
नई दिल्ली: विमानन क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच एअर इंडिया और इंडिगो ने बड़ा फैसला लिया है। दोनों प्रमुख एयरलाइंस 1 जून से अपनी घरेलू उड़ानों की क्षमता में कटौती करेंगी। यह कदम अगले तीन महीने तक लागू रहेगा, जिससे हवाई यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
कई सूत्रों ने इस निर्णय के पीछे विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में तेज वृद्धि को मुख्य कारण बताया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ा है। इसके अतिरिक्त, स्कूल की छुट्टियों के बाद आने वाली मौसमी मंदी भी एक प्रमुख वजह है। एयर इंडिया अपने घरेलू परिचालन में 15 फीसदी तक की कमी करेगी। वहीं, इंडिगो अपनी सेवाओं में पांच से सात फीसदी की कटौती करने की योजना बना रहा है। यह कटौती परिचालन लागत को नियंत्रित करने और नुकसान को कम करने के लिए की जा रही है। यह निर्णय यात्रियों के लिए कुछ असुविधा पैदा कर सकता है।
विज्ञापन
ईंधन की कीमतों का असर
विमानन टरबाइन ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। यह एयरलाइंस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। अमेरिकी-ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। इसका सीधा असर एटीएफ की लागत पर पड़ रहा है। एयरलाइंस के कुल परिचालन खर्च का एक बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। इस वृद्धि से कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है।
मौसमी मंदी और भविष्य की रणनीति
स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद आमतौर पर हवाई यात्रा में कमी आती है। इसे मौसमी मंदी कहा जाता है। इस अवधि में यात्रियों की संख्या घट जाती है, जिससे एयरलाइंस को नुकसान होता है। क्षमता में कटौती करके एयरलाइंस अपनी लागत कम करना चाहती हैं। यह कदम उन्हें वित्तीय दबाव से निपटने में मदद करेगा। एयर इंडिया और इंडिगो दोनों ही इस अवधि में अपनी सेवाओं को अनुकूलित कर रही हैं।



