FPI संबंधी नियम हटाने का लाभार्थी अडाणी समूह, संसद में JPC की मांग जारी रखेंगे: कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 01 Jun 2023 08:29 PM
FPI संबंधी नियम हटाने का लाभार्थी अडाणी समूह, संसद में JPC की मांग जारी रखेंगे: कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने ऊंचे जोखिम वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ओर से अतिरिक्त खुलासे को अनिवार्य करने संबंधी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रस्ताव को लेकर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि अडाणी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए पहले जिन नियमों को हटाया गया था, उन्हें अब वापस लाया जा रहा है.

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अडाणी समूह से जुड़े मामले में कांग्रेस, संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग संसद के आगामी मानसून सत्र में उठाएगी तथा इस विषय पर सभी विपक्षी दल एकजुट हैं. उनका यह भी कहना था कि उम्मीद की जाती है कि सेबी का यह नया कदम आंखों में धूल झोंकने के लिए नहीं है और पहले के निवेश भी इसके दायरे में आएंगे. उल्लेखनीय है कि सेबी ने ऊंचे जोखिम वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ओर से अतिरिक्त खुलासे को अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया है. इससे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) की जरूरत को लेकर किसी तरह की कोताही से बचा जा सकेगा.

रमेश ने संवाददाताओं से कहा, ”शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों के लिए नियम होते हैं. इन नियमों से पता चलता था कि विदेशी निवेशकों के पीछे का असली/मुख्य निवेशक कौन है? लेकिन 31 दिसंबर, 2018 को इन नियमों को कमजोर किया गया, फिर 21 अगस्त 2019 को नियमों को हटा दिया गया.” उन्होंने दावा किया, ”जब नियम हटे तो शेल कंपनियां बनीं, शेयर बाजार में विदेशी निवेशक आए लेकिन इनके पीछे कौन है, ये पता नहीं चल पाया. नतीजा यह हुआ कि शेल कंपनियों में 20 हजार करोड़ कहां से आए, इसकी कोई जानकारी नहीं है.”

रमेश का कहना था, ”अब सेबी ने परामर्श पत्र जारी कर पुराने नियमों को वापस लाने की बात कही है. अडाणी मामले में गठित हुई उच्चतम न्यायालय की समिति ने भी कहा कि नियमों के हटने से हमें बहुत नुकसान पहुंचा है.” उन्होंने दावा किया, ” कुछ चुने हुए पूंजीपतियों के फायदे के लिए 2018-19 में नियमों को बदलकर पारर्दिशता को खत्म किया गया. सेबी ने ‘हम अडाणी के हैं कौन’ और उच्चतम न्यायालय की समिति के कारण अपना रवैया बदला है. अडाणी की शेल कंपनियों में 20 हजार करोड़ किसके हैं, ये असली सवाल है.”

कांग्रेस नेता ने यह सवाल भी किया, ”नियम क्यों हटाया गया और किसके दबाव में हटाया गया?” रमेश ने आरोप लगाया, ”कहा जाता है कि मोदी सरकार ने ‘लाभार्थी’ नाम का एक नया वर्ग खड़ा कर दिया है, लेकिन इस नियम को हटाने का एक ही लाभार्थी था और वो है अडाणी समूह.” रमेश ने कहा, ह्लसेबी का कदम हमारी प्रश्न श्रृंखला ‘हम अडाणी के हैं कौन’ की भी पुष्टि करता है, जिसके तहत हमने प्रधानमंत्री से 100 सवाल पूछे थे. हालांकि, वह अभी भी पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं.ह्व कांग्रेस ने इस मौके पर ‘हम अडाणी के हैं कौन, प्रधानमंत्री से 100 सवाल’ शीर्षक वाली पुस्तिका भी प्रकाशित की है.

रमेश ने कहा, ”इस ‘मोडानी घोटाले’ की सच्चाई जेपीसी के द्वारा सामने आएगी और हम इसकी मांग करते रहेंगे. संसद के नए भवन में जब मानसून सत्र होगा तो हम यह मांग उठाएंगे.” एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि जेपीसी की मांग को लेकर विपक्षी दल एकजुट हैं.

अमेरिकी संस्था ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ की कुछ महीने पहले आई रिपोर्ट में अडाणी समूह पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगाए गए थे. इसके बाद से कांग्रेस लगातार इस मामले को उठाते हुए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से इसकी जांच कराने की मांग कर रही है. अडाणी समूह ने सभी आरोपों को खारिज किया है.

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