ताजमहल: कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते करते हुए कहा कि जनहित याचिका की प्रणाली का मजाक न बनाएं

Author: www.navabharat.news
UPDATED: Thu, 12 May 2022 02:22 PM
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ताजमहल के बंद कमरों को खोलने की गुजारिश वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते करते हुए कहा कि जनहित याचिका की प्रणाली का मजाक न बनाएं। अपने विषय पर पहले सही से रिसर्च करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय में अपना नामांकन कराएं, यदि कोई विश्वविद्यालय आपको ऐसे विषय पर शोध करने से मना करता है तो हमारे पास आएं। याचिका पर सवा दो बजे फिर सुनवाई होगी।

अयोध्या के भाजपा नेता की याचिका पर हुई सुनवाई
करीब 45 मिनट की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने सवा दो बजे फिर मामले की सुनवाई नियत की है। बता दें कि यह याचिका अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने दायर की है। याचिका में इतिहासकार पीएन ओक की किताब ताजमहल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में तेजोमहालय है, जिसका निर्माण 1212 ईसवीं में राजा परमर्दिदेव ने कराया था। याचिका में यह भी दावा है कि ताजमहल के बंद दरवाजों के भीतर भगवान शिव का मंदिर है।

याचिका में अयोध्या के महंत परमहंस के वहां जाने और उन्हें भगवा वस्त्रों के कारण रोके जाने संबंधी हालिया विवाद का भी जिक्र किया गया है। याचिका ने ताजमहल के संबंध में एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (तथ्यों का पता लगाने वाली समिति) बनाकर अध्ययन करने और ताजमहल के बंद करीब 20 दरवाजों को खोलने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

‘कोर्ट की निगरानी में खोलकर वीडियोग्राफी की जाए’
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के प्रोफेसर नदीम रिजवी ने ताजमहल को धार्मिक रंग दिए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 300 साल तक ताजमहल के तहखाने और बाकी हिस्से खुले रहे। कई पीढ़ियों ने इसे देख लिया। कोई चिह्न यहां नहीं है। ताज के जो हिस्से बंद किए, वह धार्मिक कारणों से नहीं किये गए, बल्कि ताज में भीड़ और सुरक्षा कारणों से किए गए।

उन्होंने कहा कि स्मारक की संरक्षा और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एएसआई ने पूरे देश में स्मारकों के कुछ हिस्सों को बंद किया। प्रो. रिजवी ने कहा कि ताज के तहखाने खोलने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन यह कोर्ट की निगरानी में खोले जाएं और वीडियोग्राफी की जाए। तहखाने खोलने के बाद यह डर है कि कहीं कोई मूर्ति न रख दे और विवाद स्थायी हो जाए।

‘धार्मिक रंग देने की साजिश’
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा कि ताजमहल जैसी विश्व धरोहर को धार्मिक रंग देने की साजिश हो रही है। मैं नहीं चाहता कि तहखाने खोले जाएं। उसका कोई प्रयोजन तो हो। यह जिस मकसद से मांग की जा रही है, वह गलत है। कोई भी कहीं से आकर मांग करेगा और उस पर आदेश हों, यह गलत है।
‘वीडियोग्राफी कराई जाए’

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुगम आनंद ने कहा कि ताजमहल के तहखानों के सर्वे में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। एक बार वीडियोग्राफी करा ली जाए तो विवाद समाप्त हो जाएंगे। पर्यटकों के लिए तहखाने खोलना आर्कियोलोजी के मुताबिक मुमकिन नहीं है।

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