठन बस औपचारिकता है. केंद्र सरकार ने एकसाथ चुनाव कराने की संभावनाएं खंगालने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनायी है.

ओवैसी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, ” यह उस समिति की नियुक्ति की अधिसूचना है जो एक राष्ट्र, एक चुनाव पर गौर करेगी. यह स्पष्ट है कि यह बस औपचारिकता है और सरकार पहले ही इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय ले चुकी है. एक राष्ट्र, एक चुनाव बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए त्रासदी होगी.” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आगामी विधानसभा चुनावों के कारण एलपीजी के दाम घटाने पड़े और वह एक ऐसा परिदृश्य चाहते हैं जहां यदि वह चुनाव जीत जाएं तो वह बिना किसी जवाबदेही के अगले पांच साल ‘जनविरोधी’ नीतियां के साथ निकाल दें. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ” मोदी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति को एक सरकारी समिति का प्रमुख नियुक्त कर राष्ट्रपति के उच्च पद की गरिमा घटा दी है. राज्यसभा में विपक्ष के पूर्व नेता को इसमें क्यों शामिल किया गया है?”

दिग्विजय सिंह ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा को भारतीय संविधान पर हमला बताया

कांग्रेस के नेता एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की संभावनाओं पर औपचारिक विमर्श शुरू करने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए रविवार को कहा कि यह अवधारणा संविधान पर हमला है. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इस अवधारणा के विषय में गठित समिति का अध्यक्ष बनाकर उनका अपमान किया है.

सिंह ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा को लेकर इंदौर में संवाददाताओं से कहा, “यह (अवधारणा) भारतीय संविधान पर हमला है. इस विषय में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बड़ा अच्छा बयान दिया है कि एक देश, एक चुनाव के बजाय एक देश, एक आमदनी की अवधारणा लागू करके दिखाई जानी चाहिए. अमीर और गरीब के बीच की खाई कम की जानी चाहिए.” सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति कोविंद को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं तथा स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की संभावनाओं पर गौर करने और इस सिलसिले में सिफारिशों के लिए बनाई गई उच्च स्तरीय समिति का अध्यक्ष बनाया है.

सिंह ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए कहा,”इससे पहले किसी पूर्व राष्ट्रपति को इतना हल्का काम कभी नहीं दिया गया है. यह उनका अपमान है.” सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु के युवा कल्याण मंत्री उदयनिधि स्टालिन के विवादास्पद बयान पर सिंह ने यह कहते हुए प्रतिक्रिया देने से दो टूक इनकार कर दिया कि उन्हें तमिल नहीं आती. उन्होंने कहा,”मुझे तमिल नहीं आती. पहले मुझे पता तो चले कि उन्होंने (स्टालिन) तमिल में कहा क्या है.”

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