सेना की युद्धक तैयारी को बेहतर बनाएगा एआई; हथियार बनेंगे स्मार्ट, बढ़ेगी सटीकता

Author: navabharat digital
UPDATED: Wed, 18 Feb 2026 04:09 PM
सेना की युद्धक तैयारी को बेहतर बनाएगा एआई; हथियार बनेंगे स्मार्ट, बढ़ेगी सटीकता
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नई दिल्ली: इंडियन आर्मी अब टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर कई बड़ी पहल कर रही है। राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान सेना ने साफ कर दिया कि आने वाले समय की लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जीती जाएगी। बुधवार को ‘स्मार्टाइजिंग द किल चेन’ विषय पर हुए एक खास सेमिनार में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के दिग्गज और बड़े शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ जुटे। इसका मकसद था, कैसे एआई के जरिए हथियारों, वाहनों, ड्रोन और दूसरे सैन्य प्लेटफॉर्म्स को इतना स्मार्ट बनाया जाए कि युद्ध के हर चरण में तेजी, सटीकता और प्रभावशीलता बढ़े। एआई की मदद से अब मशीनें पहले ही बता देंगी कि कौन सा सिस्टम कब खराब हो सकता है, किस हिस्से में दिक्कत आने वाली है और कहां संसाधन पहले से भेजने होंगे। यानी अब मरम्मत बाद में नहीं, पहले से तैयारी होगी।

एआई से युद्धक तैयारियों में क्या बदलेगा

यहां डीजी ईएमई लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार साहनी ने कहा कि उद्योग जगत के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर ऑपरेशनल सटीकता प्रभावी बनाने का बड़ा अवसर है। बड़ी मात्रा में सेंसर से मिलने वाले डेटा को कार्रवाई योग्य जानकारी में बदला जा सकता है।

उभरते खतरों का पहले से अनुमान लगाया जा सकता है और पुराने हथियार सिस्टम को आधुनिक, डेटा-सक्षम और स्मार्ट प्लेटफॉर्म में अपग्रेड किया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्नत एनालिटिक्स के जरिए इंजीनियरिंग सपोर्ट को तेज करना जरूरी है, ताकि ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स अधिक मजबूत और सक्रिय बन सके।

साथ ही उन्होंने भविष्य के युद्ध में निर्णायक बढ़त हासिल करने के लिए मानव रहित हवाई प्रणालियों, काउंटर-यूएएस सिस्टम और रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स में एआई के एकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा की।

सेना मौजूदा हथियार सिस्टम और प्लेटफॉर्म्स को भी स्मार्ट बना रही है। उनमें सेंसर लगाए जा रहे हैं। इससे बिना ज्यादा खर्च किए मौजूदा संसाधनों की ताकत कई गुना बढ़ाई जा सकेगी।

सेमिनार में यह भी चर्चा हुई कि ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और रोबोटिक प्लेटफॉर्म्स में एआई का इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे स्पष्ट है कि भविष्य के युद्धों में इंसान से ज्यादा मशीनों की भूमिका होगी और जो सेना टेक्नोलॉजी में आगे होगी, वही बढ़त बनाएगी। लॉजिस्टिक्स यानी सप्लाई सिस्टम को भी पूरी तरह एआई से जोड़ने की तैयारी है। कौन सा स्पेयर पार्ट कब खत्म होगा, किस फॉर्मेशन में कितनी जरूरत पड़ेगी, किस सिस्टम को कब सर्विस की जरूरत है, यह सब पहले से अनुमान लगाकर संसाधन भेजे जाएंगे। इससे डाउनटाइम कम होगा और ऑपरेशनल टेंपो बना रहेगा।

हथियारों की मेंटिनेंस और फैसले तेजी से लिए जाएंगे

सेना के अनुसार सबसे अहम बात यह रही कि अब इंजीनियरिंग सपोर्ट सीधे कमांड फैसलों से जुड़ा होगा। कमांडर को रियल टाइम में पता होगा कि किस यूनिट के पास कौन सा उपकरण पूरी तरह तैयार है और कौन सा सिस्टम मेंटेनेंस में है। यानी फैसले और भी तेज और सटीक होंगे। इस कार्यक्रम ने संकेत दिया है कि इंडियन आर्मी सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट वॉरफेयर सिस्टम’ तैयार कर रही है। स्वदेशी नवाचार, इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के साथ साझेदारी और एआई आधारित समाधान के जरिए सेना भविष्य की जंग के लिए खुद को पूरी तरह तैयार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है अब लड़ाई सिर्फ मैदान में नहीं, डेटा और एल्गोरिद्म के स्तर पर भी लड़ी जाएगी और इंडियन आर्मी उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुकी है।

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