
हम्पी. भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र के ”बोझिल” और ”नि्क्रिरय” होने के साथ ही जी-20 दुनिया के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिए सबसे उत्तरदायी समूह के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि नयी दिल्ली ने जी20 की अध्यक्षता के दौरान सभी प्रमुख वैश्विक मुद्दों को ”केंद्रीय मंच” पर लाने से कोई परहेज नहीं किया है.
कांत ने कहा कि भारत जी-20 में ”बदलाव के वाहक” के रूप में कार्य कर रहा है और वह जलवायु वित्तपोषण, ऋण जोखिम जैसे महत्वपूर्ण विकास संबंधी मुद्दों को संबोधित करने, सतत विकास लक्ष्यों पर प्रगति सुनिश्चित करने और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की एक रूपरेखा विकसित करने के लिए आम सहमति बनाने के प्रति आश्वस्त है.
जी-20 शेरपाओं की तीसरी बैठक के समापन के एक दिन बाद ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कांत ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष दुनिया के एक निश्चित हिस्से तक ही सीमित है और भारत की अध्यक्षता में समूह का ध्यान विकासात्मक एजेंडे और ‘ग्लोबल साउथ’ के सामने आने वाले मुद्दों से निपटने पर रहा है. उन्होंने कहा कि ”वर्तमान भू-राजनीति” का भोजन, ईंधन और उर्वरकों पर प्रभाव पड़ रहा है और इसका असर उभरते बाजारों पर भी पड़ा है. भारत के जी20 शेरपा ने कहा कि यह समूह बड़े मुद्दों का समाधान तलाशने का भी विश्ववसनीय मंच बनकर उभरा है.
उन्होंने कहा, ”मैं वास्तव में सोचता हूं कि एकमात्र संगठन जिसे आज हर कोई अधिकतर महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति उत्तरदायी महसूस करता है, वह जी-20 है. यहां सभी प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है. यदि अफ्रीकी संघ भी इससे जुड़ जाता है तो यह वैश्विक संरचना के लिए महत्वपूर्ण संस्था होगी क्योंकि संयुक्त राष्ट्र बहुत बोझिल और नि्क्रिरय है.” कांत ने कहा, ”सुरक्षा परिषद ने कभी नहीं सोचा था कि कोई लंबा युद्ध चलेगा. आज सभी प्रमुख मुद्दों पर जी20 के ढांचे के तहत चर्चा हो रही है और यदि जी20 निर्णय लेता है, तो चीजें होती हैं.” कांत ने कहा कि जी20 के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में भारत ने सभी प्रमुख वैश्विक मुद्दों को ”केंद्रीय मंच” पर लाने से कोई परहेज नहीं किया है.



