पश्चिम एशिया में संकट के बीच तेल-गैस पर अटकलें, जहाजों की सुरक्षा पर सरकार ने दिया पहला बयान

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि हाल के दिनों में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हुई है। जायसवाल ने कहा कि दोनों नेताओं की हालिया बातचीत में समुद्री जहाजरानी की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने हालांकि इस बातचीत के नतीजों या संभावित फैसलों पर अधिक जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि इस समय इससे आगे कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर बोले जयसवाल?
ईरान में मौजूदा हालात के बीच भारत सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वापसी को लेकर सक्रिय रूप से सहायता प्रदान कर रही है। जायसवाल ने बताया कि इस समय ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें छात्र, नाविक, कारोबारी, पेशेवर और कुछ तीर्थयात्री शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कई भारतीय नागरिक, खासकर छात्र, पहले ही ईरान से निकलकर अपने घर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा तेहरान में रह रहे कई भारतीयों, जिनमें छात्र और तीर्थयात्री शामिल हैं। उन्हें एहतियातन ईरान के अन्य सुरक्षित स्थानों और शहरों में स्थानांतरित किया गया है।

भारतीय दूतावास कर रही हर संभव मदद
जायसवाल ने बताया कि जो भारतीय नागरिक ईरान छोड़कर लौटना चाहते हैं, उन्हें अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते बाहर निकलने में भी मदद दी जा रही है। इसके लिए भारतीय दूतावास उनकी वीजा प्रक्रिया में सहायता कर रहा है और उन्हें जमीनी सीमाओं (लैंड बॉर्डर) को पार करने में भी मदद दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि कई भारतीय नागरिकों ने दूतावास से संपर्क किया है और उन्हें अजरबैजान और आर्मेनिया की सीमा पार कराने में सहायता दी गई है, जिसके बाद वे वहां से वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए भारत वापस लौट रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने इस अवसर पर ईरान में मौजूद उन सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी है जो भूमि सीमा के रास्ते देश छोड़ना चाहते हैं कि वे भारतीय दूतावास द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें और उसी के अनुसार अपनी यात्रा की योजना बनाएं।

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